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उदय शंकर कोई डार्क हार्स हैं ?

Administrator 08-04-2019 18:22:41


अजित अंजुम 

टीवी टुडे ग्रुप के चेयरमेन अरुण पुरी स्टार इंडिया के सीईओ उदय शंकर के ' इम्पेक्ट पर्सन आफ द डिकेड' चुने जाने पर अगर ये कहते हैं कि मैं मीडिया इंडस्ट्री में पिछले 40 साल से काम कर रहा हूं, लेकिन केवल एक आदमी को मैं ठीक से नहीं आंक पाया तो वो हैं उदयशंकर , तो इसी से पता चल जाता है कि उदय शंकर का एक मामूली रिपोर्टर से दो दर्जन चैनलों वाले स्टार इंडिया का सीईओ बनना और लगातार ऊँचाइयों की तरफ़ बढ़ते जाना कितने लोगों को चौंकाता है . अरुण पुरी ने एक वेबसाइट से बातचीत में ये भी कहा है - "मैंने सोचा था कि उदय शंकर आख़िरी व्यक्ति होगा जो भारत में कारपोरेट लीडर बनेगा क्योंकि वाक़ई में वो कारपोरेट का आदमी नहीं है " . अरुण पुरी मीडिया इंडस्ट्री के शीर्ष पर हैं लेकिन अगर वो कहते हैं उदय शंकर की कारपोरेट लीडरशिप क्षमता को नहीं आंक नहीं पाए तो समझ लीजिए कि कोई नहीं अांक पाया होगा . मतलब ये कि पूत के पाँव पालने में नहीं दिखे होंगे . 
तो फिर क्या उदय शंकर कोई डार्क हार्स हैं ? जो वक़्त की गर्भ से निकले और किसी की पीठ या किसी का हाथ पकड़कर कामयाबियों की सीढ़ियाँ चढ़ते चले गए , जैसेा कि सियासत में होता है . नहीं , दरअसल अरुण पुरी जब अपने पूर्व एंप्लाई और आजतक के पूर्व न्यूज़ डायरेक्टर उदय शंकर के बारे ये कह रहे हैं तो सीधे सीधे उदय की क्षमता को न पहचान पाने का अफ़सोस ज़ाहिर करके अपने को दोषमुक्त भी कर रहे हैं . उदय शंकर ने जो किया , जहाँ पहुँचे , जो हासिल किया , अपने दम पर किया . शानदार टीम बनाकर किया . कुछ अलग करने के इरादे के साथ हर रोज़ सीखते हुए किया . 
तभी तो स्टार इंडिया के सीईओ उदय शंकर इम्पेक्ट पर्सन आफ द डिकेड चुने गए .... उदय शंकर देश के टाप 50 प्रभावशाली लोगों कि लिस्ट में शुमार हो गए ...उदय शंकर को इंडिया टुडे या इंडियन एक्सप्रेस की टाप 100 इंडियन की लिस्ट में शामिल किया गया है ...उदय शंकर को ये सम्मान मिला ...उदय शंकर को वो पहचान मिली ....ऐसी ख़बरें अब मुझे चौंकाती नहीं . हाँ , उदय शंकर की तरक़्क़ी और कामयाबी ने पहले तीन बार लोगों को ज़रूर चौंकाया था . पहली बार तब ,जब वो तमाम दिग्गजों को पीछे छोड़कर देश के नंबर वन चैनल 'आजतक' के हेड बन गए थे . आजतक के भीतर और बाहर उनके तमाम अशुभचिंतक और आलोचक छाती पीटते रह गए थे कुछ इस अंदाज में कि या हुसैन हम न हुए . मीडिया सर्किल में महीने तक टीवी टुडे ग्रुप के चेयरमैन अरुण पुरी के इस फ़ैसले का पोस्टमार्टम होता रहा . उदय की कामयाबी से जलने और राख होने वाले तमाम लोग मातम मनाते रहे . 
