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एकीकृत कृषि और आजीविका के लिए "दीदी के बखरी "से आ रही नई क्रांति कांकेर जिले की पहल

Anil Choubey 12-04-2026 22:43:40


सब्जी बाड़ी, पोषण वाटिका, मुर्गी पालन, वनोपज संग्रहण और मछली पालन से ग्रामीणजन  समृद्धि की ओर

कांकेर, 12 अप्रैल 2026///// सब्जी बाड़ी, पोषण वाटिका, मुर्गी पालन, वनोपज संग्रहण और मछली पालन ग्रामीण भारत में समृद्धि, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वतंत्रता के प्रमुख स्तंभ बन रहे हैं। ये गतिविधियां न केवल परिवार को ताजी और पौष्टिक सब्जियां व प्रोटीन प्रदान करती हैं, बल्कि अतिरिक्त आय का जरिया भी बनती हैं। महिला आजीविका में वृद्धि के लिए एकीकृत क़ृषि सबंधित "दीदी के बखरी "कार्य अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा  बन रही है, जिसे देखकर बाकी दीदीयां भी अपने जीवन स्तर में सुधार लाने और आय बढ़ाने पर कार्य कर रही है।

 उत्तर बस्तर कांकेर जिले में बिहान योजना के तहत महिलाओं के आजीविका में वृद्धि हेतु सभी स्तर पर विभिन्न प्रयास किये जा रहे हैं । जिले में काफ़ी संख्या में दीदीयां अपने जीवन स्तर में सुधार के लिए आय मूलक गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं । अपनी आय दुगुनी करने के लिए एकीकृत क़ृषि के साथ अन्य लाइवलिहुड एक्टिविटी कर रही हैं इसमें अपने घर के बखरी (बाड़ी) में व्यावसायिक रूप से सब्जी -भाजी लगाकर उसको बाजार में बिक्री कर अपनी आय में वृद्धि कर रही है, साथ ही मछली पालन, मुर्गीपालन, बकरी पालन व वनोपज संग्रहण कर रही है। इस प्रकार से एकीकृत क़ृषि  जिले के चार विकासखंड_ नरहरपुर, कांकेर, भानुप्रतापपुर, चारामा में संचालित है, जिसमें प्रत्येक संकुल के चार गांव को लिया गया है। योजना का उद्देश्य महिला किसानों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है, जिससे उनकी औसत आय प्रतिमाह बीस से पच्चीस हजार  तक पहुंच जाए।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी उत्तर बस्तर कांकेर के मार्गदर्शन में  यह योजना ज़िले में सुचारु रूप से संचालित हो रही है l यह  योजना "दीदी के बखरी" नाम से संचालित है । विकासखण्ड नरहरपुर में 1200 महिलाएं, कांकेर में 790, चारामा में 734 एवं भानुप्रतापपुर में 640 महिलाएं इस प्रकार कुल 3364 महिला किसानों द्वारा सब्जी बाड़ी, पोषण वाटिका, मुर्गी पालन, वनोपज संग्रहण, मछली पालन इत्यादि गतिविधियां की जा रही हैं। वित्त वर्ष 2026-27 में 10 हजार 780 महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें उनका आवश्यक सहयोग करके उनके आय में वृद्धि का प्रयास किया जायेगा । इनके लिए सभी कलस्टर लेवल पर आजीविका सेवा केंद्र भी खोला जा रहा है जो दीदियों द्वारा ही संचालित होगा। इसके माध्यम से इनको उक्त गतिविधि के संचालन हेतु आवश्यक बीज, क़ृषि उपकरण, खाद आदि मुहैया कराया जायेगा। जिला पंचायत सीईओ ने गत दिनों नरहरपुर, चारामा, भानुप्रतापपुर, कांकेर की महिला किसानों से मिलकर उनके द्वारा किये जा रहे कार्यों की जानकारी ली।

नरहरपुर विकासखंड के सुदूर ग्राम पंचायत रावस और बांस पत्तर पहुंचे जहाँ महिला किसान सुरेखा नेताम के द्वारा बनाये गए बखरी में लगाए ग्राफ्टेड सब्जी_ भाजी और मुर्गी पालन के कार्य को देख कर  प्रसन्नता जाहिर की। सुरेखा ने बताया कि हरी पत्तेदार सब्जियां, कंदमूल और फल एनीमिया (खून की कमी) को दूर करते हैं और बच्चों व माताओं को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं।

ग्राम ठेमा की महिला किसान नामिका यादव के वनोपज और मुर्गी, मछली पालन के कार्य को देखकर काफ़ी सराहा। उन्होंने बताया कि ग्रामीण और जनजातीय समुदाय महुआ, इमली, शहद, लाख, और विभिन्न जड़ी-बूटियों का संग्रहण कर उन्हें बेचकर अपनी आय बढ़ाते हैं।

 भानुप्रतापपुर विकासखण्ड के ग्राम हाटकर्रा की महिला मोतिन दर्रो ने बताया कि मुर्गी पालन के साथ मछली पालन (Poultry-cum-Fish) करने से मुर्गियों की बीट मछली का चारा बन जाती है, जिससे चारे का खर्च बचता है और लाभ बढ़ता है। बकरीपालन एवं मछली पालन  और सूरजमुखी की खेती के कार्य को देखकर प्रसंशा की। ग्राम धनेली की महिला जमुना कोर्राम से आजीविका डबरी से संबंधित जानकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने ली तथा कठोली की दीदी से चर्चा कर उन्होंने उनकी औसत मासिक आय की जानकारी लेते हुए उन्हें कार्य के प्रति प्रोत्साहित किया

 

 

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