दिव्य-दूत

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छत्तीसगढ़ के पारम्परिक त्योहार को साकार कर रहे है मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी-विकास उपाध्याय

Anil Choubey 31-08-2019 14:46:46


रायपुर//// छत्तीसगढ़ का पारंपरिक त्योहार पोला जो पिछली सरकार में लगभग विलुप्त हो गया था आज छत्तीसगढ़ राज्य को बने 19 साल हो गया इस 19 साल में पहली बार छत्तीसगढ़ की पारंपरिक त्यौहार को जीवित रखने का काम किसी ने किया है तो वह है छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री माननीय श्री भूपेश बघेल की सरकार ने जिन्होंने इससे पहले हरियाली का त्यौहार भी अपने निवास स्थान से मनाया था और आज पोला का त्यौहार भी यहीं से मना कर बचपन की यादें लौटा दी आज सुबह से मुख्यमंत्री निवास के बाहर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक त्यौहार नंदी बेला की पूजा कर स्कूल के बच्चों के साथ मनाया पोला का त्यौहार पोला का त्यौहार सुबह 7:00 बजे से लगातार अलग-अलग जगह पर मनाया गया इसके पश्चात पश्चिम के विधायक विकास उपाध्याय ने अपने निवास स्थान में पारंपरिक रूप से संस्कृति के अनुरूप नंदी बैल की पूजा कर जनता की खुश हाली की प्रार्थना कर मनाया पोला का त्यौहार इसके पश्चात पश्चिम विधानसभा के गुढ़ियारी,भेसथान,रामनगर, लक्ष्मण नगर ,गोकुल नगर ,गोपाल नगर, मजदूर नगर, कुकुरबेड़ा ,सरोना ,चंदन डीह,अटारी आदि विभिन्न वार्डों में भी मनाया गया पोला के त्यौहार पर आज पश्चिम के विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि तीजा,हरेली ,पोला छत्तीसगढ़ का पारंपरिक त्यौहार है इस त्यौहार को जीवित करने का काम छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने किया है इसके पहले हरियाली का त्यौहार भी हमने यहीं से मनाया था और आज पोला के त्यौहार की शुरुआत भी यही से की है आज पोल के अवसर पर सुबह से मुख्यमंत्री निवास के बाहर स्कूल के बच्चों के साथ नंदी बैल की पूजा की गई इसके साथ ही अपने निवास स्थान पर पूजा पाठ कर पोला का त्यौहार मनाया पश्चिम विधानसभा के विधायक विकास उपाध्याय ने बताया कि गुढ़ियारी, रामनगर, भेसथान, लक्ष्मण नगर, गोकुल नगर, गोपाल नगर ,कुकुर बेड़ा ,चंदनडीह, सरोना, अटारी, मुर्राभट्टी ,अशोकनगर में पारंपरिक रूप से पोला का त्यौहार मनाया गया इससे पहले रामसागर पारा वार्ड में पारंपरिक रूप से पोला का त्योहार मनाया जाता था बैल दौड़ का कार्यक्रम किया जाता था पर पूर्व की सरकार के समय बंद हो चुका था पर आज भूपेश बघेल की सरकार ने पुनः संस्कृति को जीवित करते हुए  इसे मनाया भेसथान में बैल दौड़ का आयोजन किया गया आज हम सब ने पोला का त्यौहार मना कर बचपन की यादें पुनः जीवित हो गई जिसे हम कहीं भूल चुके थे छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान देश है जहां पर बेलों के साथ पोला के उत्सव पर बेल की पूजा कर पोला का त्यौहार लगातार मनाते है  आज 19 साल बाद वही संस्कृति वही विरासत पुनः लौट आई है आज छत्तीसगढ़ के किसानों की आंखों में खुशी और चेहरे पर हंसी साफ दिखाई दे रही है पश्चिम के विधायक विकास उपाध्याय ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने छत्तीसगढ़ के किसानों जनता के हित में निर्णय लेते हुए संस्कृत की विरासत को बचाने का काम किया है ।

 

 

 

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