अनिल चौबे
नई दिल्ली// मोदी सरकार का अर्थ गणित पिछले 7 सालों से पटरी पर नहीं आ रहा है हालात दिन प्रतिदिन बिगड़ते ही जा रहे हैं मोदी सरकार द्वारा लिए गए कुछ खतरनाक टाइप के निर्णयो ने देश की अर्थव्यवस्था को चरमरा कर रख दिया है उदाहरण के तौर पर अचानक भयानक तरीके से नोटबंदी के एलान ने अर्थव्यवस्था की उस कमर को तोड़ दिया जिसका इलाज फिलहाल मोदी के पास नहीं है जानकार विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विकासशील देश मैं कथित काला धन उस अर्थव्यवस्था के पूरे मॉडल में ग्रीस का काम करता है जिससे गाड़ी बिना रुके चलती रहती है अचानक उन पहियों में से इस गिरीश को निकाल दिया गया है दोपहिया चल तो रहा है लेकिन वह स्मूथ गति ना होने के कारण कई जगह पहिया चरमरा कर बैठ गया है इस और मोदी का ध्यान नहीं है मोदी सरकार में लिया गया सबसे खतरनाक निर्णय रियल स्टेट को चारों तरफ से बांध देना था जिसके कारण पूरे देश में मंदी का दौर शुरू हुआ रियल स्टेट से प्रत्येक वह व्यक्ति जुड़ा हुआ है जो इस देश में रह रहा है कहने का मतलब रियल स्टेट में जमीन खरीद-फरोख्त पर इतने कानून ला दिए गए कि आम आदमी तो क्या बड़ा आदमी भी जमीन खरीद-फरोख्त करने से बचने लगा है इस मंदी के आते ही जब जमीन नहीं बिकेगी मकान नहीं बनेगा तो लोहा कहां बिकेगा सीमेंट कहां बिकेगी करोड़ों मजदूर जो इस रोजी-रोटी से जुड़े थे वह भी बेरोजगार हो गए एक मकान बनाने में कितने प्रकार के औजार लगते हैं यह हजार औजार हमारे यहां की छोटी-छोटी औद्योगिक इकाइयों में बनते थे लोगों को रोजगार मिला हुआ था मकान बन भी रहे थे और बिक्री रहे थे लेकिन मोदी की ऊंची सोचने को जाने किसने यह समझा दिया की रियल स्टेट का बड़ा पैसा आतंकवादी गतिविधियों में लगता है इसलिए इस पर नकेल डालने के लिए इतने कानून लाद दिए कि आज आदमी या बड़ा आदमी कोई मकान खरीदना भी चाह रहा है तो वह नहीं खरीद पा रहा है अर्थव्यवस्था पर इस मामले मैं इसलिए भी ज्यादा हो हल्ला नहीं हुआ क्योंकि यह संगठित व्यापारियों का एक बड़ा कारोबार था इसलिए पूरे देश में रियल एस्टेट के चरमरा जाने से डायरेक्ट इनडायरेक्ट करीब 40 करोड़ से ऊपर लोग रोजी रोटी से हाथ धो बैठे हैं लोहे की फैक्ट्रियां बंद होती जा रही हैं सीमेंट की फैक्ट्रीया घाटे में चल रही हैं मकान से जुड़े छोटे-मोटे उद्योग वह तो चर्मरा ही गए जो थोड़ी बहुत कसर थी उसको कथित काले धन को समाप्त करने के लिए उठाया गया खतरनाक कदम नोटबंदी ने पूरी तरीके से निष्ताना भूत कर दिया है |
यह वास्तविक सत्य है कि आज नोटबंदी की घोषणा से जहां
सबसे निचले तबके के लोगों को यह लगा की इसका असर ऊपर बैठे लखपति करोड़पति ऊपर ऐसा पड़ेगा
कि उनकी कमर टूट जाएगी और वह हमारे बाजू में आकर बैठ जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ होशियार
अरबपति करोड़पति होने काले धन को तो सफेद कर लिया लेकिन मध्यम वर्गीय और निम्न मध्यमवर्गीय
व्यापारियों की हालत इस से टूट गई वह इस धन को सफेद नहीं कर पाए और उनका छोटा-मोटा
धंधा डूब गया इस डूबे हुए धन देने बेरोजगारी का एक बड़ा पहाड़ खड़ा कर दिया है जिसको
लेकर मोदी लगातार झूठ बोल रहे हैं यही स्थिति बनी रहे तो मोदी भट्ट काऊ मुद्दों पर तो मतदान कराकर
मत हासिल कर लिए हैं लेकिन वस्तु की स्थिति में अर्थव्यवस्था की कमर एक नहीं कई जगह
से टूट चुकी है जिसको जोड़ना जरूरी है नहीं तो राष्ट्र एक भयानक आर्थिक संकट में सामना
करने के लिए तैयार रहेगा




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