उदय शंकर ने दूसरी बार तब चौंकाया जब वो 'आजतक' से छलाँग लगाकर स्टार न्यूज़ के एडिटर बनकर मुंबई पहंच गए . उन दिनों संजय पुगलिया स्टार न्यूज़ के संपादक थे और रवीना राज कोहली प्रेसीडेंट . उदय शंकर को लेकर चर्चाओं और क़यासों का दौर दिल्ली से मुंबई से चलता रहा . उन्हीं दिनों मार्डोक से अवीक सरकार ने स्टार न्यूज़ का टेकओवर किया था , सो स्टार न्यूज़ के नेतृत्व को लेकर एक धुँध सी थी . जब धुँध छँटीं तो संजय पुगलिया और रवीना राज कोहली की विदाई हो चुकी थी और उदय शंकर सीओओ बन चुके थे ( बाद में वो सीईओ बने ) उदय शंकर ने स्टार न्यूज़ नए सिरे से नई चुनौतियों के साथ संभाला . पुरानी टीम को भरोसे में लिया और नई टीम भी बनाई . शाज़ी ज़मान को एडिटर के तौर पर आजतक से ले गए . मिलिंद खांडेकर और विनोद कापड़ी समेत कुछ सीनियर लोगों को अपनी कोर टीम का हिस्सा बनाया और स्टार न्यूज़ के सीईओ के तौर उस इनिंग की शुरूआत की , जिसके पिच पर वो लगातार चौके -छक्के लगा रहे हैं . न्यूज़ कंटेंट के साथ -साथ बिज़नेस ,सेल्स, डिस्ट्रिब्यूशन , मार्केटिंग वग़ैरह की समझदारी विकसित करने के इस मौक़े का उदय ने जमकर फ़ायदा उठाया .
स्टार न्यूज़ के सीईओ के तौर पर उदय शायद पहले ऐसे शख़्स थे , जो खाँटी पत्रकार थे और बिज़नेस की बारीकियों को समझते हुए आगे बढ़ रहे थे , लेकिन वो इतना आगे बढ़ जाएँगे, ये तब भी किसी ने नहीं सोचा था . तभी तो उदय शंकर ने तीसरी बार चौंकाया जब वो 2007 में स्टार इंडिया के सीओओ बने . जैसे ही ये ख़बर फैली कि उदय शंकर पीटर मुखर्जी की जगह लेने जा रहे हैं , मीडिया सर्किल में दिल्ली से मुंबई तक फ़ोन की घंटियाँ बजने लगी . छोटे - बड़े पत्रकार -संपादक एक दूसरे से तस्दीक़ करनें में जुटे थे कि क्या सच में उदय शंकर स्टार इंडिया के हेड बन रहे हैं . जो भी लोग पूछताछ और कन्फर्म करने में लगे थे , सबमें आश्चर्य का भाव था . कुछ इस स्वर में कि यार ये कैसे हो गया ? उदय शंकर वहाँ कैसे पहुँच गए . कम से कम पचास फ़ोन तो मेरे पास आए होंगे ये पूछने के लिए ये क्या खेल है ? ये कैसे हो गया ? मार्डोक ने उदय को कैसे अप्वाइंट कर लिया ? 
उदय का स्टार इंडिया का सीओओ ( बाद में वो सीईओ बने ) बनना चौंकाने वाली ख़बर इसलिए भी थी कि कहाँ न्यूज़ का एक आदमी और कहाँ इंटरटेनमेंट के सबसे बड़े ग्रुप का हेड . वो भी तब जब कहा जा रहा था कि कारपोरेट और मीडिया बिज़नेस में धाक ज़माने वाले कई दिग्गज रेस में थे . सबको पीछे छोड़कर उदय शंकर का वहाँ पहुँचाना चौंकाने वाली ख़बर तो थी ही , बहुतों के लिए जलाने वाली थी . इस जलन का धुँआँ दिल्ली और मुंबई में एक साथ उठ रहा था . स्टार न्यूज़ में उनका फ़ेयरवेल भी नहीं हुआ था , स्टार इंडिया ज्वाइन भी नहीं किया था और बहुत से लोग कहने लगे थे कि उदय वहाँ पहुँच तो गए लेकिन इंटरटेनमेंट में चल नहीं पाएँगे . रूपर्ट मार्डोक के मीडिया बिज़नेस को चलाना आसान नहीं . कहने में कोई गुरेज़ नहीं है कि दिल्ली के मीडिया सर्किल में ऐसे उदयविमर्शों का मैं चश्मदीद भी रहा हूँ . 
