दिव्य-दूत

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हे नाथ, जब कलियुग आएगा, तब मनुष्य धर्म और मोक्ष कैसे प्राप्त करेगा?”

Administrator 20-11-2025 21:13:41


कलयुग में मोक्ष का मार्ग क्या होगा? – जब पार्वतीजी ने शिव से पूछा यह गूढ़ प्रश्न

“हे नाथ, जब कलियुग आएगा, तब मनुष्य धर्म और मोक्ष कैसे प्राप्त करेगा?”

यह प्रश्न पार्वतीजी ने भगवान शिव से किया। और भगवान शिव ने जो उत्तर दिया, वही आगे चलकर तंत्र के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

शिवजी ने कहा:

"योगिनी तंत्र" में वर्णन है कि कलयुग में वैदिक मंत्र ऐसे हो जाएंगे जैसे विषहीन सर्प – शक्तिहीन, प्रभावहीन।

शिव का कथन था:

"कलियुग में लोग शुद्ध और अशुद्ध का भेद नहीं समझेंगे। वे वैदिक नियमों की अवहेलना करेंगे। ऐसे में नियमों और शुद्धता से रहित वेद-मंत्रों का उच्चारण एक खोखली परंपरा बन जाएगा – जैसे कोई व्यक्ति गंगा के तट पर खड़ा हो, पर कुआँ खोदकर प्यास बुझाना चाहे।"

शिवजी ने यह स्पष्ट किया कि वैदिक मंत्रों की पूर्ण शक्ति सतयुग, त्रेता और द्वापर युग में ही साकार होती है। लेकिन कलियुग में वैसी प्रभावशाली साधना कठिन हो जाएगी, क्योंकि –

आचरण की शुद्धता नहीं रहेगी,

मन और वचन में मेल नहीं होगा,

और धर्म केवल बाह्य रूप तक सीमित हो जाएगा।

तब पार्वतीजी ने पुनः पूछा:

“तो कलियुग में मनुष्य अपने पापों का नाश कैसे करेगा? पूजा का फल कैसे पाएगा?”

शिवजी ने उत्तर दिया:

“कलयुग में तंत्र-साधना ही वही फल देगी, जो सतयुग में वैदिक पूजा देती थी।”

तंत्र का मार्ग वैकल्पिक नहीं, वैकल्पिक विज्ञान है – जहाँ साधक बंधनों से मुक्त होकर प्रयोग करता है, अनुभव करता है, और अपने आंतरिक सामर्थ्य से ईश्वर को प्राप्त करता है।

तंत्र-साधना के तीन मुख्य स्तंभ हैं:

  1. मंत्र – ध्वनि की शक्ति से चेतना का जागरण,
  2. तंत्र – विधियों और प्रयोगों का विज्ञान,
  3. यंत्र – ब्रह्मांडीय ऊर्जा को स्थिर करने का माध्यम।

परंतु शिवजी ने यह चेतावनी भी दी:

“तंत्र में प्रवेश वही करे जिसके भीतर ईश्वर को पाने का पागलपन हो, जिसने संसार को एक प्रयोगशाला मान लिया हो, और जो साधना में पूर्ण समर्पण कर सके।”

कलियुग में तंत्र कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि आत्मा और ब्रह्म के मिलन का व्यावहारिक विज्ञान है। इसमें न तो बाह्य आडंबर की आवश्यकता है, न ही सामाजिक मान्यता की। केवल साधना, एकनिष्ठता और प्रयोग की भावना चाहिए।

शिव का सन्देश स्पष्ट था – कलियुग में जो सत्य की खोज करेगा, वह नियमों से नहीं, अनुभव से ईश्वर को प्राप्त करेगा।

"तंत्र कोई रहस्य नहीं, वह रहस्य को खोलने की कुंजी है।"

ॐ नमः शिवाय।

 

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