मुख्यमंत्री ने गणतंत्र दिवस पर जगदलपुर में ध्वजारोहण के बाद प्रदेशवासियों को किया संबोधित
विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हमारे अपने भारत के 72 वें गणतंत्रता दिवस पर की दिव्या दूत परिवार की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं
‘छत्तीसगढ़ माॅडल’ की पूरे देश में चर्चा राम वनगमन पर्यटन परिपथ से होगा स्थानीय विकास और आजीविका के नए साधनों का निर्माण प्रदेश की 97 प्रतिशत आबादी को पोषण सुरक्षा: 99 हजार बच्चे हुए कुपोषण मुक्त दो वर्षों में औसतन 2 हजार बसाहटों में प्रतिवर्ष पहुंचाई बिजली सर्वाधिक धान खरीदी का बना कीर्तिमान दूरसंचार टॉवर व हवाई सेवाओं से बस्तर में एक नया युग की शुरूआत नगरनार इस्पात संयंत्र खरीदने छत्तीसगढ़ सरकार तैयार झीरम गांव में आजादी के 73 साल बाद पहुंची बिजली
जगदलपुर
//// 26 जनवरी 2021/मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गणतंत्र दिवस
के अवसर पर बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर के लालबाग मैदान में ध्वजारोहण के बाद
प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश की एकता, अखण्डता के साथ प्रदेश में संविधान प्रदत्त
नागरिक अधिकारों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। समाज के किसी भी वर्ग पर यदि
कहीं से कोई भी संकट आता है तो हमारी सरकार उनके साथ चट्टान की तरह खड़ी मिलेगी।
किसानों, ग्रामीणों तथा आम जनता का सबसे बड़ा संरक्षक
हमारा संविधान है, लेकिन
अगर कोई नया कानून इस व्यवस्था में आड़े आता है तो ऐसी चुनौती से निपटना राज्य सरकार
की जिम्मेदारी है, जिसे
हमने छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी (संशोधन) विधेयक के माध्यम से निभाया। मैं आज फिर एक
बार कहना चाहता हूं कि संविधान ने जो संरक्षण आपको दिया है, उसके रास्ते में आने वाली बाधाओं के निदान के
लिए हम हमेशा तत्पर रहेंगे, चाहे इसके लिए किसी भी स्तर पर संघर्ष करना पड़े।
मुख्यमंत्री
ने अमर शहीदों, संविधान
निर्माताओं और देश के नेताओं को याद किया
मुख्यमंत्री ने महान राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र
दिवस के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों का हार्दिक अभिनंदन करते हुए कहा कि सबसे पहले
मैं परलकोट विद्रोह के नायक अमर शहीद गैंदसिंह और उनके साथियों को नमन करता हूं, जिन्होंने सन् 1857 की पहली व्यापक क्रांति के पहले ही छत्तीसगढ़
में आजादी की अलख जगाई थी। उसकी ज्वाला को वीर गुण्डाधूर और शहीद वीरनारायण सिंह
जैसे क्रांतिकारियों ने आगे बढ़ाया और फिर पूरा छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़
गया। आजादी की लड़ाई को जुनून में बदलने वाले अनेक अमर शहीदों के साथ इसे निर्णायक
मुकाम पर पहुंचाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, उस दौर के सभी नायकों और भारतमाता के गुमनाम
सिपाहियों को मैं सादर नमन करता हूं। आजाद देश को अपना भाग्य विधाता बनाने का अवसर
हमारे महान संविधान ने दिया, जिसे बनाने वाली संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और
