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स्लेट, तख्ती और चॉक से स्मार्ट क्लास तक पहुँची शिक्षा, लेकिन शिक्षक की भूमिका आज भी सबसे महत्वपूर्ण >>> मुख्यमंत्री साय

Anil Choubey 04-09-2026 21:36:52


****** शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरुजनों के नाम लिखा आत्मीय पत्रअपने विद्यार्थी जीवन के संघर्षों को किया याद, कहा - परिस्थितियाँ किसी बच्चे के सपनों की सीमा तय न करें गुरुजनों से आत्मीय आग्रह: अभाव, संकोच या किसी कारण पीछे छूट रहे बच्चे का हाथ अवश्य थामिएशिक्षकों से मिले संस्कार और सीख को बताया अपने जीवन की पूँजी ******

रायपुर 4 सितंबर 2026////// मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस ( 5 सितंबर) के अवसर पर प्रदेश के गुरुजनों के नाम आत्मीय पत्र लिखकर उन्हें सादर नमन किया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने पत्र में अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए बचपन के संघर्ष, उस दौर में शिक्षा प्राप्त करने की कठिनाइयों और आज शिक्षा के क्षेत्र में आए व्यापक बदलाव का भावपूर्ण उल्लेख किया है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया है कि वे प्रत्येक बच्चे के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानें और विशेष रूप से उन बच्चों का हाथ थामें, जो अभाव, संकोच अथवा किसी अन्य कारण से पीछे छूट रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने लिखा है  कि आज मुख्यमंत्री के दायित्व का निर्वहन करते हुए जब उन्हें प्रदेश के बच्चों के भविष्य और उनकी शिक्षा से जुड़े निर्णय लेने का अवसर मिलता है, तब अपने बचपन और विद्यार्थी जीवन के वे दिन और अधिक याद आते हैं। जीवन कितना भी आगे बढ़ जाए, अपने शिक्षकों के प्रति आदर और कृतज्ञता का भाव कभी कम नहीं होता।

बगिया के छोटे से स्कूल से शुरू हुआ शिक्षा का सफर

 

मुख्यमंत्री श्री साय ने पत्र में अपने बचपन को याद करते हुए बताया है कि उनका जन्म जशपुर जिले के बगिया गाँव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ और गाँव के स्कूल से ही उनकी शिक्षा की शुरुआत हुई। जीवन ने बहुत छोटी उम्र में उनकी कठिन परीक्षा ली। जब वे लगभग दस वर्ष के थे और चौथी कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी पिता का साया सिर से उठ गया। परिवार, खेती और छोटे भाइयों की चिंता कम उम्र में ही उनके जीवन का हिस्सा बन गई।

गाँव में पाँचवीं तक पढ़ने के बाद आगे की शिक्षा के लिए उन्हें कुनकुरी जाना पड़ा। वहाँ लोयोला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक छोटे से कमरे में रहकर पढ़ाई की। आगे भी पढ़ने की इच्छा थी, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा का क्रम जारी नहीं रख सके। उन्होंने खेती की जिम्मेदारी संभाली और अपने छोटे भाइयों की पढ़ाई को आगे बढ़ाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय गाँव के एक बच्चे के लिए शिक्षा तक पहुँचना आज जितना सहज नहीं था। विद्यालय दूर होते थे, आवागमन के साधन सीमित थे, पढ़ाई के संसाधनों का अभाव था और आर्थिक कठिनाइयाँ भी कई बच्चों के सपनों की राह में बाधा बन जाती थीं।

स्लेट-तख्ती से स्मार्ट क्लास तक:मुख्यमंत्री ने याद किया शिक्षा का बदलता दौर

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने विद्यार्थी जीवन और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि आज पीछे मुड़कर देखने पर यह सुखद अनुभूति होती है कि शिक्षा की दुनिया कितनी बदल गई है। जिस समय उनकी पीढ़ी ने स्लेट, तख्ती और चॉक से पढ़ाई शुरू की थी, आज उसी छत्तीसगढ़ के बच्चे स्मार्ट क्लास में पढ़ रहे हैं। डिजिटल माध्यमों से दुनिया भर के ज्ञान तक उनकी पहुँच बनी है और वे विज्ञान एवं आधुनिक तकनीक से जुड़ रहे हैं।

 

उन्होंने कहा कि कभी दूरस्थ अंचलों में विद्यालय तक पहुँचना भी बच्चों के लिए चुनौती हुआ करता था, वहीं आज इन क्षेत्रों में बेहतर विद्यालय, आधुनिक शैक्षणिक संसाधन और नए अवसर बच्चों के द्वार तक पहुँच रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा में आए इस व्यापक परिवर्तन के बावजूद एक बात तब भी सत्य थी और आज भी उतनी ही सत्य है- शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार शिक्षक ही है।

