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कलिंगा विश्वविद्यालय “फार्मास्यूटिकल एवं संबद्ध विज्ञानों के अग्रिम क्षेत्र: सतत एवं समान स्वास्थ्य सेवा के लिए नवाचार को प्रभाव में बदलना”

Anil Choubey 20-03-2026 18:46:34


विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

रायपुर 20 मार्च 2026,  //// कलिंगा विश्वविद्यालय के फार्मेसी संकाय द्वारा 17 एवं 18 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ के नया रायपुर स्थित विश्वविद्यालय परिसर में “फार्मास्यूटिकल एवं संबद्ध विज्ञानों के अग्रिम क्षेत्र: सतत एवं समान स्वास्थ्य सेवा के लिए नवाचार को प्रभाव में बदलना” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।

इस सम्मेलन का आयोजन कलिंगा विश्वविद्यालय के फार्मेसी संकाय द्वारा, यूनिवर्सिटी ऑफ रुहूना के मेडिसिन संकाय के अंतर्गत नेचुरल प्रोडक्ट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर (NPRDC) के सहयोग से, डॉ. संदीप प्रसाद तिवारी एवं डॉ. अशोक कुमार के मार्गदर्शन में किया गया।

यह आयोजन विश्वविद्यालय नेतृत्व के निरंतर सहयोग एवं प्रोत्साहन से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें डॉ. आर. श्रीधर- कुलपति, डॉ. बायजू जॉन- महानिदेशक, डॉ. राहुल मिश्रा- अधिष्ठाता अकादमिक मामलें एवं परीक्षा नियंत्रक, डॉ. विजयलक्ष्मी बिरादर- निदेशक, IQAC, श्री पंकज तिवारी- निदेशक, CCRC तथा डॉ. लिंसी रॉय- उप कुलसचिव एवं मानव संसाधन प्रमुख का विशेष योगदान रहा।

अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि श्री बी. आर. साहू, अतिरिक्त औषधि नियंत्रक एवं नियामक अधिकारी, राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन, नया रायपुर द्वारा, कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति और कुलसचिव के साथ, पारंपरिक दीप प्रज्वलन करके किया गया। अपने उद्घाटन भाषण में मुख्य अतिथि ने औषधि विज्ञान को सुदृढ़ करने तथा सुरक्षित और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए अनुसंधान, नवाचार और नियामक उत्कृष्टता के महत्व पर बल दिया।

विशिष्ट अतिथि प्रो. (डॉ.) मंजू सिंह, इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मेसी, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर ने एआई-आधारित प्रिसिजन मेडिसिन, जीन थेरेपी, लैब-ऑन-चिप तकनीक और स्मार्ट ड्रग डिलीवरी सिस्टम जैसे उभरते रुझानों पर प्रकाश डाला तथा रोगी देखभाल में सुधार और वैश्विक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में उनकी भूमिका पर जोर दिया। कुलपति डॉ. आर. श्रीधर ने औषधि विज्ञान के अतीत, वर्तमान और भविष्य के दृष्टिकोण पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए, नवाचार और अनुसंधान-आधारित विकास को प्रोत्साहित किया। सम्मेलन की कार्यवाही का भी उद्घाटन सत्र के दौरान औपचारिक रूप से अनावरण किया गया।

 

सम्मेलन को आयोजन समिति और संकाय सदस्यों के समर्पित प्रयासों के माध्यम से सावधानीपूर्वक आयोजित किया गया।

यह प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन दुनियाभर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग पेशेवरों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और छात्रों को एकत्रित कर औषधि और संबद्ध विज्ञान में हाल की प्रगति, चुनौतियों और नवाचारों पर चर्चा करने का मंच प्रदान करता है। सम्मेलन ने ज्ञान के आदान-प्रदान, शोध प्रस्तुति, नेटवर्किंग और शैक्षणिक सहयोग के लिए एक गतिशील मंच प्रदान किया, जिसमें वैज्ञानिक नवाचारों को टिकाऊ, सुलभ और समान स्वास्थ्य सेवाओं में रूपांतरित करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

सम्मेलन की मुख्य विशेषताएँ –

सम्मेलन के पहले दिन में शिक्षाविदों और उद्योग के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों द्वारा मुख्य व्याख्यान और वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए। इनमें शामिल थे: डॉ. निशा झा, प्रोफेसर, विभाग ऑफ क्लिनिकल फार्माकोलॉजी एंड थेरेप्यूटिक्स, KIST मेडिकल कॉलेज, नेपाल; प्रो. अनोजा अत्तानायके, प्रमुख, नेचुरल प्रोडक्ट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर, यूनिवर्सिटी ऑफ रुहुना; डॉ. विनोद तिवारी, सहायक प्रोफेसर, विभाग ऑफ फार्मास्यूटिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, IIT (BHU), वाराणसी; और प्रो. (डॉ.) अलख निरंजन साहू, प्रोफेसर, विभाग ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज, IIT (BHU), वाराणसी, जिन्होंने क्लिनिकल फार्माकोलॉजी, प्राकृतिक उत्पाद अनुसंधान और फार्मास्यूटिकल तकनीकों में उभरते रुझानों पर अपने विचार साझा किए।

डॉ. सोनिया गेरा, इंपीरियल कॉलेज लंदन, यूके, ने "बोन थेरेप्यूटिक्स के लिए नैनोटेक्नोलॉजी" पर एक ज्ञानवर्धक सत्र प्रस्तुत किया, जिसमें हड्डी संबंधी रोगों में उन्नत उपचारात्मक दृष्टिकोणों को उजागर किया गया। दोपहर के भोजन के बाद सत्र में डॉ. अंशुमान दीक्षित द्वारा "फार्मास्यूटिकल रिसर्च में बायोइन्फॉर्मेटिक्स" पर ऑनलाइन प्रस्तुति शामिल थी, जिसमें आधुनिक दवा अनुसंधान और विकास में कम्प्यूटेशनल टूल्स और डेटा-आधारित दृष्टिकोण की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया गया।

दूसरे दिन की शुरुआत उत्कृष्ट वक्ताओं द्वारा प्रस्तुत तकनीकी सत्रों की श्रृंखला के साथ हुई। प्रो

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