बड़ी प्रसिद्ध कहावत से गुरु गोविंद दोनों खड़े किसको पहले प्रमाण करूं बलिहारी गुरु आपकी गोविंद दियो बताएं अर्थ यह है कि बिना गुरु के ज्ञान अधूरा है गुरु ने बताया है कि यह गोविंद है नहीं तो हम नहीं जानते थे की गोविंद कोन हें इसलिए गुरु सर्वश्रेष्ठ हें आज इस युग की विडंबना यह है इस पृथ्वी पर गुरु तो है ही नहीं जो भी थोड़े बहुत गुरु हैं वह कहीं ना कहीं गुरु की श्रेणी को प्राप्त करने की पात्रता नहीं रखते जन्म लेते ही सबसे पहले माँ ही गुरु माता होती है फिर पिता उसकी सहायक गुरु होता है फिर स्कूल में गुरु होता है गुरुकुल का गुरु होता है फिर जीवन दर्शन के लिए गुरु की आवश्यकता होती मन भटकता रहता है पर गुरु नहीं मिलता इस युग में गुरु की बहुत कमी सभी गुरु अपने शिष्यों को वह ज्ञान नहीं दे पा रहे जिससे शिष्य उन्हें सही में गुरु माने और उसकी आत्मा शांति हो
गुरु शिष्य की परंपरा टेलीपैथी से जुड़ा हुआ एक सत्य है सच्चा गुरु अपने शिष्य से हर पल जुड़ा रहता है और उसे पर आने वाले अनिष्ट को या तो नष्ट करता है या अपने ऊपर ले लेता है वह हर स्थिति में शिष्य की रक्षा करता है यह वैज्ञानिक पद्धति है मां को भी अपने बच्चों को लेकर ट्यूशंस होते रहते हैं बच्चों को अगर तकलीफ होती है तो माँ को पता चल जाता है इस तरह गुरु को भी इसी पद्धति से शिष्य की परेशानी का पता लग जाता है यह एक टेलीपैथी प्रक्रिया है जो निरंतर मां अपने बच्चों के साथ गुरु अपने शिष्य के साथ उसको जोड़ रहती है इससे संपर्क बना रहता है और उन्हें शिष्य और अपने बच्चों के बारे में जानकारी मिलती रहती है
वह बात अलग है कि आज के गुरु और आज की माताएं इस का अनुभव न कर पाती हों लेकिन यह सत्य है आजमाया हुआ है टेलीपैथी गुरु परंपरा और माता परंपरा का एक बहुत बड़ा भरोसे का हिस्सा है
शास्त्रों में लिखा है कि जब आपकी आत्मा किसी गुरु को स्वीकार न करें परम गुरु परमात्मा शिव को अपना गुरु बना लीजिए वह भी उसी प्रकार आपकी रक्षा करेंगे जिस प्रकार पृथ्वी पर रहने वाले जीवित गुरु करते थे
जो सबसे बेस्ट है परम परम गुरु को गुरु बना लो उनकी शरण में चले जाओ उनके शिष्य बन जाओ ओम शिव गुरु नमो नमः
1. आंखें बंद करके आराम से बैठ जायें.
भगवान शिव से कहें हे शिव मै आप को अपना गुरु बनने का आग्रह कर रहा हूं. आप मुझे शिष्य के रूप में स्वीकार करें !
2. दोनों ऊपर हाथ उठाकर ब्रह्मांड की तरफ देखते हुए 3 बार घोषणा करें. कहें- अखिल अंतरीक्ष सम्राज्य में मै घोषणा करता हूं कि शिव मेरे गुरु हैं मै उनका शिष्य हूं. शिव मेरे गुरु हैं मै उनका शिष्य हूं. शिव मेरे गुरु हैं मै उनका शिष्य हूँ !
तथास्तु. घोषणा दर्ज हो. हर हर महादेव.इससे भगवान शिव अपनी ही तय शास्त्रीय व्यवस्था के मुताबिक आग्रह करने वाले को शिष्य के रूप में स्वीकार कर लेते हैं. इसी कारण उसी दिन से जीवन बदलने लगता है !
3. शिव गुरु को साक्षी बनाकर शुरु किये कार्यों में रुकावटें नही आतीं. इसलिये जो भी काम करें उसके लिये भगवान शिव को पहले साक्षी बना लें. कहें- हे शिव आप मेरे गुरु हैं मै आपका शिष्य हूं आपको साक्षी बनाकर ये कार्य करने जा रहा हूं. इसकी सफलता के लिये मुझे दैवीय सहायता और सुरक्षा प्रदान करें !
4. हर रोज शिव गुरु से कम से कम तीन बार कहें- हे शिव आप मेरे गुरु हैं मै आपका शिष्य हूं. मुझ शिष्य पर दया करें. हे शिव आप मेरे गुरु हैं मै आपका शिष्य हूं. मुझ शिष्य पर दया करें. हे शिव आप मेरे गुरु हैं मै आपका शिष्य हूं. मुझ शिष्य पर दया करें !
5. हर रोज शिव गुरु को नमन करें. इसके लिये शांत मन से कुछ मिनटों तक जपें - नमः शिवाय गुरुवे !
6. भगवान शिव को राम नाम सबसे अधिक प्रिय है. वे खुद भी सदैव इसका ध्यान करते रहते हैं. इसलिये उन्हें गुरु दक्षिणा के रूप में उनकी सबसे प्रिय चीज राम राम ही अर्पित करें !
इसके लिए रोज नमन करने के बाद शिव गुरु से निवेदन करें. कहें - मै आपको गुरु दक्षिणा के रूप में राम नाम सुना रहा हूं. आप मेरे मन के मंदिर में आकर बैठ जायें और राम राम सुने. और स्वीकार करें !
मुझे सदैव दैवीय सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करें !




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