तकनीक जानकारी दे सकती है, लेकिन शिक्षक ही बच्चे के भीतर आत्मविश्वास जगाता हैमुख्यमंत्री श्री साय ने गुरुजनों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि तकनीक बच्चों को जानकारी दे सकती है, पुस्तकें उन्हें ज्ञान दे सकती हैं और आधुनिक संसाधन सीखने की राह आसान कर सकते हैं, लेकिन किसी बच्चे के भीतर आत्मविश्वास जगाने, उसके संस्कार गढ़ने, उसकी प्रतिभा पहचानने और उसे एक अच्छा मनुष्य बनाने का सामर्थ्य एक संवेदनशील शिक्षक में ही होता है।

उन्होंने कहा कि उनके अपने जीवन में भी गुरुजनों से मिली सीख ने कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का साहस दिया। यही कारण है कि वे शिक्षक को केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि जीवन की दिशा दिखाने वाला पथ-प्रदर्शक मानते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि जिन अभावों और कठिनाइयों के कारण कभी किसी बच्चे की पढ़ाई रुक जाती थी, वे आज किसी बच्चे के सपनों के रास्ते में बाधा न बनें। कोई बच्चा केवल इसलिए पीछे न रह जाए कि उसका जन्म किसी छोटे गाँव, वनांचल अथवा दूरस्थ क्षेत्र में हुआ है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इसी सोच के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप छत्तीसगढ़ में शिक्षा को अधिक सहज, आधुनिक, व्यावहारिक और बच्चों की प्रतिभा के अनुकूल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं में सीखने के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। कौशल और व्यावहारिक ज्ञान को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है तथा डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास और आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों का विस्तार हो रहा है।

 

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन क्षेत्रों में भी विद्यालयों की घंटियाँ फिर सुनाई दे रही हैं, जहाँ परिस्थितियों के कारण वर्षों तक स्कूल बंद रहे थे। यह बदलाव केवल भवन, तकनीक और सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके केंद्र में प्रत्येक बच्चे को आगे बढ़ने का समान अवसर देने का संकल्प है।मुख्यमंत्री ने कहा  कि हम ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना चाहते हैं, जहाँ किसी बच्चे की परिस्थितियाँ उसके सपनों की सीमा तय न करें।

हर बच्चे में छिपी हैं अनगिनत संभावनाएँ

मुख्यमंत्री श्री साय ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि इस संकल्प को धरातल पर उतारने की सबसे बड़ी शक्ति प्रदेश के शिक्षक हैं। शिक्षक के सामने कक्षा में बैठा हर बच्चा अपने भीतर अनगिनत संभावनाएँ लेकर आता है। कोई भविष्य का वैज्ञानिक हो सकता है, कोई खिलाड़ी, डॉक्टर, किसान, शिक्षक, कलाकार या जनसेवक।

उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे को स्वयं अपनी क्षमता का पता नहीं होता, लेकिन शिक्षक की पारखी दृष्टि उसकी प्रतिभा पहचान लेती है। शिक्षक द्वारा कहा गया प्रोत्साहन का एक वाक्य भी किसी बच्चे को जीवन भर आगे बढ़ने की शक्ति दे सकता है।

मुख्यमंत्री का गुरुजनों से विशेष आग्रह:पीछे छूट रहे बच्चे का हाथ थामिए

मुख्यमंत्री श्री साय ने शिक्षक दिवस पर गुरुजनों से अत्यंत आत्मीय आग्रह करते हुए कहा कि हर बच्चे के भीतर छिपी संभावना को पहचानिए। विशेषकर उस बच्चे का हाथ अवश्य थामिए, जो अभाव में है, संकोच में है या किसी कारण पीछे छूट रहा है। हो सकता है आपका थोड़ा-सा विश्वास उसके पूरे जीवन की दिशा बदल दे।

उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का विश्वास किसी बच्चे के लिए जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बन सकता है। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चे के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, संस्कार और उसकी क्षमताओं को विकसित करना भी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने पत्र में अत्यंत भावपूर्ण ढंग से गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस पर वे मुख्यमंत्री के रूप में ही नहीं, बल्कि कभी गाँव के एक छोटे से स्कूल में पढ़ने वाले उस विद्यार्थी के रूप में भी सभी गुरुजनों के प्रति कृतज्ञ हैं, जिसने अपने शिक्षकों से मिले संस्कार और सीख को जीवन की पूँजी माना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समय बदल गया है, स्कूल बदल रहे हैं और पढ़ाने तथा सीखने के साधन भी बदल रहे हैं। आने वाले समय में आधुनिक तकनीक इन्हें और अधिक बदलेगी, लेकिन गुरु और शिष्य के बीच विश्वास, स्नेह और संस्कार का जो संबंध भारतीय परंपरा की आत्मा है, उसका महत्व कभी कम नहीं होगा।

हर स्कूल बने सपनों का द्वार, हर कक्षा संभावनाओं का संसा

 

 

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