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नरेन्द्र कुमार वर्मा
नई दिल्ली ब्यूरोचीफ, दिव्यदूत
नई दिल्ली28/03/2026// /// दिल्ली में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2026 में युवाओं को मनोरंजन और मीडिया की नई-नई विधाओं से रूबरू होने का मौका मिला। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में फिक्शन, नॉन फिक्शन, एनिमेशन, क्यूरेटेड सेगमेंट, डॉक्यूमेंट्री, बॉलीवुड श्रेणी सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि उनकी सरकार राजधानी को दुनिया के सामने एक क्रिएटिव कैपिटल के तौर पर विकसित करने की दिशा में काम कर रही जिससे बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार का मौका मिलेगा।
दिल्ली में पहली बार व्यापक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय फिल्मों का लुफ्त दर्शकों ने उठाया। इस अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल की खास बात यह थी कि मुख्य आयोजन स्थन भारत मंडपम के साथ ही दिल्ली में साकेत, जसोला, मोतीनगर, पटेलनगर, बसंतकुंज, व्दारका, सिरी फोर्ट, मंडी हॉउस और श्रीराम कला केंद्र में भी फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई। इस दौरान दिल्ली के अनेक कलाकारों, निर्माताओं, पटकथा लेखकों और गीतकारों को नामचीन फिल्म निर्माताओं और कलाकारों से मिलने का मौका मिला। अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल दिल्ली को डिजिटल सिमेमा और नई तकनीकी की विशेष प्रस्तुतियों के लिए भी याद रखा जाएगा।
दिल्ली सरकार के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि दिल्ली सरकार और प्रसार भारती के बीच फिल्म और मीडिया के आधुनिक आयामों के निर्माण को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। जिसके बाद दिल्ली में फिल्म, टेलीविजन,एनीमेशन विजुवल, इफेक्ट, गेमिंग, डिजिटल कंटेंट, कॉमिक्स और मीडिया क्षेत्र की नई-नई तकनीकी के प्रशिक्षण केंद्रों का विकास किया जाएगा। पर्यटन मंत्री ने कहा कि आन वाले दिनों में दिल्ली इंटीग्रेटेड फिल्म, टेलीविजन और मीडिया के हब के तौर पर दुनिया के सामने होगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में फिल्म नीति के तहत सिंगल-विंडो सिस्टम, प्रोडक्शन सपोर्ट, उद्योग सहयोग और शूटिंग के लिए तमाम सुविधाओं को स्थापित किया गया है। ताकि दिल्ली को ऑरेंज इकोनॉमी के सेंटर के तौर पर विकसित किया जा सके।
दिल्ली में आयोजित होने वाले इस सिनेमाई महाकुंभ से दिल्ली की प्राचीन संस्कृति, इतिहास और पर्यटन केंद्रों को भी लोकप्रियता मिलने की उम्मीद है। सरकार ने जिस रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ इसका आयोजन को किया है उससे फिल्मों के क्षेत्र में करियर बनाने वाले विभिन्न श्रेणी के लोगों को मास्टर क्लास, इंडस्ट्री संवाद, फिल्म मार्केट, एक्सपो, टैलेंट डेवलपमेंट, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, इन्वेस्टर्स, परिचर्चाओं और कार्यशालाओं के माध्यम से बहुत सारी नई बातों को सिखने और समझने में मदद मिली। संभवत पहली बार फिल्म के बड़े मंच से नवाचार, उभरते कलाकारों, डिजिटल कंटेंट और नई तकनीकी का प्रसार करने वालों को एक बड़ा बाजार भी मिला।
फेस्टिवल में 100 से अधिक देशों की 2000 हजार से ज्यादा प्रविष्ठियां आई। दर्शकों ने विदेशी भाषा और भारतीय क्षेत्रीय भाषा में बनी फिल्मों का भी आनंद लिया। इस आयोजन में वर्ल्ड सिनेमा और फिल्म मेकर्स से मुलाकात के बाद दर्शकों ने अपने चेहते कलाकारों से मुलाकात भी की। दिल्ली में इस सिनेमैटिक कल्चर के मंच से अनेक फिल्ममेकर्स ने अपनी बातों और सुझावों को सरकार तक पहुंचाने का काम भी किया। सिनेमा रचनात्मकता और सृजनात्मकता की एक बड़ी पहल है। सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में सिनेमा की विविधता में बड़े बदलाव आए है। डिजिटल माध्यम और ओटीटी प्लेटफार्म ने सिनेमा के पटल को और ज्यादा व्यापक बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल दिल्ली में जहां एक तरफ बदलते सिनेमा की तकनीकी को लोगों ने सराहा वहीं दूसरी तरफ सिनेमाई नवाचार को भी लोगों ने मनोरंजन जगत के लिए जरूरी बताया। दिल्ली सरकार ने आम नागरिकों तक इस आयोजन को पहुंचाने के लिए और विश्व सिनेमा को समझने जानने के लिए उन्हें सभी जगहों पर निःशुल्क प्रवेश दिया।




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