बिलासपुर //// साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड ने खदानों की निगरानी करने खान
सुरक्षा महानिदेशालय के आधुनिकरण के लिए कमेटी का गठन किया है, कमेटी आधुनिक तकनीक
के इस्तेमाल को लेकर मंथन कर रही है जल्दी खदानों में आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल
शुरू हो जाएगा. खान सुरक्षा निदेशालय की कार्य संस्कृति अब जल्दी ही बदलेगी खदानों के निरीक्षण में
सेटेलाइट का उपयोग की रूपरेखा बनाई जा रही है ,खदानों में पहुंचकर निरीक्षण करना
आसान काम नहीं है धरातल पर भूमिगत खदानों का दायरा काफी बड़ा होता है .ऐसे में
खदान की पूरी निगरानी बेहतर ढंग से नहीं हो पाती खदान में उत्पादन और डिस्पेच
कराने के संसाधनों का इस्तेमाल किसी तरह से हो रहा है, इसके लिए भी निरीक्षण किया
जाता है लेकिन केवल वीऊ पॉइंट से ही करना पड़ता है ऐसे में जानकारी ठीक नहीं होती इसी वजह से
सुरक्षा निदेशालय के कार्यों को आधुनिकीकरण का रूप दिया जा रहा है. सैटलाइट खदानों
का निरीक्षण किया जाए पर एक रिपोर्ट तैयार की गई है भूमिगत खुली खदान से लेकर गैस
व तेल की खदानों की सटीक रिपोर्ट की स्थिति में आएगी कमेटी गठन संबंधी सूचना केंद्र
में तकनीकी कमेटी का गठन संबंधी सूचना केंद्र में तकनीकी
कमेटी ने जरी के डी है कोल इंडिया के पूर्व चेयरमैन ए के झा को
अध्यक्ष बनाया गया है इसके अलावा अन्य अधिकारियों को भी कमेटी में शामिल किया
जाएगा
एसईसीएल- गेवरा ,कुसमुंडा ,दीपका, कंपनी के मेगा प्रोजेक्ट में शामिल
है एसईसीएल का लगभग 85 % उत्पादन इन खदानों से होता है इन खदानों में
डीजल कोयला और कावाड चोरी की घटनाएं
लगातार सामने आती रहती है. खदान का व्यापक दायरा होने के कारण निरिक्षण सटीक नहीं
हो पाता ऐसे में इया आधुनिकरण का लाभ भी
इन खदानों को बेहतर ढंग से मिलने की उम्मीद है. कोल इंडिया की 5 वर्षीय वन मिलियन टन के टारगेट की ओर पर काम कर रही है .यही वजह है कि जिले की खदानों में
आधुनिक मशीन भरी मशीने उतारी जा रहे हैं ,
खदानों के आधुनिक तकनीकी निरीक्षण के पीछे कंपनी का उद्देश है कि मजदूरों
के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को भी दूर किया जाएगा खदान हादसे से को कम करने
में भी और प्रभावी रेस्क्यू सहित अन्य हिस्सों में भी शामिल किया गया है




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