
प्रहार लाइट मशीन गन- 7.62x51 मिमी
खासियतें:
● सटीक, मजबूत और भरोसेमंद लाइट मशीन गन
● ओपन बोल्ट सिस्टम पर काम करती है, गैस पिस्टन और रोटेटिंग बोल्ट लॉकिंग के साथ
● सेफ, सेमी-ऑटोमैटिक और ऑटोमैटिक मोड में फायरिंग की सुविधा
● कठिन परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन के लिए गैस रेगुलेटर
● 120 राउंड के असॉल्ट ड्रम या बेल्ट चेन से फीड होती है
● मजबूत और टिकाऊ बायपॉड
● फील्ड में आसानी से खोलकर मेंटेनेंस की सुविधा
● एडजस्ट होने वाला बट स्टॉक और चीक रेस्ट
● अतिरिक्त सुरक्षा फीचर्स
● बैकअप आयरन साइट्स
स्पेसिफिकेशन:
● कैलिबर 7.62x51 मिमी
● बैरल की लंबाई (मिमी) 508 (20")
● कुल लंबाई (मिमी) 1,100
● वजन (सिर्फ हथियार) 8 किलोग्राम
प्रभावी रेंज 1000 मीटर
भारत के एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी और अदाणी एंटरप्राइज़ेज़ लिमिटेड का हिस्सा, अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारतीय सेना को स्वदेश में बनी 'प्रहार' 7.62 मिमी लाइट मशीन गन (एलएमजी) की 2,000 यूनिट सौंपी हैं। यह भारत की छोटे हथियार बनाने की क्षमता के लिए एक बड़ा और अहम कदम माना जा
रहा है
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पहली खेप की यह आपूर्ति सिर्फ 7 महीनों में पूरी कर ली गई, जो तय समय से 11 महीने पहले है। प्रोडक्शन का पहला मॉडल 6 महीने में तैयार हो गया, जबकि इसके लिए 18 महीने का समय तय था। इसके बाद बल्क प्रोडक्शन की मंजूरी मिली, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो सकी।
इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के डीजी एक्विजिशन और अतिरिक्त सचिव ए. अनबरासु के साथ भारतीय सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित अदाणी डिफेंस की स्मॉल आर्म्स फैसिलिटी में तैयार की जा रही 'प्रहार' एलएमजी, देश की पहली पूरी तरह इंटीग्रेटेड निजी क्षेत्र की स्मॉल आर्म्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है। इससे विदेशों से हथियारों पर निर्भरता कम होगी और देश की रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी। करीब 100 एकड़ में फैली इस यूनिट में बैरल बनाने से लेकर बोल्ट कैरियर और रिसीवर तैयार करने, एडवांस सीएनसी मशीनिंग, रोबोटिक्स, सरफेस ट्रीटमेंट, सटीक माप, मेटलर्जी लैब और 25 मीटर की अंडरग्राउंड फायरिंग रेंज जैसी सभी सुविधाएँ मौजूद हैं।
हर हथियार तैनाती से पहले कई स्तर की जाँच होकर जाता है, जिसमें लाइफसाइकल टेस्टिंग, बैलिस्टिक जाँच और अलग-अलग परिस्थितियों में ट्रायल शामिल हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि हर गन भारतीय सशस्त्र बलों के तय मानकों पर पूरी तरह खरी उतरती है
ग्वालियर की यह यूनिट बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए तैयार की गई है और यहाँ हर साल करीब 1 लाख हथियार बनाए जा सकते हैं, जिनमें 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा देश में ही तैयार होता है। यह यूनिट मध्य प्रदेश में एक मजबूत औद्योगिक माहौल बनाने में भी मदद कर रही है, जहाँ कुशल रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं और माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) को भी समर्थन मिल रहा है।
इस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को उत्तर प्रदेश के कानपुर में अदाणी डिफेंस के एम्युनिशन कॉम्प्लेक्स से भी सहयोग मिल रहा है, जिसे वर्ष 2024 में शुरू किया गया था। इस यूनिट में हर साल करीब 30 करोड़ छोटे कैलिबर के गोला-बारूद बनाने की क्षमता है और आगे चलकर इसे बड़े और मीडियम कैलिबर के एम्युनिशन बनाने के लिए भी तैयार किया जा रहा है, जिससे हथियार और गोला-बारूद का पूरा सिस्टम और मजबूत होगा।
डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को एक साथ जोड़ने का यह तरीका पूरे सिस्टम को ज्यादा मजबूत बनाता है, काम की गति को बेहतर करता है और रक्षा उत्पादन में लंबे समय तक आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद करता है।
आगे की योजना के तहत ग्वालियर की यह यूनिट भारतीय सशस्त्र बलों के लिए क्लोज क्वार्टर बैटल (सीक्यूबी) हथियार बनाने की भी तैयारी कर रही है, जिससे देश में छोटे हथियारों के स्वदेशी निर्माण को और मजबूती मिलेगी।




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