दिव्य-दूत

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विभाजन की पीड़ा से सीख लेकर देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखना हम सभी का दायित्व >>> मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

Anil Choubey 14-08-2026 19:51:39


****** विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय हुए शामिल संचालनालय पुरातत्व से अंबेडकर चौक तक मौन जुलूस में शामिल होकर विभाजन का दंश झेलने वाले परिवारों के प्रति व्यक्त की संवेदना  *****

रायपुर, 14 अगस्त 2026/ इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि वर्तमान को दिशा देने और भविष्य को सुरक्षित बनाने की सीख भी है। इसलिए विभाजन की विभीषिका और उससे मिले सबक को पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्मरण रखना आवश्यक है। विभाजन की पीड़ा हमें देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को हर परिस्थिति में अक्षुण्ण रखने का संदेश देती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के संचालनालय पुरातत्व स्थित मुक्ताकाशी मंच में आयोजित ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। समारोह में विभाजन की त्रासदी में प्राण गंवाने वाले लोगों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया तथा विस्थापन का दंश झेलने वाले परिवारों के संघर्ष, साहस और धैर्य को नमन किया गया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्ष 1947 में देश का विभाजन केवल भू-भाग और सीमाओं का बंटवारा नहीं था। इस त्रासदी ने लाखों लोगों को अपनी जन्मभूमि, घर-बार और अपनों से बिछड़ने के लिए विवश कर दिया। बंगाली, सिख और सिंधी समाज सहित अनेक समुदायों के लाखों परिवारों ने विस्थापन की असहनीय पीड़ा झेली। जिन्होंने अपनी आंखों से उस दौर की भयावहता देखी, उनमें से अधिकांश आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके परिवारों और आने वाली पीढ़ियों की स्मृतियों में वह पीड़ा आज भी जीवित है।

उन्होंने कहा कि विभाजन के कारण विस्थापित हुए लोगों ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना किया। अपना सब कुछ पीछे छोड़कर उन्होंने नए स्थानों पर लगभग शून्य से जीवन की शुरुआत की। अपने अथक परिश्रम, पुरुषार्थ और जीवटता से उन्होंने स्वयं को पुनः स्थापित किया और देश तथा समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका संघर्ष और साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन की त्रासदी में प्राण गंवाने वाले लोगों के बलिदान और विस्थापन का दंश झेलने वाले परिवारों के संघर्ष को उचित सम्मान देने तथा नई पीढ़ी को इतिहास के इस अध्याय से परिचित कराने के उद्देश्य से 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया। यह दिवस केवल अतीत की पीड़ा को स्मरण करने का अवसर नहीं है, बल्कि उस त्रासदी से सीख लेकर राष्ट्र की एकता और अखंडता के प्रति अपने संकल्प को और मजबूत करने का भी अवसर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को यह जानना आवश्यक है कि देश की स्वतंत्रता के साथ विभाजन के समय लाखों देशवासियों को कितनी बड़ी मानवीय त्रासदी से गुजरना पड़ा था। इतिहास का स्मरण इसलिए भी आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति न हो और समाज में एकता, सद्भाव तथा भाईचारे की भावना और मजबूत हो।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज भारत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत का यह संकल्प एकजुट और सशक्त समाज की नींव पर ही साकार होगा। छत्तीसगढ़ भी विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में समाज के प्रत्येक वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि विभाजन की विभीषिका झेलने वाले परिवारों और उनकी पीढ़ियों के साथ राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने समारोह के मुख्य वक्ता पद्मश्री डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए भारतीय इतिहास, संस्कृति और साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने में उनके योगदान की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. द्विवेदी ने प्रसिद्ध साहित्यकार अमृता प्रीतम के उपन्यास पर आधारित अपनी फिल्म ‘पिंजर’ के माध्यम से विभाजन की त्रासदी और मानवीय पीड़ा को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त किया है।समारोह में विभाजन का दंश झेलने वाले विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों और उनके परिवारजनों ने अपने अनुभव एवं स्मृतियां साझा कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्यक्ष रूप से उस त्रासदी को झेलने वाले अनेक लोग आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी पीढ़ियां उनकी स्मृतियों और संघर…

 

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