नरेन्द्र कुमार वर्मा
(दिव्यदूत ब्यूरोचीफ, नई दिल्ली)
नई दिल्ली 21//03//2026// दिल्ली में भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 में ऊर्जा के क्षेत्र में भारत एक बड़े वैश्विक मंच के तौर पर सामने आया। 4 दिन तक चलने वाली इस अंतरराष्ट्रीय समिट में 500 से अधिक कंपनियों, 1 हजार से अधिक प्रतिनिधियों, 300 से अधिक ऊर्जा विशेषज्ञों सहित दुनियाभर के 80 से अधिक देशों ने हिस्सा लिया। भारत इलेक्ट्रिक समिट 2026 की खास बात यह रही कि विशेषज्ञों व्दारा भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में हो रही प्रगति की मुक्तकंठ से प्रशंसा की गई। ऊर्जा के क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों, तकनीकी, उत्पादन, पारेषण, भंडारण और नवीनतम नवाचार पर 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय परिचर्चाओं का आयोजन कर अनेक नई प्रौद्योगिकी को भी उपयोगी बताया गया।
ऊर्जा शिखर सम्मेलन में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि भारत ऊर्जा के क्षेत्र में नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। सरकार की लचीली नीतियों के कारण देश में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में दुनियाभर से निवेशक आ रहे है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ऊर्जा के क्षेत्र में स्वच्छ एवं संक्रमण रहित लक्ष्यों को लेकर आगे बढ़ रहा है। भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 में अनेक राज्य सरकारों के संस्थानों, निजी संगठनों, निवेशकों, स्टार्टअप, तकनीकी समाधानकर्ताओं, नई प्रौद्योगिकी, विशेषज्ञों सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय सीईओ ने अपने विचारों को सांझा किया। ऊर्जा शिखर सम्मेलन में अनेक राज्यों के पवेलियन ने आत्मनिर्भरता, हरित ऊर्जा उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा के साधनों के साथ हिस्सा लिया।
भारत सरकार 2047 तक देश में ऊर्जा का ऐसा ढांचा विकसित करने पर ध्यान केंद्रीत कर रही है जिसमें टिकाऊ स्मार्ट ग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार, स्वच्छ एवं हरित वातावरण एवं ऊर्जा के सेक्टर में अधिक से अधिक डिजिटाइजेशन पर फोकस जैसे लक्ष्यों को पूरा किया जा रहा है। भारत सरकार ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक दूरदर्शी दृष्टिकोण को अपना रही है। सरकार 2030 तक देश में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत को 2000 किलोवाट घंटे तक बढाने की दिशा में काम कर रही है। यह लक्ष्य 2027 तक 4000 किलोवाट प्रति घंटे तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार का जोर 2070 तक ऊर्जा के क्षेत्र में शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करना है।
भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 के आयोजन से सरकार ने मेक-इन-इंडिया के मार्फत ऊर्जा के क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकी के ज्यादा से ज्यादा प्रयोग पर भी जोर दिया। समिट में शामिल विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में जिस तरह से ऊर्जा सेक्टर का नियोजित विस्तार हो रहा है उससे साल 2032 तक 50 लाख करोड़ से अधिक का निवेश होने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन में शोध संस्थानों, निवेशकों, कंपनियों, खरीददारों, विक्रेताओं, तकनीकी कौशल प्रदर्शकों और नवाचार के सतत विकास के लिए पहली बार एक बड़ा वैश्विक मंच विकसित किया गया। सरकार का कहना हैं कि ऊर्जा के क्षेत्र में यह सम्मेलन भारत की मजबूत भूमिका को आगे बढ़ाने वाला साबित होगा।




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