प्रारूप समिति के सभापति बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे। उनके साथ ही देश के
विभिन्न क्षेत्रों के विचारकों और कानूनविदों ने संविधान सभा तथा विभिन्न समितियों
के सदस्य के रूप में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी, इनमें हमारे छत्तीसगढ़ के कानूनविद भी शामिल थे, आज मैं उन सबको नमन करता हूं। हमारे संविधान की
सबसे बड़ी बात यह है कि इसे हम भारत के लोगों ने स्वयं बनाया और स्वयं को
आत्मार्पित किया है।
सद्भाव
और समरसता के रास्ते पर अडिग रहा है छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यह
अवसर है कि हम अपने संविधान निर्माताओं की चिंता को साझा करें, आपस में विचार-विमर्श करें। संविधान के आधार पर
देश चले, संविधान निर्माताओं की भावनाओं का सम्मान हो और
हमारे संसदीय लोकतंत्र की गौरवशाली परंपराओं का मान कायम रहे, इस दिशा में मजबूती से चलने का संकल्प लेना भी
इस वक्त की एक बड़ी जरूरत है। मुझे यह कहते हुए बहुत खुशी हो रही है कि हमारा
छत्तीसगढ़ हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं की आशाओं के
अनुरूप सद्भाव और समरसता के रास्ते पर अडिग रहा, जिसके लिए आप सब बधाई के पात्र हैं। भाइयों और
बहनों, हमारी सबसे पहली प्राथमिकता, अनुसूचित जनजाति व अनुसूचित जाति बहुल अंचल तथा
ग्रामीण जनता है, जिन्हें
विकसित स्थानों एवं लोगों की बराबरी में लाने के लिए विशेष जतन की जरूरत है।
राज्य
सरकार ने बीपीएल परिवारों के हक और हित में उठाए बड़े कदम
श्री बघेल ने कहा कि हमारी सरकार ने बीते दो
वर्षों में विशेषकर इन तबकों के हक और हित में बड़े कदम उठाए हैं। गरीबी रेखा के
नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों की बहुतायत को देखते हुए तथा उन्हें राष्ट्रीय
औसत के बराबर लाने की चुनौती स्वीकार करते हुए हमने पूना माड़ाकाल दंतेवाड़ा
कार्यक्रम शुरू किया, जो ऐसे अन्य जिलों में भी तेज विकास के लिए नवाचार का आधार बनेगा। इस
अभियान से दंतेवाड़ा जिले में 10 माह में कुपोषण की दर 26 प्रतिशत कम हुई। 500 एकड़ भूमि लघु उद्योगों के लिए चिन्हांकित की गई। रोजगार के नए अवसर
बने। स्थानीय लोगों को जोड़कर 4 कारखाने शुरू किए गए हैं, जो रेडीमेड परिधानों के नए ब्रांड डैनेक्स
(दंतेवाड़ा नेक्स्ट) को राष्ट्रीय स्तर पर बाजार में उतारेंगे। लोहंडीगुड़ा में
आदिवासियों की जमीन वापसी और जगरगुंडा में 13 साल बाद स्कूलों में रौनक वापसी हुई। नजीर और
प्रेरणा स्रोत बना।
दूरसंचार
टॉवर व हवाई सेवाओं से बस्तर में एक नए युग की शुरूआत झीरम गांव में आजादी के 73 साल बाद पहुंची बिजली
मुख्यमंत्री ने कहा कि आकांक्षी जिलों की
देशव्यापी डेल्टा रैंकिंग में बीजापुर देश में अव्वल आया। आकांक्षी जिलों के अन्य
मापदण्डों में कोण्डागांव, नारायणपुर और सुकमा जिले ने भी अपना झण्डा गाड़ा। झीरम गांव में आजादी
के 73 साल बाद बिजली पहुंचने की जितनी खुशी
बस्तरवासियों को है, उससे अधिक खुशी हमें है। बस्तर में 400 के.व्ही. से लेकर 132 के.व्ही. का ऐसा अति उच्च दाब नेटवर्क बनाया
