रायपुर ///// ऑल इंडिया पावर इंजीनियरिंग फेडरेशन ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर कहा है कि
मेसर्स आरकेएम पावर जनरेशन कंपनी पीछे के दरवाजे से ₹5. 50 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली
बेचने को लेकर प्रयासरत है. जबकि छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल और चेन्नई कि मेसर्स
आरकेएम पावर जनरेशन के बीच 3 अप्रैल 2006 को एक एमओयू हुआ था जिसके अंतर्गत ग्राम
उपपुंडा तहसील डबरा जिला जांजगीर में 1440 मेगा वाट का थर्मल पावर लगाना था उस के
संदर्भ में एमओयू दिनांक तीन चार 2006 को पावर परचेज एग्रीमेंट एवं
इंप्लीमेंटेशन एग्रीमेंट 2008 को हुए 2006 में हुए अनुबंध के पालन के लिए कंपनी
आरकेएम 2018 में तक बिजली बेचने नहीं आया 12 वर्ष बाद आरकेएम ने अपनी पिटिशन 2018 में यह मांग की है कि बिजली आयोग राज्य पावर ट्रेडिंग कंपनी को आदेश करें कि
ट्रेडिंग कंपनी 30% बिजली लगभग 378 मेगा वाट बिजली खरीदकर तेलंगाना से किए
गए अनुबंध के अनुसार विक्रय करें जबकि तेलंगाना से अनुबंध मांडवा प्लांट की 1000 मेगावाट बिजली बेचने के लिए डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने किया है |
बिजली
कंपनी आरकेएम ने राज्य पावर ट्रेडिंग कंपनी को पत्र लिखकर अंडरटेकिंग दी है कि
राज्य पावर कंपनी यह 30% लगभग 400 मेगावाट पावर खरीदने के लिए बाध्य नहीं
है वह चाहे तो खरीदें और ना चाहे तो खरीदे राज्य पावर ट्रेडिंग कंपनी यदि प्लांट
चालू होने के 90 दिन तक यदि यह 30% पावर नहीं खरीदते तो हम उस बिजली को
कहीं भी बेचने के लिए स्वतंत्र हैं और इस निर्णय की पुष्टि हेतु मेसर्स आरकेएम कंपनी ने बोर्ड के दिनांक 8 दिसंबर 2014 की बैठक का आशय प्रस्ताव पारित किया इसका मतलब यह है कि एमओयू के अनुसार
आरकेएम ने 2018 में पावर जेनरेशन कंपनी को बिजली बेचने से मना कर दिया और बाहर के राज्यों को और उपभोक्ताओं को बिजली भेजता रहा लेकिन आज जब कोरोना के कारण राज्य से बाहर बिजली की डिमांड
करीब-करीब समाप्त हो गई है तो वह अपनी महंगी बिजली छत्तीसगढ़ पावर ट्रेडिंग कंपनी को बेचने के लिए आतुर हो
रहा है |
बिजली कंपनी आरकेएम ने आयोग और सरकार के
पास पिछले दरवाजे से बिजली खरीदने के लिए तमाम तरीके के जाल बिछा दिए हैं वस्तुस्थिति
यह है कि मैं आरकेएम को इसलिए भी मार्केट में इससे खरीदार नहीं मिल रहे हैं
वर्तमान में उत्तर प्रदेश और तेलंगाना को करीब ₹4 .20 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली बेच
रहा है पावर ग्रिड और लाइन लाश को जोड़ा जाए तो बिजली उत्पादन की कीमत ₹5. 20 पैसे यूनिट के आसपास पड़ती है छत्तीसगढ़
की विद्युत को ₹3 ,30 पैसे प्रति यूनिट की बिजली सेंट्रल पूल
की बिजली मिल रही है इस प्रकार इस साजिश का सीधा मतलब है छत्तीसगढ़ की जनता की
बिजली को महंगा करना
छत्तीसगढ़ ट्रेडिंग कंपनी को यदि बिजली की आवश्यकता है जैसा
कि आंकड़े बता रहे हैं कि अभी वर्तमान में 4500 मेगा वाट बिजली की डिमांड बनी हुई है. गर्मी में बिजली की मांग और भी बढ़ जाएगी तो ट्रेडिंग कंपनी
कोओपन एक्सेस में जाकर बिजली को खरीदना चाहिए ताकि राज्य के उपभोक्ताओं को सस्ती
बिजली मिले और विद्युत मंडल की आर्थिक स्थिति भी खराब ना हो यह पुराने और तथाकथित
एमओयू का फायदा लेने के लिए आरके एम पावर जेनरेशन कंपनी तमाम तरीके के हथकंडे अपना
रही हैं उसको फेडरेशन ने सक्त विरोध किया है




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