रायपुर: रमन सरकार में शराब को लेकर जो भ्रष्टाचार हुआ है वह अपने आप में कीर्तिमान है भ्रष्टाचार की कहानी समुद्र सिंह के आसपास ही घूमती है समुद्र सिंह वह शख्स जिसके बारे में कहा जाता है कि जब वह अधिकारी बना तो दौरे पर जाता था अपने अधिनिष्ट अधिकारियों को यह आदेश देता था कि मुझे रात में नए चादर, नई टावेल, नया ब्रस, नया साबुन चाहिए वह अपने घर से कभी भी इन चीजों को साथ लेकर नहीं जाता था और जब दौरे से लौटता था तो उसके सूटकेस में नया ब्रास, नया टावेल, नया चादर एक नहीं दो चार होते थे इस मानसिकता के आदमी ने तत्कालीन आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल के साथ मिलकर शराब का ऐसा खेल खेला की उसमें पैसा तो उनके हाथ लगे लेकिन सरकार डूब गई. समुद्र सिंह रिटायर होने से पहले मंत्री जी के इर्द गिर्द अपनी पैठ बनाने के लिए शराब ठेकेदारों से पैसा इकट्ठा कर ईमानदारी से पहुंचाने का काम करता था इससे अच्छा सेवक मंत्री जी को कहां मिलेगा मंत्री जी ने उसे संविदा नियुक्ति पर अपना ओएसडी बना लिया ओएसडी के बनते ही समुद्र सिंह ने अपना दिमाग लगाना शुरू किया क्योंकि विभाग के छोटे से पद से आगे बढ़ा था सो उसे विभाग के सारे कल पुर्जों का ज्ञान था उसने अघोषित रूप से नीतियां बनाना शुरू की|
सबसे पहले उसने शराब ठेकेदारों को ठेके की कीमत का 30% अधिक का कमीशन देने के लिए बाध्य किया खेल यहां से शुरू हुआ व्यापारी ठेकेदार पहले वर्ष तो मान गए दूसरे वर्ष कमीशन की रकम 40% के साथ शराब बेचने का टारगेट भी फिक्स किया गया ठेकेदार इस पॉलिसी को भी धीरे धीरे अपना रहे थे कि तीसरे साल उसने कमीशन का 50% और शराब बेचने का टारगेट दो सौ प्रतिशत रख दिया ठेकेदारों की हालत खराब हो गई अधिकांश दुकानें खुली निविदा में उठी ही नहीं जिनको सरकार ने वित्तीय वर्ष के चलते चलाना शुरु किया यह चल ही रहा था की सरकार ने एक ऐसा निर्णय लिया की जो सरकार के लिए गले की हड्डी बन गया इस पूरी स्कीम को बनाने में समुद्र सिंह की अहम भूमिका रही समुद्र सिंह ने सरकार से यह घोषणा कर वाली कि वर्ष 2015 /// 16 में सरकार शराब बेचेगी बहुत ही चतुर तरीके से उसने यह मीडिया के द्वारा फैलाया कि ठेकेदार कोचिओं से मिलकर शराब का धंधा कर रहे हैं जिससे जनमानस में शराब आम हो गई है और उसको नियंत्रण करने के लिए अब कोई ठेकेदार शराब नहीं बेचेगा सरकार शराब बेचेगी.
सरकार ने शराब बेचना शुरू किया सारी दुकाने 1 अप्रैल से सरकारी हो गई अब शराब कैसे बेची जाएगी इसके लिए एक कारपोरेशन का गठन किया गया उसमें तमाम तरह के वह निर्णय लिए जिनसे समुद्र सिंह का प्रभाव पूरे छत्तीसगढ़ की शराब नीति पर पड़ गया खेल यहीं खत्म नहीं हुआ शराब खरीदने के लिए एक अलग निगम और शराब बेचने के लिए एक अलग निगम बनाया गया दोनों की चाबी समुद्र सिंह के पास थी शराब बेचने वाले निगम में संविदा भर्ती की गई और दुकानों में शराब बेचने ठेके से मेन पावर लिया गया शराब दुकानों से पैसा एकत्र करने अलग से ठेका दिया गया इस तरह से आबकारी विभाग को पूरी तरह से इस गोरखधंधे से अलग कर कर दिया गया सरकार की शराब मनमाने ढंग से बिकने लगी छत्तीसगढ़ की पूरी शराब पर समुद्र सिंग का कब्ज़ा हो गया.
शराब मैन्युफैक्चरओं को कहा गया कि आप हमें 30% से 50% तक का कमीशन दोगे तो हम आप की शराब इन सरकारी दुकानों से बेचने की अनुमति देंगे मैन्युफैक्चर मरता क्या ना करता 1 साल तक 20% से 50% तक कमीशन देता रहा साल बीत गया और वह रुपए समुद्र सिंह और मंत्री जी के खाते में जमा होते रहे वर्ष 2016//17 शुरू हुआ अब तो मामला पूरे छत्तीसगढ़ में जम चुका था कोई आवाज उठाने वाला नहीं था आबकारी विभाग के अधिकारियों को शराब बेचने से दूर कर दिया गया था अब शराब निगम के संविदा कर्मी और ठेके पर लिए गए कर्मी बेच रहे थे पैसा इकट्ठा कर रहे थे सरकारी बैंक में जमा कर रहे थे और बाकी का पैसा समुद्र सिंह और मंत्री जी के पास जमा हो रहा था बड़ा ही सुचारू रूप से यह व्यापार चल रहा था समुद्र सिंह इससे भी आगे गया उसने मंत्री जी को समझाया की पूरे देश भर की कई डिस्टलरी किराए पर ली जाए और उनकी ही शराब हमारी दुकानों से बेची जाए!




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