सिर्फ किओझर में ही पैदा होता है
अनिल चौबे
“”””काले रंग के मक्के को हमने भी पहली बार देखा है . इसके विकास के लिए जो संभव हो सकेगा, किया जाएगा। वाकई, यह ओडिशा राज्य व देश के लिए दुर्लभ प्रजाति की फसल है। ‘’’’’’ >श्रीधर कुमार दास,उप निदेशक, कृषि विभाग, जिला किओझर
सिर्फ ओडिशा में होती है औषधीय गुणों से भरपूर मक्के की खेती सरकार व बाजार का समर्थन नहीं मिलने से घट रहा खेती का रकबा
***********वैसे तो मक्के का रंग पीला होता है लेकिन ओडिशा में पैदा होता है काला मक्का। यह मक्का शायद ही देश के किसी और कोने में देखने को मिलता हो पर इस दुर्लभ श्रेणी की फसल का अस्तित्व खतरे में दिख रहा है। अब सिमटकर आठ-दस परिवार ही इसकी खेती कर रहे हैं। ऐसे में आशंका बलवती होने लगी है कि यदि इसकी उपेक्षा इसी तरह से होती रही तो कहीं यह सिर्फ इतिहास में ही सिमट कर न रह जाये। इसलिए इस फसल को बचाने की गुहार तेज होने लगी है। ************
कहां होती है खेती :
ओडिशा के किओझर जिले के बास्कोपाल ब्लाक की तलकन्यासारी कुमुड़ी पंचायत में उपरोजागर गाँव की पहाड़ियों पर काले रंग के मक्के की खेती होती है। पहले तो यह बड़े पैमाने पर होती थी लेकिन बाजार या सरकार से समर्थन नहीं मिलने के कारण इसकी उपज को लेकर लोगों में उत्साह कम होता जा रहा है। अब मधु सेनापति, केन्दु सेनापति व अमीन सेनापति सहित आठ से दस आदिवासी परिवार ही इसकी खेती कर रहे हैं।
औषधीय गुणों से भरपूर :
काले रंग का मक्का औषधीय गुणों के लिए खास तौर से जाना जाता है। इसका स्वाद भी अच्छा होता है। स्थानीय लोगों की मानें तो पेट दर्द होने पर इसका खीर बनाकर खाया जाता है, जिससे मरीज को आराम हो जाता है। इसके साथ ही गठिया व अन्य रोगों में भी यह लाभदायक होता है।
कब होती है फसल :
अमूमन हर साल मई-जून महीने में (रज संक्रांति के बाद) इसे लगाया जाता है। कार्तिक महीने में इसकी फसल काटी जाती है। आम तौर पर इसकी खेती उसी तरह से की जाती है जैसे पीले मक्के की। बारिश के पानी से ही इसकी सिंचाई हो जाती है।
क्या है किसानों की चिंता :
काले मक्का की खेती करने वाले किसान इसके घटते रकबे (क्षेत्रफल) और सरकार से प्रोत्साहन नहीं मिलने से परेशान हैं। उनका कहना है कि कहीं आने वाले दिनों में इस प्रजाति का मक्का विलुप्त नहीं हो जाए। वे चाहते हैं कि सरकार की ओर से उन्हें खेती के लिए मदद दी जाए और इसे दुर्लभ किस्म की फसल मानते हुए इसके संरक्षण का उपाय हो। वे फसल बेचने के लिए अच्छा बाजार उपलब्ध करवाने की भी मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि इसे बचाना है तो मुहिम चलानी होगी।




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