** पावर प्लांट बंद होने की स्थिति में
बेरोजगारी की समस्या बढ़ने के संकेत
** खदान से रेल और कन्वेयर बेल्ट से कोयला
परिवहन प्लांट तक का अव्यावहारिक
** कोयला ब्लॉक क्षेत्र की बसाहट का विस्थापन कोल मंत्रालय नहीं किया और नीलाम कर दिए ब्लॉक
BEFORE THE NATIONAL GREEN TRIBUNAL PRINCIPAL BENCH, NEW DELHI Original Application No. 104/2018 (M.A. No. 279/2018 & M.A. No. 858/2018) With Execution Application No. 05/2019 IN O.A. No.104/2018 (With report dated 14.10.2020) Shivpal Bhagat & Ors. Applicant(s) Versus Union of India & Ors. Respondent(s) Date of hearing: 27.02.2020 CORAM: HON’BLE MR. JUSTICE ADARSH KUMAR GOEL, CHAIRPERSON HON’BLE DR. NAGIN NANDA, EXPERT MEMBER HON’BLE MR. SIDDHANTA DAS, EXPERT MEMBER For Applicant(s): Mr. Saurabh Sharma, Advocate and Ms. Rinchin, Petitioner in person For Respondent(s): Mr. Rajkumar, Advocate for CPCB
नई दिल्ली /// एनजीटी के एक वर्ष पहले दिए गए अपने कठोर निर्णय से छत्तीसगढ़ के पावर प्रड्यूसर, कोल वाशरी और जनरल कोल सप्लायरयों
जैसे कमर्शियल
उद्योगों पर बंद होने के बादल घिरने लगे हैं . एनजीटी के आदेश में कहा गया है कि किसी
भी तरीके का कोयला परिवहन ट्रकों से नहीं होगा तर्कों से मिनरल के परिवहन होने पर
पर्यावरण को गंभीर खतरा उत्पन्न होता है इसे तरह से राखाड बंधो में भी ट्रक परिवहन
वर्जित है का भी आदेश दिया था इस आदेश को लेकर छत्तीसगढ़ की जनरेशन कंपनी ने एनजीटी में पुनर्विचार करने के लिए अपनी याचिका लगाई थी जिस पर एनजीटी ने एक साल का रिलैक्सेशन देते हुए कहा कि एक साल के भीतर आप अपनी कोयला खदानों तक रेलवे लाइन बिछायें और उसी से
परिवहन करें अब चिंता की बात यह है कि वह एक साल फरवरी 20 21में पूरा हो रहा है , इस साल के पूरा होने पर छत्तीसगढ़ के
तमाम पावर उत्पादकों में हड़कंप मचा हुआ है ,क्योंकि
एनजीटी के आदेश में व्यवहारिकता की भारी कमी है उस आदेश का परिपालन वर्तमान परिस्थितियों में हो ही
नहीं सकता है की चिंता को लेकर पावर जेनरेशन प्लांट की कंपनियां फिर से पुनर्विचार
याचिका लगाने का मन बना रही हैं जो इस वक्त उन
कंपनियों के लिए एकमात्र विकल्प है ,क्योंकि एनजीटी ने जो
आदेश दिया है उसके तहत कोल ब्लॉक तक रेल लाइन बिछाना असंभव है कन्वेयर बेल्ट की
लंबाई रेलवे स्टेशन तक और व्यावहारिक रूप से बहुत ही लंबी है इस तरीके की
परेशानियों से यहां की पावर जनरेशन कंपनियां हैरान परेशान है आदेश के कंप्लायंस ना होने पर सजा का भी प्रावधान है भारी पेनाल्टी भी लगाई जा सकती है |
जहां
एनजीटी ने पर्यावरण को लेकर गंभीर चिंता जताई है वही व्यावहारिक रूप से ट्रकों से
अगर कोयला पावर प्लांट तक नहीं पहुंचेगा तो छत्तीसगढ़ के अधिकांश पावर प्लांट या
तो बंद हो जाएंगे या रेल कोयला आपूर्ति के चलते अपनी क्षमता से बहुत ही कम स्तर पर अपना उत्पादन कर
पाएंगे साल भर से करोना की मार झेल रहे इन पावर प्लांट मैं एक बार फिर एनजीटी के
इस फरमान से संकट के बादल घिर गए हैं \ व्योहरिक रुप से देखने पर यह पता चल रहा
है कि जिन खदानों से कोयला खनन करके ट्रकों से ट्रांसपोर्ट कर पावर प्लांटों तक
