***मोदी जी का एक वीडियो बड़ा ही दिलचस्प है ,वह एक चुनावी सभा में बड़े दमखम से कह रहे हैं कि भाइयों बहनों पेट्रोल के दाम कम हुए हैं कि नहीं हुए ,कम हुए हैं कि नहीं हुए ऐसे नहीं जोर से बोलिए , अब आज जनता कह रही है कि मोदी जी पेट्रोल के दाम बढ़ गए हैं सुनाई दिया कि नहीं दिया, सुनाई दिया कि नहीं दिया*****
रायपुर /// मोदी सरकार में एक साल के अन्दर डीजल ,पेट्रोल के दाम ₹25 लीटर तक बढ़ा दिए हें इसको लेकर पूरे देश
में जन आक्रोश है ,इसे सरकार समझने की कोशिश क्यों नहीं कर रही है इसके पीछे जो मुख्य कारण है कि जब से सरकार ने डीजल ,पेट्रोल ,रसोई गेस के दाम के मूल्य निर्धारण करने का अधिकार इन कंपनियों के हाथ में दिया है ,तब से
वह अपना नियंत्रण खो चुकी है इस नियम के दुष्परिणाम अब जनता लगातार भुगत रही है ,
जिस उद्देश को लेकर इस नियम और नीति का
निर्धारण किया था उसके पीछे जो तर्क दिए गए थे कि पेट्रोलियम पदार्थ के दाम
इंटरनेशनल क्रूड आयल की कीमत से तय किए जाते हैं .इसलिए इसे सरकारी नियंत्रण से
अलग कर तेल कम्इंपनिओं को सोंप दिया जाये ताकि नेशनल क्रूड आयल की कीमतों के हिसाब से पेट्रोल डीजल गैस रसोई गैस की कीमतों
का निर्धारण करने का अधिकार इन कंपनियों को होना चाहिए .कंपनियों उस हिसाब से इन पेट्रोलियम पदार्थों की
कीमत खटाती बढ़ाती रहती थी . लेकिन पिछले एक वर्ष से कीमतें बढ़ ही रही हैं घट नहीं रही हें अब तक ₹
20 के ऊपर कीमतें बढ़ गई हैं जो आम उपभोक्ता की खरीदी से बहुत ऊपर है
जिसको लेकर पूरे देश में जन आक्रोश फैला रहा है
इन चतुर कंपनियों ने अपने सॉफ्टवेयर में कुछ इस तरीके के मापदंड और डाटा फीड किया है .कि क्रूड आयल की कीमतें जब गिर जाती हैं तब भी इनके मुनाफे में किसी तरीके की कोई कमी ना आए को लेकर सिर्फ दो पैसे ,तीन पैसे ,पांच पैसे से ज्यादा रेट कम नहीं करते .लेकिन क्रूड आयल बढ़ जाए के सीधे ₹2 , ₹3 तक के रेट बढ़ा देती है .इस हिसाब से पूरे साल भर में इन्होंने करीब ₹25 प्रति लीटर की कीमत बढ़ाकर ₹ 98 प्रति लीटर पेट्रोल के दाम कर हो गए हें .पेट्रोल डीजल और रसोई गैस आम उपभोक्ता के जीवन की उपयोगी वस्तु है इस पर सरकार का कोई नियंत्रण ना होने के कारण कीमत रिकॉर्ड महंगाई की चरम सीमा पर पहुंच गई है .विपक्षी पार्टियां और देश की आधी आबादी महिलाएं इसका विरोध कर रही है लेकिन सरकार इस पर तरह-तरह के कुतर्क देकर इस मामले में गंभीरता से नहीं ले रही है \
₹100
लीटर पेट्रोल के दाम भारत में सबसे आश्चर्यजनक है .मुद्दे
की बात यह भी है कि हमारे पड़ोसी देशों में पेट्रोल डीजल अभी भी 50 से ₹60 के बीच में बिक रहा है जबकि नेपाल भारत से पेट्रोल
डीजल खरीदाता है और वह ₹50 में
बेच रहा है फिर हमारे यहां ऐसा क्या है कि डीजल ₹100 लीटर से ऊपर बिक रहा है विशेषज्ञ कहते हैं कि सरकार
ने इस पर हैवी टैक्स लगा रखा है मेरा कहना है कि टेक्स्ट तो पहले भी लगा था टैक्स
में किसी तरीके की कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है कीमत बढ़ेगी तो टैक्स का कलेक्शन अधिक
होगा यह एक अलग बात लेकिन टैक्स के परसेंटेज सरकार ने नहीं बढ़ा है फिर भी कीमतें आसमान को छू रही हैं
विरोधी
पार्टियों ने इल्जाम लगाए हैं कि पेट्रोलियम पदार्थ पर अंबानी ग्रुप का कब्जा है .और वह अम्बानी ने इन कंपनियों में अपनी
जबरदस्त दखलअंदाजी कर रखी है .अम्बानी अपने हिसाब से पेट्रोल डीजल और गैस के रेट उपर नीचे करवाते
रहते हैं .अबे इसमें कितना सत्य है यह तो जांच की बात है .और सरकार को इसकी जांच
करना भी चाहिए क्योंकि यह आम उपभोक्ता का मामला है जिसको लेकर पूरे देश में
त्राहिमाम मचा हुआ है
जब से
सरकारी नियंत्रण से पेट्रोलियम पदार्थ मुक्त हुए हैं तब से लेकर अभी तक बढ़ोतरी के और कुछ नहीं हो रहा है .केंद्र सरकार
राज्य सरकारों को अपना वेट कम करना चाहिए कहकर पल्ला झाड़ रहा है .जबकि वस्तु
स्थिति नहीं है मोदी सरकार को इस तरीके की
बयानबाजी करके बचने के दुष्परिणाम आने वाले चुनाव में देखने वाले हैं \




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