गया, जिससे बस्तर में दोहरी-तिहरी बिजली आपूर्ति की
व्यवस्था हो। इसी प्रकार सौर ऊर्जा से घरों, अस्पतालों, शालाओं, आश्रमों को रोशन करने के कीर्तिमान बने, ताकि बिजली की शक्ति भी आदिवासी समाज की शक्ति
बने। बस्तर को दूरसंचार टॉवर व हवाई सेवाओं से जोड़कर सुगम सम्पर्क का एक नया युग
भी शुरू किया गया।
वन
अधिकार पट्टाधारियों से भी समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का निर्णय
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन अधिकार दावों के
निरस्त हो जाने से अनुसूचित जनजाति तथा परंपरागत वन निवासियों में बेहद निराशा थी, हमने निरस्त दावों की पुनः समीक्षा से बड़े
पैमाने पर काबिज जमीन का विधिवत अधिकार देकर बड़े पैमाने पर आशा का संचार किया।
सामुदायिक वन अधिकार पत्र तथा सामुदायिक वन संसाधन पत्र देने के नए उपायों को बड़ी
सफलता मिली। अब हमने वन अधिकार पट्टाधारियों से भी समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का
निर्णय लिया है। मुझे विश्वास है कि आदिवासी समाज के सम्मान व स्वावलम्बन में इस
पहल का दूरगामी असर होगा। मैं चाहूंगा कि पट्टाधारी किसान इस पहल का भरपूर लाभ
उठाएं।
राम
वनगमन पर्यटन परिपथ से होगा स्थानीय विकास और आजीविका के नए साधनों का निर्माण
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम के वनवास से
जुड़े प्रसंग लोक आस्था का विषय हैं। छत्तीसगढ़ के लोक मानस में वनवासी राम की
स्मृतियां बसी हैं लेकिन बीते दौर में संबंधित प्रसंगों तथा चर्चित स्थलों के
विकास के लिए समुचित उपाय नहीं किए जाने से इन स्थलों की चमक धूमिल पड़ गई थी।
हमारी सरकार ने जो राम वनगमन पर्यटन परिपथ विकसित करने का बीड़ा उठाया है, उससे स्थानीय विकास तथा आजीविका के नए साधनों
का निर्माण भी होगा।
जल
संसाधनों के विकास में बोधघाट परियोजना का होगा अहम योगदान
मुख्यमंत्री
ने कहा कि हमारी सरकार ने आगामी 5 वर्षों में जल संसाधनों के विकास की जो रणनीति बनाई है, उसमें बोधघाट परियोजना का अहम योगदान होगा। यह
परियोजना न सिर्फ बस्तर की जीवन-रेखा इंद्रावती को नवजीवन देगी, बल्कि मुआवजा तथा पुनर्वास पैकेज के निर्धारण
के नए कीर्तिमान भी रचेगी। इसमें प्रभावित क्षेत्र के निवासियों की सहमति तथा
भागीदारी की निर्णायक भूमिका होगी।
विकास
प्राधिकरणों से बढ़ा स्थानीय नेतृत्व को सम्मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी अंचलों में
स्थानीय नेतृत्व को सम्मान और अधिकार देने के लिए हमने बस्तर, सरगुजा तथा मध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरणों में
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की नियुक्ति भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों से की है और उन्हें
क्षेत्रीय विकास के निर्णय लेने हेतु व्यापक अधिकार दिए हैं। सरकार की सेवाएं जनता
के निकट ले जाने के लिए हमने गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिला तथा 24 नई तहसीलों का गठन भी किया। इस प्रकार
क्षेत्रीय असंतुलन समाप्त करने तथा प्रदेश के सर्वांगीण विकास में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग के साथ ही ऐसे क्षेत्रों को तवज्जो
