दिव्य-दूत

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स्ट्रीट वेंडर्स के सपनों को मिली नई उड़ान छत्तीसगढ़ में 1.12 लाख से अधिक वेंडर्स को मिला आर्थिक संबल

Anil Choubey 12-06-2026 21:55:17


रायपुर, 12 जून 2026/ /// कभी सड़क किनारे ठेला लगाकर सब्जियां बेचने वाले, चाय-नाश्ते की छोटी दुकान चलाने वाले या फिर फुटपाथ पर रोजी-रोटी कमाने वाले लाखों स्ट्रीट वेंडर (रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों) के लिए पूंजी की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी। बैंक ऋण तक पहुंच नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय सीमित था। लेकिन प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना ने इन छोटे उद्यमियों के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिखी है।

ऋण सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। योजना ने न केवल उनके कारोबार को मजबूती दी है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका का नया अवसर भी प्रदान किया है।

कोविड-19 महामारी के दौरान आजीविका पर पड़े गंभीर प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने 1 जून 2020 को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (च्ड ैट।छपकीप) योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले स्ट्रीट वेंडर को बिना गारंटी कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने व्यवसाय को फिर से शुरू कर सकें और उसका विस्तार कर सकें। योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की गारंटी की आवश्यकता नहीं होती। समय पर ऋण चुकाने वाले हितग्राहियों को अगले चरण में अधिक राशि का ऋण प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

 

                योजना के तहत लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से ऋण उपलब्ध कराया जाता है। प्रथम चरण में 10,000 रूपए तक का ऋण, द्वितीय चरण में 20,000 रूपए तक का ऋण तथा तृतीय चरण में 50,000 रूपए तक का ऋण दिया जाता है। अर्थात इस योजना के अंतर्गत न्यूनतम 10 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 50 हजार रुपये तक की कार्यशील पूंजी ऋण सहायता प्राप्त की जा सकती है। समय पर पुनर्भुगतान करने वाले हितग्राही ही अगले चरण के लिए पात्र बनते हैं।

पीएम स्वनिधि योजना का लाभ उन छोटे कारोबारियों को मिलता है जो सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थानों पर वस्तुएं एवं सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इनमें सब्जी एवं फल विक्रेता, चाय, नाश्ता एवं फास्ट फूड विक्रेता, पान दुकान संचालक, कपड़ा एवं रेडीमेड वस्त्र विक्रेता, जूता-चप्पल विक्रेता, किताब एवं स्टेशनरी विक्रेता, फूल एवं पूजा सामग्री विक्रेता, मोबाइल एक्सेसरीज विक्रेता, नाई, मोची, लॉन्ड्री जैसी सेवाएं देने वाले स्वरोजगारी, जैसे अनेक छोटे व्यवसाय शामिल हैं।

 छत्तीसगढ़ में योजना का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ और धमतरी जैसे जिलों में हजारों पथ विक्रेताओं को ऋण सहायता प्रदान की गई है। राज्य स्तर पर 267.22 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि के विरुद्ध 256.94 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया जा चुका है, जिससे 1.12 लाख से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का कहना है कि पीएम स्वनिधि योजना केवल ऋण वितरण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह छोटे उद्यमियों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का एक व्यापक अभियान है। इससे स्ट्रीट वेंडर्स की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, उनकी आय में वृद्धि हो रही है और वे अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर पा रहे हैं। आज छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों में हजारों पथ विक्रेता इस योजना के सहारे अपने कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना वास्तव में उन मेहनतकश हाथों को आर्थिक संबल देने का माध्यम बनी है, जो अपने परिश्रम से शहरों की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करते हैं।

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