नई दिल्ली //// देश की महत्वपूर्ण योजना chandrayaan-2 चंद्रमा से सिर 2 किलोमीटर दूर रहकर पृथ्वी से उसका संपर्क टूट गया उसके बाद से अभी तक किसी तरीके की सूचना नहीं मिली वाकिया शुक्रवार की की रात करीब 2:00 बजे के आसपास का था जब इसरो के वैज्ञानिकों के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी थी तभी यह संकेत मिल रहे थे की यान ने हमारा साथ छोड़ दिया है सफलता असफलता के बीच का यह समय काफी टेंशन भरा था प्रधानमंत्री मोदी इसरो के कमांड रूम में ही थे सारे वैज्ञानिक एक दूसरे से बात कर ही रहे थे कि यह एनाउंस हुआ की 2.2 किलोमीटर के पहले के सारे डाटा रिकॉर्डर अध्ययन किया जाए इस घोषणा के साथ ही यह अनुमानलव गया था की लैंड रोवर अब हमारे संपर्क में नहीं है
शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री फिर से इसरो
अनुसंधान केंद्र आए और उन्होंने वैज्ञानिकों
की हौसला अफजाई करते हुए कहा की
लैंड रोवर इतनी जल्दी में था चंद्रमा से मिलने के लिए कि उसने हमारा साथ
छोड़ कर लैंड रोवर ने चंद्रमा को गले लगा लिया बड़े ही भावनात्मक ढंग से
प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों कामनोबल बढ़ायाकहासफलता सफलता से कोई लेना देना नहीं
शोध हमेशा कुछ देकर ही जाता है इसलिए चिंता ना करें 130 करोड़ देशवासी आपके इस प्रयास
की सराहना करते हैं और वह सब आपके साथ कल भी थे आज भी हैआगे बढ़े अगला कदम जल्दी
यह बढ़ाएं यह हमारी शुभकामनाएं हैं आपको इस भावुक क्षण में उन्होंने मिशन के चीफ
कमांडेंट को गले लगाया उसके आंसू पूछें और मुंबई
के लिए प्रस्थान कर गए आज मुंबई में
मेट्रो रेल का उद्घाटन करेंगे
वास्तव मेंवैज्ञानिक
शोधके कार्य मेंसफलता असफलता शब्द उनकी डिक्शनरी में नहीं होता शोध हमेशा कुछ ना
कुछ देकर जाता हैआज हम चंद्रयान की सतह पर पहुंचने में कामयाब तो हो गए हैंलेकिन
वहां से मिलने वाली महत्वपूर्ण जानकारी जो हमको लैंड रोवर देता वह नहीं ले पाए यह
मिशन पूर्णता सफल रहा है इसमें असफलता की बात है ही नहीं इसलिए अगले मिशन की
तैयारी अब बहुत ही जरूरी हो जाती है इस घटना के दुखद क्षणों पर मलहम लगाने के लिए




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