.jpg)
नरेन्द्र कुमार वर्मा
, ब्यूरोचीफ, नई दिल्ली
नई दिल्ली 19/02/2026/// निश्चित तौर पर यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रणनीति थी कि वह किसी भी परिस्थिति में अमेरिका के सामने नहीं झुके। भारत सरकार ने जनवरी में यूरोपियन यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया तो ट्रंप समझ गए कि भारत के खिलाफ लगाए गए टैरिफ से उनके हाथ कुछ नहीं लगने वाला। यूरोपीय काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन साथ अंतरराष्ट्रीय जगत में छपी तस्वीरों को देखकर ट्रंप समझ गए कि उनके बाजार के लिए भारत का यह कदम घातक साबिक होगा। इस डील से टेक्सटाइल, परिधान और कपड़ों पर पहले दिन से ही शून्य कर लागू होगा। एफटीए से 263.5 अरब डॉलर के यूरोपीय संघ के टेक्सटाइल बाज़ार तक पहुंच खुलेगी। इस मदर डील से भारत के कारीगरों, महिलाओं, बुनकरों और एमएसएमई क्लस्टरों के लिए बड़े पैमाने पर रोज़गार के मौके बनेंगे। भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुई मदर डील से करीब 200 करोड़ लोगों का एक बड़ा बाजार खड़ा होगा। विशेषज्ञों का कहना हैं कि संयुक्त बाजार 2091.6 लाख करोड़ रुपये (24 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर) से अधिक है। इस डील से भविष्य में ट्रेड की नयी संभावनाओं को बल मिलेगा। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (India-EU Free Trade Agreement) से भारत ने यूरोपीय बाजारों तक अपनी रणनीतिक पहुंच हासिल कर ली है। समझौते के बाद लगभग 33 बिलियन अमरीकी डालर के निर्यात पर टैरिफ को 10 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है। इस समझौते के बाद 99 प्रतिशत से अधिक भारतीय निर्यात को यूरोपीय संघ में प्राथमिकता से प्रवेश संभव होगा। साथ ही बड़े पैमाने पर निर्यात और विकास की संभावना बढ़ेगी। भारत से अब 6.41 लाख करोड़ रुपये (75बिलियन अमरीकी डालर) का निर्यात शुरु करने की तैयारी भी की जा रही है।
अमेरिकी सरकार के विशेषज्ञों की सलाह के बाद ट्रंप ने भारत पर लगाए गए टैरिफ की दर को 50% से घटाकर 18% किया है और भारत के साथ ट्रेड पर आखिर मोहर लगा दी। इस ट्रेड डील में भारत को एक बड़ी राहत मिली है साथ ही रूस से तेल इम्पोर्ट के कारण पेनल्टी के रूप में लगाए गए 25% टैरिफ को भी अमेरिका ने वापस ले लिया है। नए एग्रीमेंट के अनुसार अमेरिकी सरकार भारतीय निर्यातकों से वसूले गए पैसों को अब वापस करेगी। अमेरिका से करीब 40 हजार करोड़ रुपये की वापसी भारत में हो सकती है। ट्रंप प्रशासन पहले इस रकम को अमेरिकी आयातकों को देगा उसके उपरांत भारतीय निर्यातकों से बातचीत करके तय होगा कि उन्हें कितनी रकम वापस मिलेगी। अनुमान लगाया जा रहा हैं कि भारतीय निर्यातकों को करीब 40 हजार करोड़ रुपये रिफंड के तौर पर मिलेंगे। भारत सरकार से खासे नाराज होने वाले अमेरिकी राष्ट्रतपति डोनाल्डु ट्रंप मोदी सरकार पर कोई दवाब नहीं डाल पाए। आखिरकार उन्हें रूस से तेल खरीदने पर लगाए गए 25 फीसदी पेनाल्टीए को खत्मं करना पड़ा। राष्ट्र्पति ट्रंप ने पिछले साल 27 अगस्तव को भारत पर 25 फीसदी की पेनाल्टी लगाई थी दरअसल ट्रंप प्रशासन इस बात को अच्छी तरह से समझता हैं कि भारत के साथ अपनी ट्रेड साझेदारी को मजबूत करने से उसका बड़ा लाभ है।
