बिलासपुर /////
छत्तीसगढ़ में पर्यावरण को लेकर विभाग की लापरवाही के चलते थर्मल पावर प्लांटों से खतरनाक गैस सल्फर डाइऑक्साइड और मीथेन
गैस को वायुमंडल में ना फैले के लिए किसी भी तरीके के बचाओ उपकरण इन पावर प्लांटों
में नहीं लगाए गए हें , ईएसपी से तो सिर्फ वायुमंडल में
रखाड का कंट्रोल करता हे , उसे भी ये प्लांट वाले रात
को बंद कर देते हैं बंद करने का मुख्य कारण है ईएसपी
द्वारा बिजली की खपत अधिक
होना है ,कोयला जलाने से निकलने वाली गैस को लेकर किसी
भी पावर प्लांट में अभी तक ऐसे कोई भी उपकरण नहीं लगाए गए हैं .जिनसे इन गेसों
के वायुमंडल में फैलने से रोका जा सके, को
लेकर एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में लगाई गई थी याचिका में कहां गया था की
छत्तीसगढ़ में इन प्लांटों के द्वारा उगल रही इन
जहरीली गैसों से मानव शरीर पर घातक बीमारियों का खतरा
मंडरा रहा है .और लोग उस खतरे से बीमार भी हो रहे हैं |
प्रदेश
के पावर प्लांट और दूसरे संयंत्रों में कोयला जलने से हो रहे वायु प्रदूषण को
रोकने के लिये पर्याप्त कदम नहीं उठाये गये हैं। इसे लेकर दायर जनहित याचिका पर
शासन व सम्बन्धित अन्य पक्षों से हाईकोर्ट ने कई बार जवाब मांगा है लेकिन प्रस्तुत
नहीं किया गया। कोर्ट ने तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया
है।
आरएन गुप्ता
द्वारा दायर जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस पी.आर.रामचंद्र मेनन और जस्टिस.पी.पी.साहू
की डबल बेंचमेंबुधवारकोहुई सुनवाईहुई ,याचिकाकर्ता ने कहा है
कि बिलासपुर,कोरबा,रायगढ़,रायपुर,जांजगीर-चाम्पा व भिलाई में पावर प्लांट
संचालित किये जारहे हैं।इसके अलावा भी कुछ अन्य उद्योग भी हैं जिनमें कोयले का प्रयोग होता है। इनके धुंए से लोगों को सांस की
बीमारी व चर्म रोग हो रहा है। इसके अलावा खेती को नुकसान पहुंच रहा है। कोयले से
उत्सर्जित सल्फर डाइआक्साइड,मीथेन आदि गैस बहुत खतरनाक है।
पर्यावरण विभाग द्वारा प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिये मापदंडों का पालन नहीं
कराया जा रहा है,साथ ही स्वास्थ्य विभाग इस खतरे के प्रति सजग नहीं है।




Copyright @ 2020 All Right Reserved | Powred by Divyadoot
Comments