दी गई है, जो अब तक उपेक्षा के शिकार थे।
कमजोर
तबकों को न्याय दिलाने करेंगे हर चुनौती का सामना: सर्वाधिक धान खरीदी का बना
कीर्तिमान
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों, ग्रामीणों, भूमिहीनों के साथ आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को
न्याय दिलाने का वादा पूरा करने के लिए हम हर चुनौती का सामना करने को तैयार हैं।
हमारे किसान भाइयों, बहनों और उनके परिवारजनों के लिए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी बहुत बड़ा
आसरा है। यह काम बड़ी सोच और व्यवस्थित ढंग से करने पर इसका लाभ कितने अधिक
परिवारों तक पहुंचाया जा सकता है, इसकी मिसाल दो वर्षों में पंजीकृत और धान विक्रेता किसानों की लगातार
बढ़ी संख्या है। हमारे जिम्मेदारी संभालने के पहले लगभग 15 लाख किसानों का पंजीयन ही हुआ था, वित्तीय वर्ष में शतप्रतिशत भुगतान भी कर दिया
जाएगा। यह योजना फसल विविधीकरण व किसानों के आर्थिक सशक्तीकरण का लक्ष्य भी
साधेगी।
सुराजी
गांव योजना से गांवों में नवाचार और रोजगार के खुले नये द्वार
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोधन न्याय योजना के
माध्यम से 5 माह में लगभग 72 करोड़ रुपए का भुगतान सरकारी दर पर गोबर
विक्रेताओं को किया गया है। इस योजना से बड़ी संख्या में भूमिहीनों, महिलाओं तथा कमजोर तबकों को लाभ मिला है।
सुराजी ग्राम योजना के तहत नरवा, गरवा, घुरवा, बारी के विकास से गांवों में नवाचार और रोजगार
के नए द्वार खुले हैं। इससे न सिर्फ भूमि की उत्पादकता बढ़ रही है, जल संसाधनों का विकास हो रहा है, फल-सब्जी के उत्पादन से गांवों में कुपोषण से
लड़ने के साधन जुट रहे हैं, बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन हो रहा है बल्कि वर्मी कम्पोस्ट और
गोबर से विभिन्न कलात्मक वस्तुओं का उत्पादन होने लगा है, जो आगे चलकर जैविक उत्पादों के बड़े बाजार में
छत्तीसगढ़ की बड़ी हिस्सेदारी सुनिश्चित करेगा। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि
हमारी योजनाओं से महिलाएं और युवा साथी बड़ी संख्या में जुड़े हैं। शिक्षा से लेकर
संस्कार तक,
कौशल
से लेकर रोजगार तक, प्रतिभाओं
की परख से लेकर विस्तार तक, नए विश्वास का वातावरण बना है। दो वर्षों में औसतन 2 हजार बसाहटों में प्रतिवर्ष पहुंचाई बिजली
मुख्यमंत्री ने कहा कि नवा छत्तीसगढ़ गढ़ने की
जिम्मेदारी संभालने के लिए हमारी नई पीढ़ी नए जोश और नई तैयारी के साथ आगे आ रही
है। हमने नई सोच के साथ अधोसंरचना के विकास को गति दी ताकि जल्दी से जल्दी उसका
लाभ वास्तविक आवश्यकताओं के क्षेत्र में मिले। उदाहरण के लिए विगत 18 वर्षों में प्रतिवर्ष औसतन 1 हजार 300 मजरों-टोलों में बिजली पहुंचाई जाती रही, जबकि हमने दो वर्षों में औसतन 2 हजार बसाहटों में प्रतिवर्ष ग्रिड से बिजली
पहुंचाई। इसके अलावा जहां यह साधन नहीं है वहां सौर ऊर्जा से घरों को रोशन किया
गया। इसी प्रकार दो वर्षों में 63 हजार सिंचाई पम्पों का ऊर्जीकरण, उपकेन्द्र, लाइन विस्तार आदि कार्य भी अपेक्षाकृत तेज गति
