दिव्य-दूत

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सुकमा में ‘नियद नेल्ला नार’ योजना बनी बदलाव का माध्यम

AVINASH CHOUBEY 06-08-2025 18:05:44


****** आत्मसमर्पित माओवादियों को मिल रहा नया जीवन कौशल विकास प्रशिक्षण से बदल रही है बस्तर के युवाओं और महिलाओं की जिंदगी राज्य सरकार की माओवादी आत्मसमर्पण राहत एवं पुनर्वास नीति-2025 ला रही रंग ***

रायपुर 6 अगस्त 2025/छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लागू माओवादी आत्मसमर्पण राहत एवं पुनर्वास नीति-2025 और बस्तर संभाग के अंदरूनी गांवों के समग्र विकास के लिए विशेष रूप से संचालित ‘नियद नेल्ला नार’  योजना ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और विश्वास का नया मार्ग प्रशस्त किया है। इस योजना के कन्वर्जेंस के माध्यम से जिला प्रशासन सुकमा द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों को कौशल प्रशिक्षण, पुनर्वास एवं स्वरोजगार से जोड़कर समाज की मुख्यधारा में सफलतापूर्वक जोड़ा जा रहा है।

कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव के मार्गदर्शन में चल रहे इस कार्यक्रम के अंतर्गत लाइवलीहुड कॉलेज एवं ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में विभिन्न ट्रेड में नि:शुल्क प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि आत्मसमर्पित युवा और महिलाएं आर्थिक रूप से स्वावलंबी होकर समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें।

पुनर्वास केंद्र बना नई राह की शुरुआत

कोंटा विकासखंड की अनीता सोड़ी जैसी आत्मसमर्पित महिलाओं के जीवन में यह योजना नई दिशा लेकर आई है। अनीता बताती हैं कि पुनर्वास केंद्र ने हमें यह एहसास कराया कि शांति और सम्मान से भी जीवन जीया जा सकता है। सिलाई, कृषि समेत अन्य आजीविका प्रशिक्षणों ने हमारा आत्मविश्वास बढ़ाया है। अब मैं स्वयं का सिलाई कार्य प्रारंभ कर परिवार को बेहतर भविष्य देना चाहती हूं।

अनीता के साथ सुश्री वेट्टी कन्नी, हड़मे माड़वी, कड़ती विज्जे समेत 6 आत्मसमर्पित महिलाएं लाइवलीहुड कॉलेज सुकमा में चल रहे एक माह के सिलाई प्रशिक्षण में हिस्सा ले रही हैं। ‘सक्षम योजना’ के अंतर्गत उन्हें 40 हजार से 2 लाख रुपये तक का ऋण 3% ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाएगा तथा निःशुल्क सिलाई मशीन एवं प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।

लाइवलीहुड कॉलेज में संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रम में 30 किशोरी बालिकाएं एवं महिलाएं हिस्सा ले रही हैं। इन्हें ब्लाउज, ड्रेस, स्कूल यूनिफॉर्म एवं शर्ट-पैंट की सिलाई की ट्रेंनिग दी जा रही है। साथ ही नोनी सुरक्षा योजना, महतारी वंदन योजना, सक्षम योजना, एवं महिला ऋण योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने की पहल भी की जा रही है, जिससे महिला सशक्तिकरण को नई गति मिल रही है।

नियद नेल्ला नार योजना से बस्तर में विकास और विश्वास की बहार बह रही है। अब तक 79 आत्मसमर्पित माओवादियों को सिलाई, कृषि-नर्सरी, वाहन-चालन, राजमिस्त्री एवं उद्यमिता जैसे ट्रेड्स में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आगामी सप्ताह से 30 युवा राजमिस्त्री प्रशिक्षण के लिए आरसेटी में प्रशिक्षण लेंगे। पुनर्वास केंद्र सुकमा में वर्तमान में 42 प्रशिक्षणार्थी (21 महिलाएं) निवासरत हैं जिन्हें क्रमशः कौशल प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है।

योजना के कन्वर्जेंस से युवाओं को मुख्यमंत्री कौशल विकास, सक्षम, पीएम स्वनिधि, स्टार्टअप, कृषि उद्यमिता और महिला ऋण योजनाओं से जोड़कर स्वरोजगार की राह दिखाई जा रही है जो बस्तर के अंदरूनी गांवों में रोजगार, सम्मान तथा विकास के नए युग का सूत्रपात कर रही है।

छत्तीसगढ़ सरकार की दूरदर्शी नीति और ‘नियद नेल्ला नार’ योजना ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब सरकार संवेदना, अवसर और कौशल के साथ लोगों तक पहुँचती है तो बदलाव सिर्फ संभव ही नहीं बल्कि सुनिश्चित होता है। बस्तर की यह परिवर्तन यात्रा आने वाले समय में शांति, विकास और समृद्धि की स्थायी नींव तैयार करेगी।

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