दिव्य-दूत

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जापान से आए एहिमे यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधिमंडल ने देखा छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत का वैभव, सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहर ने किया अभिभूत

Anil Choubey 14-09-2026 20:58:05


**** छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने 17 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय डेलीगेशन के लिए आयोजित किया विशेष हेरिटेज टूर लक्ष्मण मंदिर, आनंद प्रभु कुटी विहार, स्वास्तिक विहार, तीवरदेव महाविहार सहित प्रमुख पुरातात्विक स्थलों का किया भ्रमण वैश्विक अकादमिक एवं पर्यटन संवाद में सिरपुर को नई पहचान दिलाने की पहल  ****

रायपुर, 14 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड  ने जापान के मत्सुयामा स्थित एहिमे यूनिवर्सिटी के 17 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के लिए विशेष हेरिटेज टूर का आयोजन किया। अकादमिक एवं शोध सहयोग के उद्देश्य से 12 से 14 सितंबर 2026 तक एनआईटी रायपुर द्वारा होस्ट किए गए जापानी डेलीगेशन ने 14 सितंबर को प्राचीन ऐतिहासिक नगरी  सिरपुर का भ्रमण कर छत्तीसगढ़ की उस विरासत को करीब से जाना, जिसमें बौद्ध, हिंदू और जैन संस्कृति का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।

मुख्य हॉस्पिटैलिटी एवं आयोजन सहयोगी के रूप में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए सिरपुर में विशेष हेरिटेज टूर की व्यवस्था की। डेलीगेशन को सिरपुर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्थापत्य कला, पुरातात्विक महत्व और धार्मिक-सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराने के लिए विशेषज्ञ स्थानीय गाइड की सेवाएं ली गईं। साथ ही जापानी मेहमानों की खान-पान संबंधी पसंद को ध्यान में रखते हुए विशेष हॉस्पिटैलिटी एवं भोजन की व्यवस्था भी की गई।

सिरपुर - इतिहास, धर्म और स्थापत्य का अद्भुत संगम

महानदी के तट पर बसा सिरपुर प्राचीन काल में  श्रीपुर  के नाम से जाना जाता था और दक्षिण कोसल की राजधानी के रूप में इसका महत्वपूर्ण स्थान रहा। वर्तमान सिरपुर में हुए पुरातात्विक उत्खननों से बौद्ध विहारों, हिंदू मंदिरों, जैन अवशेषों तथा अन्य प्राचीन संरचनाओं का विस्तृत संसार सामने आया है। यहां बौद्ध, हिंदू और जैन परंपराओं से जुड़े अनेक पुरातात्विक अवशेष मौजूद हैं।

जापानी प्रतिनिधिमंडल ने इस ऐतिहासिक नगरी के प्रमुख विरासत स्थलों का भ्रमण करते हुए यहां की स्थापत्य परंपरा और प्राचीन सांस्कृतिक जीवन को समझा। उनके लिए यह भ्रमण केवल पर्यटन नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच अकादमिक, सांस्कृतिक और विरासत संवाद का एक जीवंत अनुभव रहा।

लक्ष्मण मंदिर - ईंटों में उकेरी अद्भुत स्थापत्य कला

डेलीगेशन के भ्रमण का प्रमुख आकर्षण लक्ष्मण मंदिर रहा। लगभग सातवीं शताब्दी से संबद्ध यह मंदिर भारत के उत्कृष्ट प्राचीन ईंट निर्मित मंदिरों में गिना जाता है। मंदिर की वास्तुकला, अलंकरण और ईंटों पर की गई बारीक कारीगरी सिरपुर की स्थापत्य कला को प्रदर्शित करती है। मंदिर परिसर में पुरातात्विक महत्व की अनेक प्रतिमाएं और अवशेष भी संरक्षित हैं। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मंदिर की संरचना, गर्भगृह, अंतराल और मंडप सहित इसकी स्थापत्य विशेषताओं को देखा तथा स्थानीय गाइड से मंदिर के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संदर्भों की जानकारी प्राप्त की।

आनंद प्रभु कुटी विहार ने बताया सिरपुर का बौद्ध वैभव

इसके बाद डेलीगेशन ने आनंद प्रभु कुटी विहार का भ्रमण किया। यह सिरपुर के प्रमुख बौद्ध पुरातात्विक स्थलों में शामिल है। विहार की संरचना में केंद्रीय प्रांगण के चारों ओर कक्षों की व्यवस्था तथा सुंदर नक्काशीदार स्थापत्य तत्व दिखाई देते हैं। यहां बुद्ध की प्रतिमा और पद्मपाणि अवलोकितेश्वर से संबंधित कलात्मक अवशेष इसकी बौद्ध विरासत को विशेष बनाते हैं। उपलब्ध पुरातात्विक विवरणों के अनुसार यहां 14 कक्षों वाला मठीय परिसर रहा है।

जापानी विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने यहां प्राचीन बौद्ध शिक्षा, मठीय जीवन और स्थापत्य परंपरा के बारे में जानकारी ली। यह स्थल उनके लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि जापान की अपनी सांस्कृतिक परंपरा में भी बौद्ध दर्शन और कला का गहरा प्रभाव रहा है।

स्वास्तिक विहार - प्राचीन वास्तु योजना का अनूठा उदाहरण

डेलीगेशन ने स्वास्तिक विहार का भी अवलोकन किया। अपने विशिष्ट स्वास्तिकाकार विन्यास के कारण यह विहार सिरपुर की पुरातात्विक विरासत में विशेष पहचान रखता है। उत्खनन से यहां बुद्ध एवं पद्मपाणि से संबंधित प्रतिमाएं और अन्य बौद्धकालीन अवशेष प्राप्त हुए हैं। प्रतिनिधिमंडल ने विहार की संरचना और प्राचीन वास्तु योजना को समझा तथा यह जाना कि सदियों पूर्व सिरपुर क…

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