से किए गए। कुशल प्रबंधन के कारण इस वर्ष हमारे ताप बिजली घरों का पी.एल.एफ. भी
देश में सर्वोच्च स्तर 70 प्रतिशत को पार कर गया। इस प्रकार एक ओर विद्युत विकास की बड़ी
उपलब्धियां राज्य के खाते में आई हैं तो उसका लाभ भी आम जनता को दिया गया है। ‘हाफ बिजली बिल योजना’ से अब तक 38 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को 1 हजार 336 करोड़ रूपए की राहत दी गई है।
स्वास्थ्य
सुविधाओं को घर तक पहुंचाने की रणनीति
बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हमने स्वास्थ्य सुविधाओं
के विकास को भी ऐसे अधोसंरचना विकास के रूप में देखा जिसमें पहुंच की भूमिका
ज्यादा हो। इस तरह हमने विद्यमान स्वास्थ्य केन्द्रों में ज्यादा अवधि तक कार्य
करने, ज्यादा सुविधाएं जुटाने और ज्यादा मरीजों के
लिए आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने की रणनीति अपनाई। हमारी इसी तैयारी की वजह से
कोरोना संकट के दौरान लोगों को राहत देने और उपचार की व्यवस्था संभव हुई। कोरोना
की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अस्पतालों का उन्नयन और सेवाओं का विस्तार
तत्परता से करना संभव हुआ। राज्य की सामाजिक, आर्थिक परिस्थितियों में मरीजों का सही समय
डाॅ.
खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना तथा मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य योजना से मरीजों को
मिला नया जीवन
मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक धन
तथा मरीजों को बीमा योजनाओं के जंजाल से निकालते हुए हमने डाॅ. खूबचंद बघेल
स्वास्थ्य योजना तथा मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य योजना शुरू की, इस तरह सामान्य बीमारियों से लेकर दुर्लभ
बीमारियों तक के निःशुल्क इलाज की व्यवस्था की गई और बहुत से मरीजों को 20 लाख रूपए तक निःशुल्क इलाज की सुविधा से नया
जीवन मिला। हमारी इस पहल की सराहना भी राष्ट्रीय स्तर पर हुई है। मलेरिया मुक्त
बस्तर अभियान की रणनीतिक सफलता का परिणाम एक वर्ष में 65 प्रतिशत मलेरिया नियंत्रण है। अब इसी प्रकार
सघन अभियान से सरगुजा तथा समूचे छत्तीसगढ़ को भी मलेरिया मुक्त बनाया जाएगा।
प्रदेश
की 97 प्रतिशत आबादी को पोषण सुरक्षा: 99 हजार बच्चे हुए कुपोषण मुक्त
मुख्यमंत्री ने कहा कि सेहत के साथ सुपोषण का
गहरा नाता होता है। हमने सार्वभौम पीडीएस योजना लागू करके प्रदेश की 97 प्रतिशत आबादी को पोषण सुरक्षा दी है।
मुख्यमंत्री सुपोषण योजना से एक वर्ष में 99 हजार बच्चों का कुपोषण मुक्त तथा 20 हजार महिलाओं का एनीमिया मुक्त होना एक बड़ी
उपलब्धि है। सामुदायिक भागीदारी और डीएमएफ जैसी निधियों के उपयोग की इसमें बड़ी
भूमिका रही है। हमने डीएमएफ के उपयोग के लिए जो नई गाइड लाइन जारी की थी, उससे शिक्षा, पोषण, रोजगार तथा पुनर्वास में जो मदद मिली है, वह भी हमारी सोच और सही दिशा का प्रतीक है।
‘छत्तीसगढ़ माॅडल’ की पूरे देश में चर्चा
किसानों-कर्मवीरों-वन
आश्रितों-स्थानीय कलाओं के लिए खोला सरकारी खजाना