अब वो सब लोग चुप है या चमत्कृत हैं या ख़ुद इतने हाशिए पर हैं कि उदय शंकर को सर्टिफ़िकेट देना बंद कर चुके हैं और अगर कहीं दे रहे होंगे तो अब कोई मतलब नहीं है . जिसने अपना मेटल प्रूव कर दिया , उसे अब ऐसे बिघ्नसंतोषियों , जलनशीलों , अशुभचिंतकों के ख़ारिज किए जाने से क्या फ़र्क़ पड़ता है . हाँ, जब उदय शंकर ' आजतक ' में थे , तब एक बेहद ग़ुस्सैल और आक्रामक बास की छवि थी , न्यूज़रूम के लोग डरते भी थे , देखकर छिपते भी थे , कोपभाजन भी बनते थे , उनकी ग़ैरमौजूदगी में जमकर आलोचना भी करते थे लेकिन इनमें से ज़्यादातर वो लोग थे , जो गल्तियां करते थे . लापरवाही करते थे . उदय जब स्टार न्यूज़ गए तो अपनी वही छवि लेकर गए लेकिन उन्होंने कुछ ही महीनों में अपनी ही छवि को तोड़ा और नए अवतार में दिखे . बहुत से लोगों को उन्होंने जोड़ा और आगे बढ़ाया . हम जैसे लोग भी उसमें शामिल हैं . 
बीते बीस सालों के उनके जिस सफ़र को हमने देखा हैं और बीते दस सालों में उनके करियर ने जो राह पकड़ी है , वो राह बहुत दूर तक जाती है . 
ये उदय शंकर के आज का सच है . वो देश के सबसे बड़े मीडिया साम्राज्य स्टार इंडिया के सात सालों से सीईओ हैं . स्टार ग्रुप के क़रीब डेढ़ दर्जन चैनलों के मुखिया हैं . देश के सभी हिन्दी -अंग्रेज़ी नेशनल न्यूज़ चैनलों के कुल टर्न ओवर से ज़्यादा अकेले स्टार इंडिया का टर्न ओवर हैं और इंटरटेनमेंट से लेकर खेल तक में में स्टार इंडिया के चैनलों का कोई मुक़ाबला नहीं . ये सब उदय शंकर की लीडरशिप क्षमता के सबूत हैं . पटना के एक अंग्रेज़ी अख़बार से बतौर रिपोर्टर अपना करियर शुरू करने वाले उदय शंकर यहाँ तक पहुँच जाएँगे और न सिर्फ़ पहुँच जाएँगे बल्कि अपनी धमक क़ायम रखते हुए लगातार आगे बढ़ते रहेंगे , ऐसा किसी ने नहीं सोचा होगा. तभी तो टीवी टुडे ग्रुप के चेयरमेन अरुण पुरी ने उदय शंकर को इम्पेक्ट पर्सन आफ द डिकेड चुने जाने के बाद माना कि 'आजतक ' में काम करने के दौरान वो उनकी कारपोरेट लीडरशिप क्षमता को ठीक से अंक नहीं पाए . 
अरुण पुरी ने ही उदय शंकर को अपने ड्रीम प्रोजेक्ट ' आजतक' का हेड बनाया , अपने ही न्यूज़रूम के कई सीनियर्स की नाराज़गी मोल लेकर उदय शंकर को बड़ी ज़िम्मेदारी दी लेकिन उदय में यहाँ तक जाने की क्षमता है , ये आंकलन अरूण पुरी नहीं कर पाए लेकिन आज अगर वो इस बात को सार्वजनिक तौर पर मानते हैं तो ये भी उदय की कामयाबी है . अरूण पुरी ने कहा है - " मैं अपनी गलती मानता हूं कि मैं उनमें ग्रेट कॉरपोरेट लीडरशिप क्वॉलिटीज नहीं देख पाया। वो एक ग्रेट थिंकर है और स्वभाविक रूप से एक ग्रेट लीडर भी..मैं कल्पना भी नहीं करता था कि वो इतने बड़े-बड़े शो बनाएंगे क्योंकि वो इतना हार्डकोर जर्नलिस्ट है, लेकिन मैं बहुत खुश हूं कि उन्हें आज ये (IMPACT Person of the Decade) अवॉर्ड मिला है। उन्होंने इंडस्ट्री पर बहुत बड़ा असर डाला है, मुझे पूरा भरोसा है कि आने वाले दिनों में भी उनकी लीडरशिप स्टार और इंडस्ट्री दोनों पर अपना वड़ा असर डालेगी।" 
