लेखक >>>हर्क बहादुर लामगादे ‘रोहित’चाहजारे, मणिपुर, भारत
‘‘जय हिन्द’, ‘वन्दे मातरम’
‘भारत माता की जय’
लगता
है ना, हम आजाद है
खुला
आसमा, खुली हवा
चारों
ओर अपने लोग
चारों
ओर गुंज रहा,
‘वन्दे
मातरम’
मानों
राष्ट्रभक्ति कुट- कुट के भरा हो
ना
अंग्रेज ना ही विदेशी आक्रांता
बडे-बडे
तोंपे, विज्ञान और परमाणु साथ है
बडे
नेता, बडे कारखाने और बडे विद्वान
प्रशंसा
करते न थके कोई
स्वतंत्रता
दिवस, गणतंत्र दिवस
मनाते-मनाते
कई वर्ष बीत गए।
इस
खुशी के साथ,
यहाँ
आसुओं की कमी नहीं
कई
ऐसे है जिनको,
देश
का साथ देना जमी नहीं
‘भारत माता की जय’ कहने में कतराते है
मस्जिद, मंदिर जाने में अपवित्र पाते है
देश
मुर्दाबाद,
फलाना
जिन्दाबाद
कहने
में फक्र महसूस करते है
तो
कैसे हुआ धर्म निरपेक्ष लोकतंत्र?
जहाँ
अरबपतियों की गणना विश्वभर में होती हो
वहाँ
करोडों भूखे सोते हो
भूखमरी
से, लाचारी से
माँ-बाप
बच्चे खोते हो
तो
केसै हुआ समाजवाद लोकतंत्र?
बेटी
को रात में आना
हर
माता-पिता,
डर-डर
के राह देखते है
शहीद
होने की, सर कटने की
दैनिक
खबर है यहाँ
फिर
परमाणु हथियार का क्या लाभ?
‘जय किसान’ के नारे अब भी लगते है
इन्हीं
से देश का पत्येक जन पलते है
फिर
भी आए दिन किसान मरते है
नेताओं
को नई उर्जा मिलती है
किसानों
को, गरीबों को उठाने में
फिर
भी,
प्रत्येक
वर्ष जी.डी.पी. वृद्धि होने का
इन्हें
क्या लाभ?
हिन्दू-मुस्लिम
भाई-भाई
कहते
कहते अर्थ ही भूल गए
ये
तो मात्र चुनावी मुद्दे हुए
इस
प्रपंच आग में कितने जले है
फिर
भी हम कहते गए
‘अनेकता मे एकता भारत की विशेषता’
गाते
गए, सुनते गए
फिर
इस गीत का क्या लाभ?
जातिवाद, धर्मवाद, परिवारवाद ने ऐसे डसा,
संविधान
भी घायल है,
असमर्थ
है न्याय देने में
जीवन
निकल जाता है न्याय पाने में।
कमी
नही है यहाँ
हर
किसी से रिश्वत खाने में
यह
तो बस कुर्सी की वश में है
फिर
कैसे हुआ न्यायपालिका सर्वश्रेष्ठ?
कई
डाक्टर, विज्ञानिक हुए है
नासा
में है, हर जगह परचम है
वही
करोडों बच्चों ने
स्कुल
देखा नहीं हैं
देखा
तो बस,
कारखाखानों
और खेतों में मजदुरी करना
जहाँ
‘चाइल्ड लेबर’ कानुन है
‘हर बच्ची पढे’, ऐसा नारा है
फिर
भी विश्व का बडा गणतंत्र देश कैसे?
लेखक
>>>हर्क बहादुर लामगादे ‘रोहित’चाहजारे, मणिपुर, भारत




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