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के बाहर ‘छत्तीसगढ़ माॅडल’ की खूब चर्चा होती है। जगजाहिर है कि हमें
विराट जनादेश तो मिला लेकिन हमारी सरकार को विरासत में खाली-खजाना मिला था। लोगों
को न्याय का इंतजार था, इसलिए तात्कालिक राहत के साथ दूरगामी विकास के कदम भी उठाने थे। हमने
इस स्थिति का मुकाबला गांधी-नेहरू-शास्त्री-पटेल-आजाद-डाॅ. अम्बेडकर जैसे मनीषियों
की वैचारिक विरासत से किया। सादगी, सरलता, जन विश्वास और राज्य के संसाधनों के सम्मान और वेल्यू एडीशन को
मूलमंत्र बनाया। किसानों-कर्मवीरों-वन आश्रितों-स्थानीय कलाओं के लिए सरकारी खजाना
खोल दिया। कोरोना वैक्सीन की खोज करने वाले वैज्ञानिकों को किया नमन:
प्रदेशवासियों से टीकाकरण अभियान सफल
बनाने मांगा सहयोगमुख्यमंत्री ने कहा कि आप सबने कोरोना संकट के दौर में न केवल खुद को
संभाला, अपने संपर्क में आने वाले लोगों को संभाला
बल्कि प्रदेश को भी संभाल लिया।
नये
उद्योगों में 43
हजार करोड़ रूपए का निवेश: 64 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी नीतिगत पहल और आप
सबके अच्छे व्यवहार ने ही राज्य में निवेश का सकारात्मक वातावरण बनाया है, जिसके कारण विगत दो वर्षों में नए उद्योगों की
स्थापना के लिए 43
हजार करोड़ रूपए के निवेश तथा इनमें ही 64 हजार लोगों को रोजगार देने की स्थिति बनी है।
हमारा प्रदेश, देश
में निवेशकों के सबसे पसंदीदा राज्य के रूप में उभरा है। हमने अनेक नवाचारी
क्षेत्रों में निवेश के लिए आकर्षक प्रावधान किए हैं। सरोधा-दादर, सतरेंगा, राम वनगमन परिपथ, सिरपुर बौद्ध पर्यटन परिपथ आदि हमारी सोच को
आकार देने के प्रयास के रूप में सामने हैं, जिससे छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान भी मिलेगी।
विश्वास, सुरक्षा और विकास की रणनीति से नक्सली वारदातों
में कमी
प्रदेशवासियों के मन में सुरक्षा का विश्वास
दिलाने में सुरक्षा बलों की महत्वपूर्ण भूमिका का सम्मान करते हुए उनके लिए अनेक
कल्याणकारी कदम उठाए गए हैं। हमारी विश्वास, सुरक्षा और विकास की रणनीति का परिणाम नक्सली
वारदातों तथा अन्य आपराधिक घटनाओं में कमी के रूप में सामने आया है।
नगरनार
इस्पात संयंत्र खरीदने छत्तीसगढ़ सरकार तैयार
सार्वजनिक उपक्रमों को भारत की अर्थव्यवस्था का
मेरूदंड बनाया गया था। विडम्बना है कि मेरूदंड को कमजोर करने की कोशिशें हो रही
हैं। हमने छत्तीसगढ़ विधानसभा के मंच पर यह शासकीय संकल्प लिया है कि यदि बस्तर में
बनाए जा रहे नगरनार इस्पात संयंत्र को निजी हाथों में बेचने की कोशिश की जाती है
तो छत्तीसगढ़ सरकार इस संयंत्र को खरीदने को तैयार है। आज मैं गणतंत्र दिवस के अवसर
पर आप सब लोगों के सामने अपना यह संकल्प दोहराता हूं। इस तरह हम आपके जल-जंगल-जमीन
के साथ ही आपके संसाधनों और अवसरों की रक्षा के लिए भी संकल्पबद्ध हंै। मेरी कामना
है कि आप सब अपनी पूरी लगन और समर्पण के साथ अपने निर्धारित लक्ष्यों की ओर आगे
बढ़ते जाइए। हमारी सरकार की विभिन्न योजनाओं में पूरी भागीदारी निभाइए। आज हम सबको
मिलकर नवा छत्तीसगढ़ गढ़ना है।




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