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कुलदेवी या कुलदेवता क्यों होते हैं जाने

Anil Choubey 06-11-2026 19:20:17


 

उनकी पूजा का महत्व क्या हैं?

▪कुलदेवी/कुलदेवता की पूजा कैसे की जाती हैं?

▪कब की जाती है कुलदेवी या कुलदेवता की पूजा?

▪यदि आपको अपनी कुलदेवी/कुलदेवता के बारे में कुछ नहीं पता हो तो आप क्या करे?

अंत तक पढ़े

क्यों होते हैं कुलदेवी या कुलदेवता

प्रत्येक परिवार या वंश का एक विशिष्ट दैवीय संबंध होता है जो पीढ़ियों के माध्यम से आगे बढ़ता है। किसी भी कुलदेवी या कुलदेवता को वंश के संरक्षक के रूप में देखा जाता है, जो उस कुल के सभी सदस्यों की रक्षा करते हैं।

कुलदेवी या कुलदेवता की पूजा का महत्व क्या हैं ?

- कुलदेवी या कुलदेवता की पूजा करने से परिवार पर आशीर्वाद बना रहता हैं तथा समृद्धि आती है।

- उनकी पूजा परिवार तथा परिवार की परंपराओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

- उनकी पूजा करने से परिवार के सदस्यों के बीच एकता और सामंजस्य बढ़ता है।

- यदि नवविवाहित दंपत्ति को कुलदेवता के दर्शन कराये जाये तो उनके रिश्ते में हमेशा सामंजस्य बना रहता है।

कब की जाती है कुलदेवी या कुलदेवता की पूजा

- प्रत्येक शुभ अवसर पर कुलदेवी या कुलदेवता का आह्वान कर उनकी पूजा की जाती हैं ।

- विशेषकर प्रत्येक विवाह संस्कार में उन्हें आमंत्रित करना तथा उनका आशीर्वाद लेना अनिवार्य होता हैं, जिससे कुल की समृद्धि बनी रहे।

- उन्हें हमारे वंश का रक्षक माना जाता है, इसलिए बच्चे के जन्म के बाद उसे दर्शन के लिए जरूर ले जाया जाता हैं जिससे बच्चे का स्वास्थ्य सदैव अच्छा बना रहे तथा जीवन में कोई समस्या न आए।

कैसे की जाती है कुलदेवी या कुलदेवता की पूजा

अगर आपको अपने कुलदेवी के बारे में नहीं पता है, यह दो सप्ताह की साधना है, जो किसी भी अमावस्या से प्रारंभ की जा सकती है। अर्थात् यदि साधना सोमवार को प्रारंभ की जाए, तो पन्द्रह दिन बाद सोमवार को ही उस साधना का समापन भी किया जाना चाहिए। इस साधना में मात्र तीन वस्तुओं की आवश्यकता होती है 'कुलदेवता यंत्र', 'कुलदेवी भैषज' एवं 'प्रत्यक्ष सिद्धि माला', इसके अलावा साधना में कोई विशेष कर्मकाण्ड नहीं होता है। प्रातः अथवा रात्रि में स्नान आदि कर पूर्व की ओर मुख कर अपने सामने गुरु चित्र रख कर गुरु पूजन कर लें गुरु नही है तो महादेव तथा भैरव पूजन करे। फिर दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प करें, कि मैं अपने कुल देवता और कुल देवी को प्रसन्न करने के लिए इस साधना को सम्पन्न कर रहा हूँ और उनकी कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना कर रहा हूँ, जिससे वे मुझे जीवन में हर प्रकार की सफलता एवं समृद्धि प्रदान करें तथा विपत्तियों से मेरी रक्षा करें। इस भाव को मन में धारण कर निम्न संकल्प का उच्चारण करें

- ॐ अद्य अमुक गोत्रीयः (अपना गोत्र बोलें) अमुक शर्माऽहं (नाम बोलें) स्व कुलदेवता प्रीत्यर्थं सकल मनोकामना पूर्ति निमित्तं कुलदेवता साधना

