******** पाकिस्तान का वह गांव जिसके लिए भारत ने उसे अपने हिस्से के 12 गांव दिए थे, भारत और पाकिस्तान के बीच आजादी के बाद से ही तनावपूर्ण माहौल रहा है कश्मीर को लेकर दोनों मुल्क के बीच विवाद आजादी के बाद से ही शुरू हो गया था. लेकिन दोनों मुल्क के तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद भी यह एक ऐसा गांव है जिसके लिए भारत में अपने 12 गांव को पाकिस्तान को सौंप दिया था. भारत और पाकिस्तान की सीमा के निकट हुसैनीवाला गांव है जो फिरोजपुर जिले के अंतर्गत आता है यहां शहीद ए आजम भगत सिंह ,राजगुरु और सुखदेव की समाधिया मौजूद है .इसके अलावा भगत सिंह के साथी बटुकेश्वर दत्त की समाधि भी यहां मौजूद है साथ ही पंजाब माता के खिताब से नवाजी गई भगत सिंह की माता विद्यावती देवी जी की समाधि भी यहीं स्थित है भारत में अपने 12 गांव के बदले इस गांव को विशेष रूप से पाकिस्तान से इसलिए लिया है. क्योंकि यहां शहीदों की निशानियां देश वासियों की भावनाएं जुड़ी है यह भारतीय इतिहास से बेहद ही महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक जगह है |
शहीदों को फांसी देने के बाद अंग्रेजी अधिकारी यहां पहुंचे और उन्होंने बिना किसी रीति-रिवाज के शवों को जला दिया फिर अस्थियों को जल्दबाजी में सतलज नदी में फेंक दिया इसके बाद हुसैनीवाला में भगत सिंह ,सुखदेव और राजगुरु की समाधिया को स्थापित किया गया ,वही जब देश का बंटवारा हुआ तो यह गांव पाकिस्तान के हिस्से में चला गया इसके बाद देशवासियों की भावनाओं के मद्देनजर भारत ने पाकिस्तान को जुलाई माह के एडवर्क क्षेत्र में स्थित अपने बड़ागांव सौंप दिए और उसके बदले हुसैनीवाला ले लिया यह एक आशिक गांव आज वैसे तो बदहाली के दौर से गुजर रहा है लेकिन यहां हर वर्ष शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए हजारों लोग आते हैं सेना और सरकार भी सम्मान देने पहुंचती है ********

रायपुर //// आज 23 मार्च 2021शहीद दिवस को अखिल भारतीय शांति एवं एकजुटता संगठन, रायपुर इकाई के सदस्यों ने रायपुर के अंबेडकर चौक से शहीद भगतसिंह चौक तक यात्रा करते हुए
क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु की शहादत को याद किया ।
एप्सो रायपुर अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने शहीद दिवस के दिन आज नारायणपुर नक्सल हमले में शहीद हुए जवानों को भाव भीनी श्रधांजलि देते हुए कहा नक्सल भटके हुए लोग हैं जो क्रांति और हत्या फर्क नहीं जानते हैं। यह नक्सली घटना निंदनीय है। नक्सलियों को माओ नहीं भगतसिंह को पढ़ने की जरूरत है जो कहते थे कि हिंसा किसी समस्या का हल नहीं है।
एप्सो रायपुर सचिव विनयशील ने कहा कि जो किसान आज दिल्ली बॉर्डर पर कृषि विरोधी बिल वापस लेने के लिए लड़ रहे हैं, जहाँ 200 किसान शहीद हो चुके हैं बिना उनको याद किए, उनके साथ खड़े हुए शहादत दिवस मानना बेइमानी है। यदि हम शहीद ए आजम भगतसिंह को मानने का दावा करते हैं तो जो केंद्र सरकार किसान, मजदूर और वंचित के खिलाफ काम कर रही है उनके साथ कभी नहीं हो सकते हैं।
साल 1931 में इस दिन स्वतंत्रता आंदोलनकारी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने देश के लिए शहादत दी थी। हम सभी को उनसे देशभक्ति सीखने की जरूरत है इसी संदेश के साथ एप्सो रायपुर सदस्यों ने आदरांजलि अर्पित की । रायपुर से चांडक जी, दुर्गा कॉलेज के प्राचार्य तिवारी जी, अरुण कांत शुक्ला जी, रविन्द्र पाणिग्राही, रविन्द्र यादव, श्याम जी, प्रशांत जी, दिव्या कुमारी, पुष्पलता वैष्णव ......
तथा नागरिक समाज के लोग शामिल हुए.




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