रायपुर// उच्च न्यायालय के फैसले के बाद सुरेश गोयल ग्रुप ने
एमएमआई
ट्रस्ट को पुनः अपने अधिपत्य में ले लिया है, अधिपत्य में लेते हैं सचिव रामअवतार अग्रवाल ने जब
अकाउंट से संबंधित जानकारियां हासिल करना शुरू की तो महेंद्र धारीवाल और ट्रेसर गुप्ता के द्वारा कैश और बोगस बिलों को देखकर हेरानी हुई और रामअवतार अग्रवाल ने एक
सिलसिलेवार रिपोर्ट तैयार कर तमाम एम एम आई
के सदस्यों और पदाधिकारियों को सूचित किया सदस्यों की सहमती से सचिव ने नगद
और बोगस बिलों की हेरा फेरी पर
एक नोटिस जारी करते हुए लूणकरण श्री
श्री माल,
महेंद्र धारीवाल और प्रदीप गुप्ता से स्पष्टीकरण मांगा गया है इस पर जब प्रदीप गुप्ता से संवाददाता ने फोन पर बात की तो उन्होंने कहा कि
मामला
न्यायालय में है इसलिए हम इस पर कोई बात नहीं कहेंगे माफ करो - माफ करो कमोवेश महेंद्र धारीवाल ने भी इसी तरह न्यायालय का हवाला देते हुए कुछ भी कहने से
मना कर दिया है , जब
रामअवतार अग्रवाल से पूछा गया कि न्यायालय का वास्ता देते हुए प्रदीप गुप्ता और
महेंद्र धारीवाल ने किसी तरीके की प्रतिक्रिया नहीं दी तो उनका कहना था कि
न्यायालय की आड़ में ट्रस्ट के गमन करने की छूट कैसे मिल सकती है, जबकि मामला तो हरक जैन और एम एम आई के बीच न्यायालय में चल रहा है उन्होंने ट्रस्ट की गरिमा को ठेस पहुंचाई है और ट्रस्ट के
खाते में से रकम का गबन किया है इसकी आफ आईआर भी की जाएगी
एमएमआई
हॉस्पिटल ट्रस्ट के सदस्यों के बीच एक बार फिर विवाद छिड़ गया है। बताया गया कि
ट्रस्ट के सचिव राम अवतार अग्रवाल ने पूर्व पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर
हॉस्पिटल ट्रस्ट में करोड़ों की अनियमितता पर जवाब मांगा है। संतोषजनक जवाब नहीं
मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
राम अवतार अग्रवाल ने श्रीश्रीमाल और
अन्य को 29 जुलाई 2020 से 5 जनवरी 2021 के बीच हॉस्पिटल ट्रस्ट में अनियमितता
पर जवाब मांगा है। यह भी कहा गया कि समिति के कर्मचारी दबाव में काम नहीं कर रहे जिससे नियमित कामकाज और जांच में अवरोध
हो रहा है। एकाउंटेंट द्वारा बड़ी मुश्किल से एकाउंटेंट डिपार्टमेंट के
कम्प्यूटर का पासवर्ड संस्था के अध्यक्ष सुरेश गोयल को बताया गया। जांच में यह भी
पता चला है कि कैश अकाउंट बुक में बैक डेट में इंट्री कर खर्च बढ़ाए गए।
ताकि समिति की नगद राशि बैलेंस कम करके गबन कर सके, और इसका दोष हमारे ऊपर मढ़ सके।
नोटिस में यह भी कहा गया कि समिति के
फंड का अत्याधिक दुरूपयोग किया गया है, और नियमों को ताक पर रखकर अनाप-शनाप
राशि बाटी गई हैं। वकीलों पर लाखों रूपए खर्च किए गए हैं, लेकिन ये वकील हाईकोर्ट में डॉ. हरख जैन
के पक्ष में, और एमएमआई समिति के विरूद्ध पैरवी की है। इसलिए उन्हें एमएमआई द्वारा
भारी भरकम फीस दिया जाना अत्यंत आपत्तिजनक,औरयहगबनकीश्रेणीमेंआताहै।
यह भी पता चला है कि समिति के सदस्य
लूनकरण पारख को 1 लाख 20 हजार, 50-50 हजार के दो चेक जारी किए गए हैं। जिसका कोई विवरण उपलब्ध नहीं है।
नर्सिंग कॉलेज के छात्र-छात्राओं द्वारा कल्चर फंड की बचत राशि प्राचार्य के
माध्यम से आप लोगों द्वारा जमा किया गया। वह राशि खाते में नहीं है। आपके कार्यकाल
में एकाउंट और क्रय विक्रय संबंधित सभी दस्तावेजों की जांच के लिए सीए से विशेष
ऑडिट करने के लिए नियुक्त किया जा




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