वहीँ नगरनार स्टील प्लांट के लिए लार्सन एंड टुब्रो को दो हजार करोड़ का आयरन अयस्क घोल पाइपलाइन डालने का टेंडर मिला
जगदलपुर /// नगरनार स्टील प्लांट से बचेली लोहा खदान तक 135 किलोमीटर की घोल पाइप लाइन और पानी की पाइप लाइन सिस्टम को बिछाने के लिए डिजाइनिंग , इंजीनियरिंग ,सप्लाई और प्लांट इंस्टॉलेशन का टेंडर लार्सन टूब्रो ने हासिल कर लिया है करीब दो हजार करोड़ की लागत से इस पाइप लाइन को बिछाया जाएगा जिसमें से पानी के प्रेशर से भविष्य में आयरन हो की सप्लाई नगरनार प्लांट को की जाएगी आधुनिक तकनीकी पर आधारित इस प्रणाली की खासियत यह है कि आयरन ओर की ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट जहां बहुत कम हो जाएगी वही ट्रांसपोर्टेशन से होने वाले पर्यावरण के नुकसान को भी पूरी तरीके से बचाया जा सकता है |
एक ओर जहां प्लांट का डीमर्जर करने
के बाद मुख्य कंपनी एनएमडीसी से नगरनार
स्टील प्लांट को अलग से कंपनी का रूप दे दिया गया है इसके विरोध में लगातार पिछले 5 माह से
नगरनार के गेट पर तंबू लगाकर मजदूर यूनियन स्थानीय विधायक सांसद के अलावा वह
आदिवासी भी धरना दे रहे हैं जिनको इस प्लांट में उनकी भूमि अधिग्रहण के एवज में
नौकरी दी जाना थी उन्होंने भी आरोप लगाया है कि प्लांट के लिए हमारी जमीन तो ले ली
लेकिन वादे के अनुसार ना तो हमें मुआवजा मिल
ना ही हमें नौकरी मिली और अब यह मोदी सरकार इस प्लांट को जो अभी शुरू भी नहीं हुआ
है बेचने के लिए बेचैन हैं और उस दिशा में एक-एक करके कदम आ गए बढ़ाए जा रहा है
अधिकृत
सूत्रों के अनुसार मोदी सरकार
और स्टील मिनिस्ट्री ने बेचने का मन बना लिया है
इसके लिए लक्ष्मी निवास मित्तल जोकि स्टील किंग के नाम से जाने जाते हैं ने सबसे
अधिक प्रयास लगाना शुरू कर दिए हैं इसी प्रयास की पहली कड़ी में उन्होंने एस आर इंडिया लिमिटेड के किरंदुल प्लांट को भी खरीद कर
लोहा खोल पाइप लाइन प्रणाली से आयरन ओर विशाखापट्टनम स्टील प्लांट जोकि एस आर का
ही था उसको भी अधिपत्य में लेकर 1 साल से काम शुरू कर दिया है लक्ष्मी
निवास मित्तल की कंपनी
ने वैसे तो ऐसा रिंग्स लिमिटेड की पूरी संपत्ति 50
हजार करोड़
में खरीद ली है ,उसका एक भाग दंतेवाडा किरंदुल में भी स्थापित था वह भी उसके
अधिपत्य में आ गया है पिछले एक साल से मित्तल वहां
पर काम कर रहे हैं लेकिन वास्तव में लक्ष्मी निवास मित्तल की निगाहें नगरनार स्टील
प्लांट में शुरू से लगी हुई थी प्लांट अति आधुनिक लोहे तकनीकी से बनाए गए लोहे के
लिए सक्षम है,
एनएमडीसी ने इस प्लांट को खड़ा करने में अपना जी जान
लगा दिया कड़ी मेहनत के बाद प्लांट आज उत्पादन की स्टेज में है
सारी तैयारियां हो गई हैं रेल लाइन भी बीत गई है अब पाइपलाइन बिछाने की आखिरी बारी
है |
नगरनार
स्टील प्लांट को डील करने के लिए अदानी भी
अपने आप में लगे हुए हैं ,अदानी ने वैसे तो अपने आपको कोयला
और पावर तक ही सीमित रखा था लेकिन रमन सरकार के जमाने में उन्होंने बैलाडीला की उस
पहाड़ी को जिसे नंदी पर्वत के नाम से जाना जाता है की
लीज हासिल कर ली थी ,सरकार बदल गई नंदी
पर्वत को लेकर कांग्रेस
ने बड़ा आंदोलन किया अदानी
की आयरन
ओर माइंस अधर में लटक रहे हैं
नगरनार स्टील प्लांट यदि निजी हाथों में जाता है तो
उसे एनएमडीसी से
आयरन और खरीदना पड़ेगा क्योंकि
इस प्लांट से
एनएमडीसी का अध्यक्ष खत्म हो जाने के बाद अब उसके
पास कोई आयरन हो खदान नहीं है
समय करवट बदल रहा है भविष्य में हो सकता है कि अडानी
लक्ष्मी निवास मित्तल मिलकर नगरनार स्टील प्लांट के नए मालिक के रूप में दिखाई दे
सकते हैं ऐसा करने से प्लांट को आयरन ओर की माहिती मिल जाएगी और लक्ष्मी निवास
मित्तल को प्लांट में जाएगा
इस बीच छत्तीसगढ़ विधानसभा में नगरनार स्टील प्लांट को बेचने को लेकर हो रहे विरोध को अमलीजामा पहनाते हुए भूपेश सरकार ने बड़ी घोषणा कर दी है कि यदि केंद्र सरकार इस को बेचना चाहती है तो छत्तीसगढ़ राज इस प्लांट को खरीदने की इच्छा रखता है इस घोषणा के होते ही प्लांट खरीदी में तीसरे प्लेयर की एंट्री हो गई है, इस घोषणा ने जहां दोनों पुराने पेड़ों के कान खड़े कर दिए हैं वही हैं केंद्र सरकार का एक बड़ा बड़ा यह कह रहा है कि चलो विधानसभा में संकल्प पारित कर भूपेश सरकार ने स्टील प्लांट बेचने की एक बाधा को तो दूर कर दिया अब इसका ओपन टेंडर होना है जिसकी सबसे ज्यादा बोली होगी वही इस प्लांट का मालिक होगा छत्तीसगढ़ शासन के इस निर्णय को जहां कांग्रेस के विधायक सांसद एक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं वहीं भाजपा के सांसद और विधायक हैं कह रहे हैं कि भूपेश सरकार कर्ज लेकर क्या इस प्लांट को खरीदेगी लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि यदि छत्तीसगढ़ शासन ने इस प्लांट को खरीदने मैं बोली लगाकर हासिल कर लिया तो छत्तीसगढ़ राज्य के लिए भी यह एक बड़ी पूंजी की तरह होगा और इससे होने वाले मुनाफे से छत्तीसगढ़ सरकार को एक बड़ी राशि निश्चित रूप से ही मिलेगी क्योंकि जिस तकनीकी पर यह प्लांट आधारित है उसका भविष्य उज्जवल है




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