रायपुर/// अजीत जोगी द्वारा दिए गए बयान पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने
कहा है कि जोगी की जाति के मामले में सरकार का कोई लेना देना नहीं है उच्चतम
न्यायालय द्वारा गठित छानबीन समिति ने निर्णय दिया है जोगी अपना पक्ष वही रखें तो
बेहतर होगा ना हमने शिकायत की थी ना हम ने हस्तक्षेप किया है शिकायत भाजपा ने की
थी उस वक्त भी हस्तक्षेप भाजपा का ही था जो 18 साल तक फैसला
नहीं होने दिया अब फैसला हो गया है
इन दिनों जोगी की जाति
को लेकर छत्तीसगढ़ में बवाल तन गया है एक और जहां छानबीन समिति ने 18 साल बाद जोगी को आदिवासी नहीं है का आदेश जारी किया है वही जोगी उन तमाम
न्यायालयों का वास्ता देते हुए कह रहे हैं कि वर्तमान भूपेश सरकार ने मुझे आदिवासी
नहीं माना है बाकी सभी संस्थाएं जिसमें उन्होंने राहुल गांधी राजीव गांधी सोनिया
गांधी का भी जिक्र करते हुए कहा है कि वह भी मुझे आदिवासी मानती थी लेकिन प्रश्न
यह उठता है कि किसी के मान लेने से जाति का यह गंभीर मामला जोगी के पक्ष में नहीं
जाता छानबीन समिति ने अपने 29
पेज के निर्णय में लिखा है कि जोगी किसी तरीके से भी अपने आदिवासी होने के पुख्ता परिणाम प्रस्तुत नहीं कर पाए
हैं ना ही सामाजिक तौर पर ना ही कानूनी तौर पर अब जब निर्णय आ ही गया है तो जोगी
खीजी बिल्ली खंबा नोचे की तरह अपने आपके इस झूठे आदिवासी होने को फिर से स्थापित
करने में लग गए
जोगी की जाति को लेकर विवाद 2001 में ही शुरू हो गया था जब जोगी छत्तीसगढ़
के मुख्यमंत्री बने और उन्होंने रामदयाल उइके की खाली की गई सीट से चुनाव लड़ने की अपनी घोषणा की उस वक्त योगी
मुख्यमंत्री थे सारे अधिकारियों पर उनका दबदबा था सो किसी ने इस पर बिना किसी
आपत्ति के उन्हें चुनाव लड़ने दिया जोगी रिकॉर्ड मतों से जीते भी और मुख्यमंत्री
की कुर्सी पर विधिवत
भी आसीन हो गए मामला विभिन्न अदालतों में चलता
रहा भाजपा ने इसको अनेक प्लेटफार्म मेंउठाया न्यायालय में प्रस्तुत किया भारत के
संविधान के तहत गठित उच्चतम न्यायालय के सर्वोच्च पांच जजों की पीठ ने यह निर्णय
सुनाया था की बिना संसद की अनुमति बिना ज्योति
के मामले में किसी भी तरह का फेरबदल
नहीं हो सकता उसी निर्णय में यह भी कहा था कि
क्योंकि पूरे देश में जाति को लेकर विभिन्न प्रकार के विवाद हैं अतः उच्चतम
न्यायालय इस मामले में अपने संपूर्ण अधिकार के साथ तमाम राज्य शासन को यह
निर्देशित करता है कि एक उच्च स्तरीय छानबीन समिति का गठन किया जाए और आदिवासियों
की जाति के तमाम मामले वह सुने उसका जो निर्णय होगा वह उच्चतम न्यायालय के समकक्ष
मंजूर होगा सभी राज्यों में समितियां बन गई जाति के मामले सुने जाने लगे
उसी छानबीन समिति ने
वर्तमान में जो फैसला दिया है समिति ने माना है की जोगी आदिवासी नहीं अब जोगी किस
जात के हैं यह उन्हें स्वयं सिद्ध करना होगा जोगी ने अपने बयानों में कहा है कि वह
इस फैसले के अगेंस्ट में उच्च न्यायालयों में जाएंगे और वह चले भी गए हैं लेकिन जब
वह समिति के सामने अपने आदिवासी होने का प्रमाण नहीं दे
पाए हैं तो उच्चतम न्यायालय में जाकर वह इस मामले पर अपना पक्ष कैसे रखेंगे यह
देखने लायक बात बाहर हाल वर्तमान में जोगी किसी जाति के नहीं हैं यह समिति ने तय कर दिया है इसको लेकर वर्तमान में अजीत जोगी सुरक्षित सीट मरवाही से
विधायक हैं हो सकता है छानबीन समिति के इस निर्णय से उनकी विधायकी भी चली जा सकती
है जिसको लेकर वह चिंता में है




Copyright @ 2020 All Right Reserved | Powred by Divyadoot
Comments