तो आख़िर उदय शंकर में वो क्या बात है , जो उन्हें औरों से अलग करती है ? मेरे हिसाब से सबसे बड़ी बात है लीडरशिप क्वालिटी . रिस्क लेने की क्षमता . हर वक़्त कुछ नया करने और कुछ नया सीखने की ज़िद . उनकी ख़ासियत है - अच्छी टीम बनाना , टीम का हौसला बढ़ाना , काम करने के मौक़े देना , टीम के साथ एक्सपेरिमेंट्स करना और हर मौक़े पर अपनी टीम के साथ चट्टान की तरह खड़े रहना . मैंने एक साल तक उदय के साथ आजतक में और क़रीब साढ़े तीन साल तक बीएजी फ़िल्मस का संपादकीय प्रमुख रहते हुए स्टार के लिए काम किया है . इस लिहाज़ से मैंने उन्हें बहुत क़रीब से देखा समझा है . स्टार इंडिया के लिए एक धारावाहिक पर काम करते हुए भी कंटेंट पर उनकी बारीक समझ का गवाह रहा हूँ . इस नाते मैं कह सकता हूँ कि उदय शंकर में जो डायनेमिज्म है , वो शायद बहुत कम लोगों में होती है . 
नई चीज़ करने की ललक बहुतों में होती है लेकिन उसे करने का जोखिम लेने का माद्दा बहुत कम लोगों में होता है . उदय शंकर में ये माद्दा है . अगर ये माद्दा नहीं होता तो उदय इतनी चुनौतियाँ नहीं लेते . कंटेंट के स्तर पर तमाम तरह के रिस्क लेते हुए उन्होंने स्टार इंडिया में भी प्रयोग किए . ये रिस्क ही था कि उन्होंने सास -बहु और कॉमेडी के लिए देखे जाने वाले इंटरटेनमेंट चैनल पर पाँच करोड़ प्रति एपिसोड की लागत से सत्यमेव जयते जैसा सार्थक शो बनाने का फ़ैसला किया . आमिर खान से एंकरिंग कराया और तमाम सामाजिक मुद्दों को गहराई तक जाकर छुआ. जब उदय शंकर ने स्टार प्लस और कलर्स के बीच काँटे की प्रतियोगिता के बावजूद ऐसे गंभीर शो को लाँच करने का फ़ैसला किया तो भी लोग चौंके . ख़ुद उदय शंकर ने एक इंटरव्यू में कहा कि जब उन्होंने सत्यमेव जयते के कंसेप्ट पर अपनी कंपनी के सहयोगियों की राय ली तो कोई इसके पक्ष में नहीं था . उदय के शब्दों में कहें तो Satyamev Jayate caught the eye of boss James Murdoch, the co-chief operating officer, at 21st Century Fox. Shankar says Murdoch threw a lifeline to Satyamev Jayate at a time when others in the company were seeing it as an extravagant exercise in lunacy. 
“I was told by a company executive that I was “totally out of line,” when I discussed the concept of Satyamev Jayate. So I spoke with James and asked if I had his approval to go ahead and risk this whole investment,” says Shankar. “He said ‘we would live’.”
