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छत्तीसगढ़ के दो मत्स्यकृषकों को मिला राष्ट्रीय सम्मान 21 नवम्बर को विश्व मात्स्यिकी दिवस पर नई दिल्ली में होंगे सम्मानित

Anil Choubey 20-11-2020 17:46:01


मुख्यमंत्री तथा कृषि मंत्री ने छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित करने वाले मत्स्य कृषकों एवं संस्थाओं को दी बधाई और शुभकामनाएं मत्स्य उत्पादन में देश मे छठवाँ स्थान है छत्तीसगढ़ का

                                   रायपुर, ////// मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ राज्य में पिछले दो साल में मत्स्य बीज उत्पादन में 13 और मत्स्य उत्पादन में 9 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। मछली पालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए राज्य के दो मत्स्य कृषकों को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत एवं सम्मानित किया जाएगा। 21 नवंबर को विश्व मात्स्यिकी दिवस के अवसर पर भारत शासन द्वारा ए.पी. सिम्पोजियम हॉल, पूसा कैंपस नई दिल्ली में आयोजित समारोह में यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इसमें छत्तीसगढ़ राज्य के मेसर्स एम.एम.फिश सीड़ कल्टीवेशन प्राइवेट लिमिटेड, माना, जिला रायपुर को बेस्ट फिशरीज इन्टरप्राइजे़स के तहत् दो लाख रूपए का नगद पुरस्कार तथा प्रशस्ति पत्र एवं मेसर्स एम.आई.के कम्पनी, सिहावा, जिला धमतरी को बेस्ट प्रोप्राईटरी फर्म संवर्ग के तहत् एक लाख रूपए का नगद पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र दिया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल तथा कृषि एवं जल संसाधन मंत्री श्री रविन्द्र चौबे ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित करने वाले मत्स्य  कृषकों एवं संस्थाओं को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

                              कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे ने कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य में मछली पालन के क्षेत्र में प्रदेश के मत्स्य कृषक नवीनतम तकनीक को अपनाते हुए सफलता अर्जित कर रहे हैं। मत्स्य बीज उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश आत्मनिर्भर हैं। विगत दो वर्षो में प्रदेश में 13 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मत्स्य बीज उत्पादन 251 करोड़ स्टैण्डर्ड फ्राई से 267 करोड़ स्टैण्डर्ड फ्राई का उत्पादन में किया हैं। देश में राज्य का मत्स्य बीज उत्पादन के क्षेत्र में छठवां स्थान हैं। राज्य के मत्स्य कृषक प्रदेश में आवश्यक मत्स्य बीज प्रदाय करने के अतिरिक्त मध्यप्रदेश, उड़ीसा, महाराष्ट्र, आध्रप्रदेश एवं बिहार प्रदेशों को भी निजी क्षेत्र द्वारा मत्स्य बीज की आपूर्ति कर रहे हैं। यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है।

                          संचालक मछली पालन ने बताया कि आधुनिक तकनीक का उपयोग कर राज्य के मत्स्य कृषक 6-7 मेट्रिक टन तक मत्स्य उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। विगत दो वर्षो में प्रदेश में 9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मत्स्य उत्पादन 4.89 लाख मिटरिक टन से 5.31 लाख मिटरिक टन का उत्पादन हुआ हैं। देश में राज्य का मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में भी छठवां स्थान हैं।

                            राज्य में विगत दो वर्षो में मत्स्य कृषकों द्वारा स्वयं की भूमि पर 1000 तालाबों का निर्माण कर पंगेशियस प्रजाति का उत्पादन किया जा रहा है। प्रदेश के प्रगतिशील मत्स्य कृषक एवं जिला कांकेर के कृषकों द्वारा समूह में तालाबों का निर्माण कर विशेषकर पंगेशियस मत्स्य प्रजाति का नवीनतम तकनीक के साथ-साथ पूरक आहार का उपयोग कर 60-70 मेट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक मत्स्य उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं जिससे प्रदेश वासियों को स्वस्थ्य प्रोटीन युक्त ताजा आहार उपलब्ध हो रहा हैं। राज्य में मत्स्य उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि हेतु तीव्र बढ़वार वाली मत्स्य ‘‘तिलापिया‘ का उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। निजी क्षेत्र में एक तिलापिया बीज

उत्पादन हेतु हैचरी रायपुर में स्थापित की गई हैं प्रदेश में प्रति दिवस लगभग 20 टन तिलाबिया की मांग है। तिलापिया मत्स्य का निर्यात अन्य राज्यों जैसे केरल, उत्तर प्रदेश, मघ्य प्रदेश को किया जा रहा है। प्रदेश में इस वर्ष 3.00 करोड़ तिलापिया मत्स्य बीज निजी क्षेत्र में उत्पादित किया गया है।

राज्य के मध्यम एंव बड़ेे जलाशयों में मत्स्य की शत्-प्रतिशत प्राप्ति सुनिश्चित करती है केज कल्चर तकनीक। इस तकनीक में जलाशयों में 6x4x4 मीटर के केज बनाकर तीव्र बढ़वार वाली मत्स्य जैसे कि ‘पंगेशियस‘ एवं ‘तेलापिया‘ का पालन किया जाता है। प्रति केज 3000-5000 किलो मत्स्य उत्पादित की जाती है। अब तक प्रदेश के 11 जिलों में 1400 केज स्थापित हो चुके है।

प्रदेश के सबसे बड़े जलाशय हसदेव बांगो, कोरबा में 1000 केज की परियोजना स्वीकृत की गई है। इन्हें स्थापित कर प्रति हितग्राही 05-05 केज की इकाई एक-एक हितग्राही को मत्स्य पालन हेतु आबंटित की जावेगी। उक्त केज स्थानीय अनुजनजाति के मत्स्य पालकों को प्रदाय कर शासन की ओर से 40 से 60 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इसमें डुबान क्षेत्र में आने वाले व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जावेगी।

प्रदेशवासी मछलीपालन के क्षेत्र में क्रियान्वित नवीनतम तकनीक जैसे एकीकृत मत्स्य पालन, सघन मत्स्य पालन, पंगास पालन, रिसर्कलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आर.ए.एस.) तकनीक के माध्यम से कम क्षेत्र एवं कम जलक्षेत्र में पानी को निरन्तर परिशुद्धि कर मत्स्य पालन अपनाकर सफलता अर्जित कर रहे हैं, जिससे प्रदेश का मत्स्य उत्पादन निरंतर बढ़ रहा है। प्रदेश की आर.एस.ए. तकनीक का अन्य प्रदेश से मछलीपालन अधिकारी एवं प्रगतिशील मत्स्य कृषक यहाँ प्रयोग की नई तकनिकों का अध्ययन एवं परीक्षण कर प्रेरणा प्राप्त कर रहे हैं।

प्रदेश में नवीनतम तकनीक से कम क्षेत्र में छोटी-छोटी टंकिया स्थापित कर कम जलक्षेत्र में परिपूरक आहार का उपयोग कर मछली पालन कर अधिक उत्पादन लेने हेतु बायोफ्लॉक तकनीक संचालित किये जाने हेतु शासन द्वारा इस वर्ष से मत्स्य कृषकों को प्रोत्साहन करने हेतु योजना स्वीकृत की गई है। जिसके तहत् प्रदेश वासियों को राशि 7.50 लाख रूपए लागत की इकाई स्थापना पर लागत राशि पर 40 प्रतिशत आर्थिक सहायता दिया जाने का प्रावधान रखा गया है।

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