अमेरिका के साथ हुए ऐतिहासिक समझौते से भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति और नई ऊंचाइयां मिलेंगी। माना जा रहा है कि यह डील भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ उसे नई दिशा प्रदान करेगी। साथ ही यह समझौता पूरी दुनिया के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि भारत की नीति कमिटमेंट की है वह अपने लोगों के हितों से कोई भी कॉम्प्रोमाइज नहीं करता। वर्तमान समय में भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर संतुलित और सकारात्मक रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। मोदी सरकार की संतुलित रणनीति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक संवाद वैश्विक स्तर पर भारत की आवाज मजबूत हुई है।
विशेषज्ञों की माने तो भारत-अमेरिका ट्रेड डील में कृषि और कृषि उत्पादों के मामले में भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। मोदी सरकार ने ऐसी व्यवस्था की हैं कि इस समझौते में ऐसा कोई भी उत्पाद शामिल नहीं है जिससे किसानों को नुकसान होगा। भारत सरकार ने पूर्व में ही सभी संवेदनशील वस्तुओं को समझौते के बाहर रखा गया है। सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मोटे अनाज, पोल्ट्री, डेयरी, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, काबुली चना, मूंग, तिलहन, इथेनॉल और तंबाकू जैसे उत्पादों पर किसी भी तरह की टैरिफ छूट नहीं दी गई है। सबसे बड़ी चिंता देश के प्रमुख अनाजों को लेकर हो रही थी। सरकार का कहना हैं कि प्रमुख अनाज पूरी तरह सुरक्षित रखे गए हैं। सरकार ने प्रमुख अनाजों, प्रमुख फलों और डेयरी उत्पादों के लिए अमेरिका के लिए कोई रास्ता नहीं खोला है। इस बात का भी कोई खतरा नहीं हैं कि अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में प्रवेश करके किसानों के समक्ष संकट खड़ा कर देंगे। डील के मुताबिक छिलका रहित अनाज, आटा, गेहूं, मक्का, चावल, बाजरा, आलू, प्याज, मटर, बीन्स, खीरा, मशरूम, दलहनी उत्पाद, फ्रोजन सब्जियां, संतरे, अंगूर, नींबू, स्ट्रॉबेरी और मिक्स्ड डिब्बाबंद सब्जियां भारत नहीं आएंगी। डेयरी उत्पादों को लेकर देश में जो शंका थी उसका भी पूरी तरह से निराकरण कर दिया गया हैं डेयरी उत्पादों में लिक्विड मिल्क, पाउडर, क्रीम, योगर्ट, बटर मिल्क, मक्खन, घी, बटर ऑयल, पनीर और चीज़, इनमें से किसी भी प्रोडक्ट को भारत में एंट्री नहीं मिलेगी। इसके साथ ही कृषि और डेयरी के अलावा भारत, अमेरिका से काली मिर्च, लौंग, सूखी हरी मिर्च, दालचीनी, धनिया, जीरा, हींग, अदरक, हल्दी, अजवाइन, मेथी, केसिया, सरसों, राई, भूसी और अन्य पाउडर मसाले भी नहीं मंगवाएगा। मतलब साफ है हमारा मसाला उद्योग और मसालों की खेती में लगे हमारे किसान पूरी तरह सुरक्षित हैं।
इंडिया अमेरिका डील से भारतीय किसानों, महिलाओं और खासकर युवा वर्ग को आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे। इस डील के बाद टेक्सटाइल में अब प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में हमारा टैरिफ काफी कम होकर करीब 18 प्रतिशत रह गया है। इससे टेक्सटाइल निर्यात को नई गति और नई दिशा मिलेगी। टेक्सटाइल निर्यात का सीधा लाभ देश के किसानों को भी मिलेगा। खासकर कपास उत्पादक किसानों को इसका बड़ा लाभ मिलेगा। भारत में जेम्स एंड ज्वेलरी, ऑटो कंपोनेंट, इंजीनियरिंग गुड्स और एमएसएमई सेक्टर के लिए भी बहुत सारे नए व्यापारिक अवसर पैदा होंगे। इस ट्रेड डील से भारत के क्राफ्ट हुनर को वैश्विक पहचान मिलेगी। साथ ही समझौते का फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ किसानों, मजदूरों, गरीबों, निर्यातकों और निर्माताओं को भी मिलेगा।




Copyright @ 2020 All Right Reserved | Powred by Divyadoot
Comments