- घी का दीपक

कुलदेवी या भगवान की पूजा करते समय शुद्ध घी से धूप और कपूर जलाना चाहिए।

- साबुत चावल चढ़ाएं

कुलदेवता को चंदन, अक्षत, सिंदूर आदि लगाएं। इसके साथ ही हल्दी में भीगे पीले चावल चढ़ाना शुभ होता है।

- पान के साथ ये चीजें चढ़ाएं

पूजा के समय कुलदेवी या भगवान को सुपारी, लौंग, इलायची, दक्षिणा, गुलकंद आदि चढ़ाएं।

- तस्वीर न हो तो करें ये काम

अगर आपके घर में कुलदेवी या भगवान की तस्वीर या मूर्ति न हो तो एक सुपारी में कलावा अच्छे से लपेट लें। इसे प्रतीकात्मक रूप से बांधें और पूजा करें। इससे आपको लाभ मिलेगा।

कुलदेवी या देवता की पूजा के बिना शुभ अवसर को अधूरा माना जाता है

- कुलदेवी या कुलदेवता को परिवार या कुल का रक्षक माना जाता है और इनके आह्वान के बिना कोई भी शुभ अवसर पूरा नहीं माना जाता। ये घर-परिवार या वंश-परंपरा के प्रथम पूज्य और मुख्य अधिकारी देवता हैं। इनकी गिनती हमारे घर के बुजुर्ग सदस्यों की तरह होती है। इसलिए हर शुभ काम में इन्हें याद करना जरूरी है। इनका प्रभाव इतना महत्वपूर्ण है कि अगर ये नाराज हो जाएं तो हनुमानजी के अलावा कोई भी अन्य देवी-देवता इनके बुरे प्रभाव या नुकसान को कम या रोक नहीं सकता।

अगर आपको अपनी कुलदेवी के बारे में कुछ नहीं पता

-अगर किसी व्यक्ति को अपनी कुलदेवी या देवता के बारे में कुछ नहीं पता है तो वह मां दुर्गा और भैरव महाराज के नाम का स्मरण करते हुए पूजा कर सकता है।

अगर आपको कुलदेवी के बारे में नही पता हो या पता हो किंतु घर में चित्र ना हो तो ऐसे करे कुलदेवी की पूजा

बहुत से लोगों को अपनी कुलदेवी का पता नहीं।

१. पूजा के स्थान पर सवा रूपए का सिक्का रखें,

उस पर सुपारी रखें किंतु ध्यान रहे सुपारी अच्छी एवं नई हो

२. जल के पात्र से कुछ बुंदे पानी की सुपारी पर डालिए,

३. एक मौली का धागा सुपारी पर रख कर कहिये- माँ आपको वस्त्र अर्पित कर रहा हूँ

४. सुपारी पर कुमकुम लगा कर कहिये - माँ श्रृंगार ग्रहण करें |

५. घी का दीपक जलाएं और कहें माता जी कोई त्रुटि हो तो क्षमा दे एवं रक्षा कीजिये,दर्शन दीजिए और मेरे घर पर स्थान ग्रहण कीजिए

६. समस्त पूजन शुद्ध होकर एवं भाव सहित करे

७. सुपारी पर मौली चढ़ते ही सुपारी गौरी गणेश का रूप ले लेती है | अब हर रोज दीपक जलाएं

८. कुलदेवी मान कर सुपारी को उसी जगह रहने दें। । माता प्रसन्न होंगी एवं रक्षा करेंगी

ऊपर लिखी हुई साधना करके आप कुलदेवी माँ को जागृत कर सकते है यदि आपको स्थान का नही पता तो कुलदेवी माँ को आपका अवश्य पता लग जाएगा ऐसा करने से माँ आपको स्वप्न दर्शन अवश्य देते है और आपको कुलदेवी माँ का ज्ञान अवश्य होता है कृपया श्रद्धा एवं धैर्य बनाये रखे

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