दिव्य-दूत

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"ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।"

AVINASH CHOUBEY 22-09-2025 10:32:30


सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते।

**** दिव्य दूत  परिवार की ओर से नवरात्रि की ढेर सारी शुभकामनाएं माता से प्रार्थना है की सभी संकटों का  हरण करें ****

महिषासुर वध की कहानी में, शक्तिशाली महिषासुर दैत्यों और देवताओं के बीच हुए युद्ध में देवताओं के विरुद्ध प्राप्त करता है और स्वर्ग पर भी अधिकार कर लेता है। देवता, अपनी हार के बाद, परम शक्ति भगवती दुर्गा के रूप में प्रकट हुईं और नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया। दसवें दिन, देवी ने महिषासुर का वध किया, जिससे उनकी महिमा "महिषासुरमर्दिनी" कहलाई और नवरात्रि पर्व मनाया जाने लगा।  

महिषासुर कौन था

महिषासुर एक शक्तिशाली असुर था। ब्रह्मा जी ने उसे वरदान दिया था कि कोई भी मनुष्य या देवता उसे मार नहीं सकता, जिसके कारण वह देवलोक पर आक्रमण कर देवताओं को पराजित कर देता था और स्वर्ग पर राज करने लगता था। 

युद्ध की शुरुआत

  1. देवताओं की सहायता का प्रयास: 

जब महिषासुर ने स्वर्ग पर कब्जा कर लिया, तो त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास सहायता के लिए पहुंचे। 

  1. भगवती दुर्गा का जन्म: 

सभी देवताओं के शरीर से एक दिव्य प्रकाश निकला, जिससे महाशक्ति भगवती दुर्गा का रूप धारण हुआ। 

  1. अस्त्र-शस्त्रों का समर्पण: 

देवताओं ने देवी को अपने-अपने शक्तिशाली अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए, जिनमें सिंह भी शामिल था, और युद्ध के लिए तैयार हो गए।

युद्ध और वध

  1. नौ दिन का महायुद्ध: 

देवी दुर्गा ने हिमालय पर पहुंचकर महिषासुर से युद्ध किया। यह युद्ध पूरे नौ दिनों तक चला। 

  1. शक्तियों का प्रदर्शन: 

महिषासुर ने अनेक मायावी रूप धारण किए, जैसे भैंस, शेर, और हाथी, लेकिन हर बार देवी दुर्गा ने उसे परास्त किया। 

  1. अंतिम वध: 

दसवें दिन, देवी ने अपने त्रिशूल से महिषासुर का वध कर दिया।

महत्व

  • नवरात्रि और विजयादशमी: 

देवी दुर्गा और महिषासुर का यह युद्ध ही नवरात्रि के नौ दिनों का आधार है। दसवें दिन, विजयदशमी के रूप में, महिषासुर पर देवी की जीत का उत्सव मनाया जाता है। 

  • महिषासुरमर्दिनी नाम: 

चूंकि देवी ने महिषासुर का वध किया, इसलिए उन्हें "महिषासुरमर्दिनी" भी कहा जाता है। 

  • नैतिक अर्थ: 

यह कथा आंतरिक शक्ति की विजय और नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय का प्रतीक भी है। 

महिषासुर राक्षस की कहानी क्या है

महिषासुर राक्षस का जन्म रंभा और एक भैंस (महिषी) के संयोग से हुआ था और वह आधा मनुष्य और आधा भैंसा था। अग्निदेव से प्राप्त वरदान के कारण, जिसके अनुसार उसे केवल स्त्री ही मार सकती थी, यह महाबली राक्षस और भी शक्तिशाली हो गया था। उसने स्वर्ग से सभी देवताओं को भगाकर वहाँ उत्पात मचाना शुरू कर दिया।

 

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