दिव्य-दूत

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बोध घाट का विरोध करने वाले बताएं कि आदिवासियों के खेत की प्यास कैसे बुझेगी , देश का सबसे अच्छा विस्थापन करेंगे हम >> मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

Anil Choubey 11-02-2021 13:34:25


                   बस्तर ////  इंद्रावती नदी पर बनने वाले सिंचाई बांध बोधघाट परियोजना को लेकर स्थानीय आदिवासियों की आड़ में आंदोलन का झंडा गाड़ने वाले लोगों को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि विरोध करने वालों को यह बताना चाहिए कि आदिवासियों के खेत मैं और उनको पीने के पानी के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था है  मुझे अच्छी तरह से मालूम है कि जो लोग विरोध कर रहे हैं वह भरे पेट है ,उन्होंने पहले ही अपने खेतों में पानी की व्यवस्था कर रखी है वह नहीं चाहते कि यहां के आदिवासियों को भी  हरी-भरी खेती  का सुख मिले बोधघाट परियोजना आदिवासियों के जीवन में कृषि क्रांति लेकर आएगी जब इंद्रावती का पानी उनके खेतों तक पहुंचेगा और उनके खेत मे  हरी-भरी फसलें  लहलयेंगी  उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी आजादी के बाद से इंद्रावती के पानी को तरस रहा बस्तर अब प्यासा नहीं रहेगा \

                       इंद्रावती नदी को लेकर स्थानीय नेता हमेशा विवाद खड़ा करते रहे हैं पहले भी पर्यावरण को लेकर इस बहुप्रतीक्षित परियोजना में ग्रहण लग गया था कांग्रेस की सरकार ने बस्तर की जल स्थिति सुधारने के लिए सिर्फ इस परियोजना से सिंचाई के लिए ही पानी का उपयोग होगा का फैसला लिया है प्रथम चरण में इसका सर्वे पूरा हो गया है  द्वितीय चरण में  सिंचाई विभाग के माकूल अधिकारियों की नियुक्ति कर काम शुरू किया जाना है इसको लेकर केंद्र सरकार से भी मंजूरी मिल चुकी है पुरानी परियोजना होने के कारण इसके डूब में आने वाले तमाम गांव का सर्वे कई बार हो चुका है इस बार भी काम शुरू है ताजा जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा है कि पहले से बहुत कम लोगों को विस्थापित किया जाएगा और विस्थापन को लेकर छत्तीसगढ़ एक आदर्श विस्थापन प्रक्रिया को भी  अंजाम देगा

                         हमारी सरकार विस्थापन के लिए ऐसी जगह को चिन्हित करेगा जिससे विस्थापित आदिवासियों को उनकी जमीन के अलावा उनके मकान और तमाम सुविधाएं स्वास्थ्य शिक्षा  बिजली पेयजल की उपलब्ध रहेगी 

 

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