सत्यमेव जयते को रेटिंग के मामले जितनी कामयाबी मिली , उससे कहीं ज़्यादा असर और रेसपेक्ट के मामले में . बहुत कम लोगों का पता होगा कि सत्यमेव जयते नाम से ही एक शो उदय शंकर की ज़िद और फ़ैसले के साथ 2006 में स्टार न्यूज़ पर लाँच हुआ था . स्टार न्यूज़ के गौरव बनर्जी ( गौरव अब स्टार इंडिया में सीनियर पोज़ीशन पर हैं ) सत्यमेव जयते के एंकर और कर्ता धर्ता थे . उदय इस न्यूज़ शो को देश का सबसे बड़ा न्यूज़ शो बनाना चाहते थे लेकिन दुर्भाग्य से टीवी न्यूज़ का वो दौर राखी सावंतों , राजू श्रीवास्तवों और तमाशों का था . रेटिंग के लिए बिना ड्राइवर वाली कार, स्वर्ग की सीढ़ी , पुनर्जन्म के क़िस्से , यमराज से मुलाक़ातों की कहानियाँ , भूतों की तलाश , नागिन का बदला और सनसनीख़ेज़ अपराध कहानियों चैनलों की प्राइम टाइम का हिस्सा थी .( इसके लिए हम जैसे लोग भी ज़िम्मेदार हैं ) . उदय शंकर उस दौर को सत्यमेव जयते जैसे गंभीर न्यूज़ शो से रीडिफाइन करना चाहते थे लेकिन न तो इसके लिए स्टार न्यूज़ की टीम तैयार थी , न ही सही वक़्त था . उदय मुझसे , मिलिंद खांडेकर से और विनोद कापड़ी से तब भी कहते थे और आज भी प्यार से उलाहना देने वाले अंदाज में अक्सर कहते हैं कि तुम लोगों ने मेरे कंसेप्ट को तब चलने नहीं दिया . ये सच भी है कि तब स्टार न्यूज़ के भीतर ही बहुत से लोग थे , जो उस शो को लेकर न आश्वस्त नहीं थे और न ही ज़ोर लगाकर उसे कामयाब बनाने में जुटे थे . 
उस दौर में हमने उदय शंकर की बेचैनी और यथास्थिति को बदलने की छटपटाहट देखी है . तब रेटिंग की ऐसी मारकाट मची थी कि उदय शंकर अपने दम पर कितना कुछ कर लेते . फिर भी उन्होंने स्टार न्यूज़ को नई दिशा दी , नए तेवर दिए . 
उदय शंकर जब स्टार इंडिया गए तो हममें से बहुतों को लगता था कि वहाँ टिकना और अपने को साबित करना उदय के लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी , क्योंकि उदय शंकर खाँटी जर्नलिस्ट थे . सीरियल और इंटरटेनमेंट की दुनिया उनके लिए नई थी . पीटर मुखर्जी और समीर नायर जैसे दिग्गजों की विरासत संभालना और नई ज़मीन पर पैर ज़माना आसान नहीं होगा . लेकिन स्टार न्यूज़ के सीईओ के तौर पर मैंने बिलकुल अलग चोले में उदय शंकर को देखा था इसलिए आसपास के लोगों की तमाम आशंकाओं को सुनते -समझते हुए भी यक़ीन था कि अब उदय शंकर की रफ़्तार को कोई रोक नहीं पाएगा . हुआ वही . बीएजी फ़िल्मस के इंटरटेनमेंट डिवीज़न की तरफ़ से एक दो सीरियल का प्रस्ताव लेकर मैं तीन साल पहले उदय शंकर से मिला . एक कंसेप्ट पर काम करने का ज़िम्मा उन्होंने भी मुझे दिया . मुंबई में बीएजी की क्रिएटिव टीम के साथ कई सप्ताह की माथापच्ची के बाद मेरी तीन चार लंबी मीटिंगें उदय से हुई . साथ में स्टार इंडिया की क्रिएटिव टीम भी थी लेकिन हर बार उदय शंकर ने कंसेप्ट और स्टोरी के नैरेशन के दौरान इतनी बारीक चीज़ों को पकड़ा कि मैं अफ़सोस और इर्ष्या से भर गया कि ये बात पहले हमें क्यों नहीं समझ में नहीं आई . 
उदय शंकर की हैसियत , पोज़ीशन और ओहदेदारों पाकर बहुतों का दिमाग़ ख़राब हो जाए , यहाँ तो मामूली सफलता मिलने पर बहुत से लोग बौरा जाते हैं . कब ज़मीन से उखड़कर आसमान में उड़ने लगते है ,पता ही नहीं चलता . लेकिन उदय शंकर आज भी अपने दोस्तों - परिचितों और पुराने दिनों के साथियों के साथ उसी गर्मजोशी और ऊर्जा के साथ मिलते हैं . बहुतों की मदद करते हैं और किसी को भूलते नहीं . उनकी ये ख़ासियत भी औरों से उन्हें अलग करती है . दुनिया के किसी भी कोने में हों लेकिन अगर बहुत मजबूर न हो तो मैसेज का जवाब देते हैं , लोगों से संपर्क में रहते हैं . यारों के यार हैं और वक़्त पड़ने पर मददगार भी .
 

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