ग्राउंड जीरो से संवाददाता की रपट
वाइल्डलाइफ वन अमला इतनी मुस्तैदी से काम कर रहा है इसकी बानगी इसी बात से पता चलती है कि अब आए दिन हाथी के शवकों की मौतें की खबरें लगातार आ रही है गरियाबंद ,कोरबा मैं एक सप्ताह में ही तीन बेबी हाथियों की मौत हो गई है
***** सरगुजा से लेकर धमतरी तक हजारों गांव के ग्रामीणों जन आक्रोश है सरकार हमें हाथियों के आतंक से नहीं बचाती तो अगली बार हम वोट नहीं देंगे का नारा बुलंद हो रहा है इन पीड़ित गांव में , हाथियों से लड़ने की तैयारी में भी लामबंद हो रहे हैं गांव वाले ***
हाथी मानव द्वंद ग्राउंड जीरो की
रपट , वन मंत्री के हालिया बयान से तो लग रहा है कि वाइल्ड लाइफ वन अमला उन्हें सही जानकारी नहीं दे रहा है |
वाइल्डलाइफ
अफसरों का नया जुमला हाथी मानव द्वंद समाप्त करने के लिए पूरे देश से सुझाव मांगे
हैं यह उस शुतुरमुर्ग की तरह ही है जो अपनी चोच जमीन में डालकर सोचता है कि उसकी जान बच गई
रायपुर // हाथी मरे तो अपराध दर्ज हाथी मानव को मारे तो 25 हजार का मुआवजा पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए वाइल्ड लाइफ ऑफसर अरुण पांडे ने कहां
है कि 25 हजार नहीं 6 लाख देते हैं , कहने का अंदाज इस तरह से था जैसे अरुण पांडे अपनी जेब दे रहे हो ,
को लेकर जब हमारे संवाददाताओं ने हाथी द्वारा
मृत गांव वालों से यह सवाल पूछा तो हाथी द्वारा मारे गए मुखिया की विधवा महिला ने
भीड़ में से चिल्लाते हुए कहा कि उस वन अधिकारी को लाओ और हाथियों के पैर के नीचे कुचलवा दो हम उसके परिवार को छह लाख मुआवजा देते हैं हम गरीब ग्रामीणों की जानकी अच्छी कीमत लगा रखी है वन विभाग के अधिकारियों
ने यह जन आक्रोश से भरे इस गांव के लोगों का कहना है कि जो सरकार हमें हाथी से
नहीं बचा सकती उसे हम अब चुनाव में मतदान नहीं
करेंगे इस तरीके का संकेत सरकार और पार्टी के लिए खतरनाक होता जा रहा है सरगुजा
संभाग के सभी जिले के अलावा हाथियों का तांडव महासमुंद गरियाबंद सरायपाली धमतरी
हजारों गांव में हाथियों का तांडव लगातार पिछले एक दशक से जारी है वन अमला इसे
रोकने में नाकाम रहा है
सिर्फ मुआवजे की राशि कॉलर आईडी सायरन बजाना , ढोल बजाना के अलावा और कोई उपाय अभी तक दिनेश सूझ नहीं रहा है इतना करके अपने इतिश्री
कर लेते हैं
छत्तीसगढ़ में एक दशक से हाथियों
की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है बढ़ती हुई हाथियों की आबादी ने वन ग्राम क्षेत्रों में बसे गांवों के अलावा वनों के आसपास बसे गांव में भी भारी
उत्पात मचा कर जहां निर्दोष लोगों की जान ली है, और उनकी फसलों को बुरी तरीके से रोंदा
है उनके घर को चकनाचूर किया है इसको लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है, बलरामपुर
से लेकर महासमुंद, धमतरी तक यह तांडव हाथियों द्वारा मचाया जा रहा है हाथियों से
निपटने में नाकाम वाइल्ड लाइफ अमला अभी तक सिर्फ मुआवजा देकर गांव के लोगों का
मुंह बंद करते आ रहा है लेकिन पीड़ित गांव के लोगों का कहना है की जिस घर से किसी