पहुंचाया जा रहा है उन ब्लाकों की जड़ में
खदान एरिया के अन्दर 5 से 7 गांव ही आ रहे हैं केंद्र सरकार को इन क्षेत्रों के कोयला खनन नीलामी से पहले मैंडेटरी रूप से इन गांव का
विस्थापन किया जाना था जो सरकार ने नहीं किया गांव वही बसे हुए हैं , खनन और
परिवहन से सबसे ज्यादा कष्ट में वही लोग जबकि नियम में यह हैं की कोल मंत्रालय को
इन खदानों के नोटिफिकेशन से पहले तमाम तरह के क्लीयरेंस और वहां बसाहट का विस्थापन करना अनिवार्य है जो कोल
मंत्रालय ने नहीं किया है एनजीटी ने कहा है कि आप खदानों तक रेल लाइन बिछायें और
कोयला परिवहन करें जमीन पर व्यावहारिक की
स्थिति है स्थिति यह है कि
अलग-अलग सेक्टर में बसी इन खदानों में रेल लाइन इसलिए नहीं भेज सकती क्योंकि जिस
डिपाजिट के ऊपर से रेल लाइन जाएगी वह कंपनी रेल लाइन डालने में बाधा
पहुंचाएगी यह कुछ ऐसे तकनीकी पहलू हैं जिनके चलते उन सात ,आठ गांव के निवासियों ने छत्तीसगढ़ के पावर
प्लांटों को बंद होने की आशंका को प्रबल बल दे दिया है
एनजीटी
द्वारा गठित कमेटियों को इलाकों की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन करने के बाद सबसे
पहले तो कोयला मंत्रालय को सख्त निर्देश देना चाहिए कि ऑक्शन करने से पहले पूरी
तरीके से खनन के लिए कोयला ब्लॉक तैयार हो वहां जितने भी गांव हैं उन्हें
विस्थापित किया जाए के अलावा खनन से होने वाले ग्रीन बेल्ट को विधिवत विकसित किया
जाए उसी के बाद ही ऑक्शन और खनन की प्रक्रिया की जाए यह ना करते हुए एनजीटी ने उन
उद्योगों को अपना निशाना बनाया जिन्होंने विधिवत ऑक्शन में कोयला ब्लॉकों को लिया
और व्यावहारिक खनन प्रक्रिया के तहत ही ट्रांसपोर्टेशन किया ट्रांसपोर्टेशन करने
में एनजीटी ने एक और सख्त आदेश यह भी निकाला था की किसी भी तरीके का मिनरल
हाइड्रोलिक बंद ट्रकों में सी ट्रांसपोर्ट होगा वह भी व्यवहारिक नहीं था हमारे देश
और प्रदेश में जितने भी ट्रांसपोर्टर हैं वह सभी तरीके के ट्रांसपोर्ट करने के लिए
ही ट्रक को क्रय करते हैं अब यदि विशेष प्रकार के ट्रकों का
परिचालन उन्होंने कर लिया तो वह दूसरा काम नहीं कर सकते यह भी एक व्यावहारिक
दिक्कत है दूसरा विकल्प यही है कि पावर प्लांट कंपनियां कोयला परिवहन के लिए अपने
स्वयं के हाइड्रोलिक बंद ट्रकों को ट्रक कंपनियों से खरीदें और उसमें सिर्फ कोयले
का लदान कर परिवहन करें उसमें भी व्यावहारिक दिक्कत यह है कि जब कोयला याद आ जाएगा
तो उस जेसीबी से निश्चित ही टूट-फूट होगी और कुछ ही दिनों में वह हाइड्रोलिक पैनल
बंद ट्रक का पैनल काम करना बंद कर देगा फिर वही स्थिति निर्मित हो जाएगी कि पैनल
टूट जाएगा और कोयला खुले में ही ट्रांसपोर्ट होने लगेगा
कुल
मंत्रालय द्वारा उचित दामों में कोल ब्लॉकों को हासिल किया जाता है लेकिन उसकी
बेसिक जिम्मेदारी से भाग जाता है मसलन कोयला ब्लॉक ऑक्शन से पहले का
इंफ्रास्ट्रक्चर जिसमें रेल लाइन है गांव का विस्थापन है ग्रीन बेल्ट प्लांटेशन की
जगह यह सब पहले निश्चित कर लेने के बाद भी उसका ऑप्शन करना चाहिए ताकि यह
व्यावहारिक परेशानियों से और इस तरीके के आदेशों से उद्योग जगत कोई कष्ट ना हो और
पर्यावरण से जनहानि भी ना हो




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