रायपुर छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों का मतदान संपन्न हो गया है मतदान के संपन्न होते हैं एवीएम मशीन भी स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रख दी गई है चुनाव माँ व्यस्त छोटे बढे नेताओं की घर वापसी हो गई है नेता अपने कार्यकर्ता के साथ आकलन कने में लगे हुए हें कहां गड्ढा है, किसने काम नहीं किया इस स्तर पर बातचीत का दौर गरम है आकलन करता इसी तलाश में है की किसका आंकलन कितना सटीक है आंकलन के सौदागर भी बाजार में घूम रहे हैं ,सट्टा बाजार चरम सीमा पर है दोनों पार्टियां 11 लोकसभा जितने का दावा कर रही हैं.
चुनाव आयोग की EVM सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है. 48 डिग्री टेंपरेचर पर इन मशीनों को कैसे सुरक्षित रखा जा सके , वैसे तो अभी तापमान 40 / 42डिग्री के आसपास है लेकिन मई महीने में पूर्व के सालों के अनुमानों को देखते हुए लगता है टेंपरेचर 48 के आसपास पहुंच जाएगाअभी तो जैसे ही टेंपरेचर बढ़ता है हल्की फुल्की बारिश हो जा रही है लेकिन फिर भी छत्तीसगढ़ का टेंपरेचर तो टेंपरेचर है.
चौक चौराहों पर गलियों में सोसल मिडिया पर मोबाईल में आपसदारी यही चर्चा हो रही है कि किस के पल्ले में कितनी सीटें आएंगी अनुमान का यह समय भी है फिर इस बार तो करीब 2.5 प्रतिशत मतदान बढ़ा भी है, जो संकेत दे रहा है की अभी ऊंट खड़ा है किस करवट बेठेगा पता नहीं वैसे तो ऊंट रेगिस्तान का जहाज कहा था कहलाता है कहते हैं कि वह जिस करवट बैठता है हवाएं उसी तरफ से आती है यह एक संकेत है संभावनाओं का कितना सही है यह तो अनुभव करने वाला ही बता सकता है वैसे एक कहावत आम
जहां तक दोनों पार्टियों की दावेदारी की बात है दोनों के शीर्ष नेता 11 में से 11 सीटों जितने का दावा कर रही हैं अंक उस हिसाब से 22 सीटें हो जातीं हैं 22 को इकट्ठा कर दो तो सिर्फ चार बचती हें अंकगणित के अनुसार 11 में से चार भा ज पा और सात कांग्रेस ऐसा भी अनुमान अंकगणित वाले लगा रहे हैं.
छत्तीसगढ़ के चुनाव होने के बाद दोनों ही दलों के नेता उत्तर प्रदेश झारखंड मध्य प्रदेश की ओर रवाना हो गए हैं वह वहां पर अपनी पार्टियों के लिए सदल बल चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं उत्तर प्रदेश गए नेताओं में कद्दावर नेता रविंद्र चौबे की तबीयत अचानक खराब हो जाने के कारण वह लखनऊ में ही अपना इलाज करा रहे हैं मुख्यमंत्री और सहयोगी मंत्री लगातार उनकी तबीयत का जायजा ले रहे हैं आज राहुल गांधी भी प्रवीण चौबे से मिलने के लिए अस्पताल पहुंचे हैं 48 डिग्री टेंपरेचर में चुनाव कितने घातक हो रहे हैं एक तो नेताओं की जवान सिलिप हो रही है दूसरा मतदाता भी परेशान है दोनों ही बड़े दल सत्ता हथियाने के लिए वास्तविक मुद्दों को छोड़कर ऐसे मुद्दों पर चुनाव लड़ रहे हैं जिनका भारत के भविष्य के साथ कोई लेना देना नहीं है ना बेरोजगारी है नाम महंगाई है और ना ही विकास की कोई बात हो रही है वह उसको नीचे दिखाने के लिए निचले स्तर तक जा रहे हैं तो वह दूसरे को नीचा दिखाने के लिए और भी निचले स्तर पर जा रहे हैं इस बार सबसे चर्चित जवानी में चोर झूठा बाहरी देशद्रोही इन्हीं सब का बोलबाला रहा है 1 से 5 साल का हिसाब मांग रहे हैं 1 से60 साल का हिसाब मांग रहे हैं हिसाब दोनों नहीं दे रहे हैं सिर्फ एक ही अपील है कि हम से अच्छा कोई नहीं आप हमें मतदान करिए!




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