की मौत हाथी द्वारा की जाती है मुआवजा ना
काफी है हमें मुआवजा नहीं हाथियों के आतंक से मुक्ति चाहिए इस ओर वाइल्डलाइफ अमले
ने आज तक पीढित ग्राम वासियों को बचाने किसी भी प्रकार का कोई भी उपक्रम नहीं किया है गांव में हाथी
पहुंच गया है कि सूचना देकर अपना पल्ला झाड़ रहा है गांव में हाथी ना घुसे इसके लिए कोई उपाय नहीं कर रहा है सायरन बजाना. कॉलर आईडी लगाना, नगाड़े बजाना इन सब से मानव हाथी द्वंद कम नहीं हो रहा है बल्कि इस तरीके की
कार्यप्रणाली से हाथी और वाइल्ड हो रहा है और वह गांव वालों को लगातार नुकसान
पहुंचा रहा है
संभाग सरगुजा से लेकर बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़, जशपुर, धर्मजयगढ़ सरायपाली ,महासमुंद, गरियाबंद ,धमतरी
के क्षेत्रों में हजारों गांव के ग्रामीण इस हाथी के हमलों से आतंकित हैं हाथी ने
यहां पर पैर पटक के मानव की जान ले ली खबरें रोज ही आ रही है यह खबरें भी हें की हाथियों के आतंक से आतंकित ग्रामीणों ने कई
हाथियों की हत्या जहर खुरानी और बिजली के करंट से भी की है उसको लेकर वन अमला
सिर्फ एफ आई आर दर्ज कर गांव वालों पर कार्रवाई कर रहा है
एक और जहां भूपेश सरकार वन अंचलों में अपने वोट बैंक को
बढ़ाने के लिए लगातार लुभावनी योजनाओं की घोषणा कर आदिवासी और वन क्षेत्र में रहने
वाले ग्रामीणों को मदद पहुंचाने के लिए लगातार लगा हुआ है वही वाइल्डलाइफ वन अमला
भूपेश सरकार के इस कोशिश पर मट्ठा डालने में लगा हुआ है हमारे विशेष वाइल्डलाइफ
रिपोर्टर ने जब सरगुजा से लेकर धमतरी तक का दौरा किया और इन ग्रामीणों से मुलाकात
की तो उसे पता चला कि हजारों ग्रामीणों ने यही कहा है कि सरकार यदि इन हाथियों के
आतंक से हमें मुक्त नहीं कराती तो अगली बार हम सरकार को अपना वोट नहीं देंगे ऐसी
सैकड़ों ग्राम पंचायत हैं जहां पर इस तरीके के प्रस्ताव भी लाए गए हैं कि गांव को
आतंकी हमलों से बचाने के लिए अब सरकार तो कुछ कर नहीं रही है वन अमला के पास कोई
संसाधन नहीं है जिससे वह हमें बचा सके तो अब हम अपने स्तर पर इन हाथियों से निपटने
के लिए कार्य योजना तैयार करें कार्य योजना से मतलब सीधे-सीधे हाथियों की हत्या ही
एक मात्र उपाय रह गया है इस तरीके के खतरनाक मंसूबों से जहां हाथी मानव द्वंद में
एक बार फिर से उफान आने का अंदेशा है वहीं सरकार का वोट बैंक भी खिसक रहा है|
हाल ही में वन मंत्री मोहम्मद
अकबर ने कहा है कि मानव हाथी द्वंद की खबरें निराधार हैं पर ग्राउंड जीरो पर
देखने से लगता है कि इस वक्त गांव की वन ग्रामों की सबसे बड़ी समस्या हाथी से उत्पन्न
हो गई है वाइल्डलाइफ अमला मंत्री जी को सही सही जानकारी नहीं दे रहा है इसलिए
मंत्री जी इस तरह की की बातें कर रहे हैं लेकिन वास्तविकता यही है कि हाथी हमलों से प्रभावित हजारों
गांव के ग्राम वासियों मैं सरकार के प्रति आक्रोश है जो
कांग्रेस सरकार के जनाधार को कम करने की ओर लगातार बढ़ रहा है|




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