अनिल चौबे
नई दिल्ली /// आज भारत के महान लोकतंत्र के शानदार 72 वर्ष पूरे हो गए करोना महामारी में गुजरा 2020 मैं पूरा वतन लॉक डाउन की चपेट में था हमारा देश भी करीब करीब साल भर तक सामान्य गतिविधियों से दूर रहा सिर्फ विशेष गतिविधियां ही संचालित हुई पूरा विश्व आर्थिक मंदी की चपेट में आ गया था चीन से फेले इस करोना वायरस में पूरे विश्व में ठीक 100 साल बाद करोड़ों लोगों को अकाल मौत के घाट उतार दिया है इस त्रासदी से गुजरते वक्त देश ने बहुत ही धैर्य से काम लिया और आज 72 में गणतंत्रता दिवस पर मास्क लगाकर तमाम वीवीआइपीओ ने एक दूसरे को बधाइयां और शुभकामनाएं दी
आज में उन पुरानी तस्वीरों को भी कुरूद रहा था जब 1950 में पहली बार गणतंत्र दिवस परेड के ब्लैक एंड वाइट फोटो और आज के भव्य रंगीन फोटो में बहुत अंतर
है फोटो दिखाते हैं कि आज हमारा भारत कितना आत्मनिर्भर होकर पूरे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का गणतंत्रता
दिवस मना रहा है आत्मभारत भारत की भव्य तस्वीर राजपथ पर आज दिखी जिसे पूरे विश्व में और भारत के अधिकतर
लोगों ने टेलीविजन पर ही देखा है कोविड-19 गाइडलाइन के चलते बहुत ही कम लोगों को
इस बार आमंत्रित किया गया था फिर भी महत्वपूर्ण दिवस के पर्व को टेलीविजन में
अच्छी तरीके से प्रसारित किया
इस बार एक और महत्वपूर्ण घटना गति की जब
किसानों ने अपने आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए विशाल ट्रैक्टर रैली का ऐलान कर दिया जय
जवान जय किसान के नारे को लेकर किसानों ने पहली बार गणतंत्रता दिवस पर विशाल रैली
का आयोजन कर लिया तमाम कोशिशों के बावजूद किसानों की मांगों पर अड़े हुए हैं और
रैली निकल रही है
इतिहास
की पुरानी तस्वीरों ताजा करिए रोचक जानकारी
है
गणतन्त्र दिवस (गणतंत्र दिवस) भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन सन् 1950 को भारत सरकार अधिनियम
(एक्ट) (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था। एक स्वतन्त्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया
गया और 26 जनवरी 1950 को इसे एक लोकतान्त्रिक सरकार प्रणाली
के साथ लागू किया गया था। 26 जनवरी को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय
कांग्रेस (आई० एन० सी०) ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था। यह भारत के तीन राष्ट्रीय अवकाशों में से एक है, अन्य दो स्वतन्त्रता दिवस और गांधी जयंती हैं।
सन् 1929 के दिसंबर में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ जिसमें प्रस्ताव
पारित कर इस बात की घोषणा की गई कि यदि अंग्रेज सरकार 26 जनवरी 1930 तक भारत को स्वायत्तयोपनिवेश (डोमीनियन) का पद नहीं प्रदान करेगी, जिसके तहत भारत ब्रिटिश साम्राज्य में
ही स्वशासित एकाई बन जाने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की
और अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ किया। उस दिन से 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया
जाता रहा। इसके पश्चात स्वतंत्रता प्राप्ति के वास्तविक दिन 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्वीकार किया गया। भारत के
स्वतंत्र हो जाने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य 9 दिसम्बर 1947 से आरंभ कर दिया। संविधान सभा के
सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के
द्वारा चुने गए थे। डॉ० भीमराव अम्बेडकर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे।
संविधान निर्माण में कुल 22 समितीयाँ थी जिसमें प्रारूप समिति
(ड्राफ्टींग कमेटी) सबसे प्रमुख एवं महत्त्वपूर्ण समिति थी और इस समिति का कार्य
संपूर्ण ‘संविधान लिखना’ या ‘निर्माण करना’ था। प्रारूप समिति के अध्यक्ष विधिवेत्ता डॉ० भीमराव आंबेडकर थे। प्रारूप समिति ने और उसमें विशेष
रूप से डॉ. आंबेडकर जी ने 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन में भारतीय संविधान का निर्माण किया और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 26 नवम्बर 1949 को भारत का संविधान सुपूर्द किया, इसलिए 26
नवंबर दिवस को भारत में संविधान दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता है।
संविधान सभा ने संविधान निर्माण के समय कुल 114 दिन बैठक की। इसकी बैठकों में प्रेस
और जनता को भाग लेने की स्वतन्त्रता थी। अनेक सुधारों और बदलावों के बाद सभा के 308 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान की दो हस्तलिखित कॉपियों
पर हस्ताक्षर किये। इसके दो दिन बाद संविधान 26
जनवरी को यह देश भर में लागू हो गया। 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए इसी
दिन संविधान निर्मात्री सभा (कांस्टीट्यूएंट असेंबली) द्वारा
स्वीकृत संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की गई। जैसा
कि आप सभी जानते है कि 15 Aug 1947 को अपना देश हजारों देशभक्तों के
बलिदान के बाद अंग्रेजों की दासता (अंग्रेजों के शासन) से मुक्त हुआ था। इसके बाद 26 जनवरी 1950 को अपने देश में भारतीय साशन और कानून
व्यवस्था लागू हुई। भाईयो और बहनों ने इस स्वतन्त्रता को पाने में अपने देश की
हजारों-हजारों माताओं की गोद सूनी हो गई थी, हजारों बहनों बेटियों के माँग का
सिंदूर मिट गया था, तब कहीं इस महान बलिदान के बाद देश स्वतंत्र हो सका था। जिस तरह
देश का संविधान है, ठीक उसी तरह परमात्मा का भी संविधान है, यदि हम सब देश की संविधान की तरफ
परमात्मा के संविधान का पालन करें तो समाज अपराध मुक्त व सशक्त बन सकता है।




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