हैदराबाद, 6 फरवरी 2026/// भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक एनएमडीसी लिमिटेड ने रोजगार-उन्मुख कौशल प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर 100% प्लेसमेंट प्राप्त करने वाले बस्तर प्रभाग के 80 युवाओं के पहले बैच का स्वागत किया। यह छत्तीसगढ़ के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और कौशल विकास, समावेशी विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए एनएमडीसी की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।
यह कार्यक्रम एनएमडीसी के सीएसआर प्रयासों के हिस्से के रूप में केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईपीईटी) के सहयोग से लागू की गईकौशल विकास पहल के तहतकिया गया था। इस पहल का उद्देश्य बस्तर के बेरोजगार और वंचित आदिवासी युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक कौशल से लैस करके स्थायी आजीविका में सक्षम बनाकर सशक्त करना है।
यह सम्मान समारोह और चर्चा सत्र एनएमडीसी के वरिष्ठ नेतृत्व की उपस्थिति में आयोजित किया गया जिसमें श्री अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, श्री विनय कुमार, निदेशक (तकनीकी) और निदेशक (वाणिज्यिक, अतिरिक्त प्रभार), श्री जॉयदीप दासगुप्ता, निदेशक (उत्पादन) और निदेशक (कार्मिक, अतिरिक्त प्रभार), श्री पी.श्याम, महाप्रबंधक (सीएसआर) और श्री बी. रवि, प्रधान निदेशक, सीआईपीईटी, एनएमडीसी और सीआईपीईटी के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।
छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों और साधारण परिवारों (दंतेवाड़ा, बस्तर, सुकमा, नारायणपुर, कोंडागांव और बीजापुर सहित) से आए छात्रों ने वहां के जीवन के बारे में बात की, जहां अवसर सीमित थे और विकल्प कम थे। उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल रोजगार प्रदान करता है, बल्कि अपने गृहनगर से बाहर निकलकर अपनी शर्तों पर आय अर्जित करने का आत्मविश्वास भी प्रदान करता है।
बस्तर से आए कक्षा 12 उत्तीर्ण युवक सुखराम ने बताया कि किस प्रकार उनका बचपन शुरुआत में हुए नुकसान और सीमित साधनों में बीता था। उन्होंने कहा कि नौकरी मिलने से उनके परिवार के जीवन की दिशा बदल जाएगी। उन्होंने कहा, "मुझे कभी नहीं पता था कि मैं अपना गृहनगर कैसे छोड़ूंगा। आज, मैं नौकरी करने और कमाने जा रहा हूं।“
इस अवसर पर बोलते हुए, एनएमडीसी के अध्यक्ष श्री अमिताभ मुखर्जी ने कहा कि बस्तर के युवाओं को औपचारिक रोजगार में कदम रखते देखना इस यह दर्शाता है कि अवसर क्या कर सकता है। उन्होंने कहा कि 80 प्रशिक्षुओं में से अनेक इस क्षण तक पहुंचने के लिए लगन और आत्मविश्वास दोनों के साथ लंबी यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ नौकरियों के बारे में नहीं है। यह युवा लोगों के बारे में है जो महसूस करते हैं कि वे कार्यबल और देश की विकास यात्रा में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षण इस बात की पुष्टि करते हैं कि आत्मनिर्भर बस्तर और अधिक समावेशी विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं को कुशल बनाना केंद्रबिंदु में क्यों है।“
श्री विनय कुमार,निदेशक (तकनीकी) और निदेशक (वाणिज्यिक, अतिरिक्त प्रभार) ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में हुआ परिवर्तन स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि एनएमडीसी अपनी स्थापना के बाद से ही इस परिवर्तन यात्रा का एक अभिन्न अंग रहा है।उन्होंने छात्रों को उनकी पेशेवर करियर की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं।
श्री जयदीप दासगुप्ता,निदेशक (उत्पादन) और निदेशक (कार्मिक, अतिरिक्त प्रभार) ने प्लेसमेंट को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताते हुए इसे छात्रों के जीवन में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने छात्रों को निरंतर सीखने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हुए भविष्य में उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम के तहतपात्रता को समावेशी रखा गया था, जिसमें न्यूनतम योग्यता कक्षा 8 थीऔर यह सुनिश्चित किया गया कि स्कूल छोड़ देने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवा कौशल पारिस्थितिकी तंत्र से बाहर नहीं रहने पाएं। पहले बैच में 80 प्रायोजित छात्र शामिल थे, जिनमें से सभी को अब सफलतापूर्वक नियोजित कर दिया गया है। यहकार्यक्रम की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
एनएमडीसी-सीआईपीईटी कौशल विकास कार्यक्रम के बारे में:
अपने सीएसआर कार्यक्रम के तहत, एनएमडीसी ने दंतेवाड़ा और बस्तर जिलों के 500 युवाओं को निशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीआईपीईटी) के साथ भागीदारी की है। एनएमडीसी द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित, यह पहल प्रतिभागियों को विभिन्न योग्यता स्तरों पर उद्योग-प्रासंगिक कौशल के साथ सुसज्जित करती है, जिसमें ऑपरेटर-स्तर (अल्पकालिक) पाठ्यक्रम से लेकर प्लास्टिक प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा और स्नातकोत्तर डिप्लोमा कार्यक्रम शामिल हैं, जिसका उद्देश्य रोजगार क्षमता को बढ़ाना और स्थानीय कार्यबल को मजबूत करना है।




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