दिव्य-दूत

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समाज और मानवता के प्रति नए दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का अवसर है दीक्षांत समारोह >>> मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

Administrator 05-06-2026 20:23:39


नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस’ से बाहर निकलने की आवश्यकता >>>  राज्यपाल रमेन डेका


 

पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में 9 हजार 194 विद्यार्थियों को प्रदान की गई उपाधियां

रायपुर 5 जून 2026/राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा है कि डिजिटल एडिक्शन वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनती जा रही है। इसका प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है। नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस’ से बाहर निकलने की आवश्यकता है, क्योंकि यह सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर केवल कृत्रिम संतुष्टि प्रदान करता है। राज्यपाल श्री डेका आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

दीक्षांत समारोह में मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथी, मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी, फिजियोथेरेपी, नर्सिंग, बीएएसएलपी सहित विभिन्न संकायों के कुल 9 हजार 194 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 7 हजार 545 स्नातक, 1 हजार 645 स्नातकोत्तर तथा 5 सुपर स्पेशियलिटी उपाधिधारी शामिल हैं। विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदकों से भी सम्मानित किया गया।

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि यदि दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास किया जाए तो 30 दिनों के भीतर डिजिटल एडिक्शन से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है। बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखते हुए खेल-कूद और अन्य बाहरी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे सीमित दायरे में रह रहे हैं, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है।

राज्यपाल ने नवस्नातक चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम है। जिस प्रकार वे राज्यपाल के रूप में प्रदेश की जनता के हितों के प्रति उत्तरदायी हैं, उसी प्रकार चिकित्सकों का दायित्व मरीजों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समर्पित रहना है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के सफेद कोट पर कभी कोई दाग नहीं आना चाहिए और मरीज का हित सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ‘नेबरहुड डॉक्टर’ और पारिवारिक चिकित्सक की अवधारणा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी मरीज के लिए ‘गोल्डन ऑवर’ अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और ऐसे समय में चिकित्सक की त्वरित निर्णय क्षमता जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाती है।

राज्यपाल ने कहा कि आज के विद्यार्थी इंटरनेट युग के छात्र हैं। विज्ञान निरंतर प्रगति कर रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मानव, पशु और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों, शिक्षकों तथा विश्वविद्यालय परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज का दिन केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि समाज और मानवता के प्रति नए दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का भी अवसर है। विद्यार्थियों को प्राप्त उपाधियां और सम्मान उनकी मेहनत, अनुशासन और समर्पण का परिणाम हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि समाज को नवस्नातक चिकित्सकों से बड़ी अपेक्षाएं हैं और वे प्रदेश के स्वास्थ्य प्रहरी हैं। विशेष रूप से जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से करुणा, नवाचार, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों के साथ चिकित्सा सेवा प्रदान करने का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।

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