एक्साइज अधिकारी और वेलकम डिस्टलरी के मालिक ने मिलकर सरकार को 20 करोड़ से ऊपर चुना लगाया
रायपुर// जहां एक ओर सरकार शराबबंदी के लिए समितियां बनाकर
लोगों की राय लेने में लगी हुई है वही सरकार की नाक के नीचे सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत
से महाराष्ट्र की देसी शराब की शीशी में छत्तीसगढ़ की अंग्रेजी शराब को भरकर सरकारी
दुकानों में से धड़ल्ले से पिछले 4 माह से बेची जा रही थी वेलकम डिस्टलरी जो कि इस
तरह के खेल में पूरी तरह संलग्न थी के साथ छत्तीसगढ़ के आबकारी अधिकारी भी लगे हुए
थे अब महाराष्ट्र की शीशी में छत्तीसगढ़ की अंग्रेजी शराब भर के बेचने के खेल के पीछे
पहला मकसद तो यह है की महाराष्ट्र की देसी विंगर शराबी यह बोतल दूसरी कांच की बोतलों
से 2 या 3 रुपए सस्ती दरों पर मिल जाया करती
है यह सीधा फायदा वेलकम डिस्टलरी के खाते में जाता है तू है 3 रुपयासस्ती होने का मतलब है डेड सो रुपए प्रति पेटी फायदा इसके अलावा यदि इस
शराब को भरकर महाराष्ट्र भेज दी जाती है तो वहां के कोच्चिए इसे आराम से महाराष्ट्र
में खपा लेंगे क्योंकि सीसी में महाराष्ट्र और विंगर शराब का लेबल लगा हुआ है इसकी
भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता
इस खेल में लगे सरकारी अधिकारियों ने कंपनी के साथ
मिलकर पिछले 4 महीनों में करोड़ों की हेराफेरी की और सरकारी दुकानों से विंगर देसी शराब की बोतल में सरकारी शराब भरकर सरकारी दुकानों से मुंबई
टू गोवा के नाम से बेची दी गई जानकारों का कहना है कि यदि इस तरह का काम और भी कंपनियां
करने लगेंगे तो यह पता ही नहीं चलेगा कि किसकी शराब की बोतल में किस कंपनी का माल भरा
हुआ है और यदि किसी तरीके का हादसा होता है तो भी यह कहना मुश्किल हो जाएगा की किस
कंपनी की शराब से यह हादसा या जनहानि हुई है जो एक गंभीर मामला है कानून के तहत इस
तरह की की बोलिंग करना प्रतिबंधित है जो सरकार के नुमाइंदों के नाक के नीचे की जा रही
थी
अब
सरकार के गले में यह हड्डी इसलिए भी फस गई है कि सरकार इन भरी हुई बोतलों पर एक्साइज
भुगतान कर चुकी है क्योंकि सरकार शराब खरीद रही है और चला भी
रही है दुकानें भी सरकार की ही है मजेदार बातें हैं सरकार एक्साइज पेमेंट कर चुकी है अब यदि इनको बोतलों को
तोड़कर फिर से रिफिलिंग कराई जाए तो सरकार को करीब 12 करोड़ से ऊपर का नुकसान हो जाएगा
इसलिए सरकार ने इस गले की हड्डी को निकालने के लिए भरपूर कोशिश की क्या माल बिक जाए
लेकिन लगातार मिल रही शिकायतों के चक्कर में अब सरकार द्वारा खरीदी हुई देसी सीसी में
विदेशी शराब को सील कर दिया गया है दुकानों से शराब नहीं बेची जाएगी कि आदेश हो गए
हैं वही वेलकम डिस्टलरी मैं जो माल बनकर तैयार था उसको भी सील कर दिया गया है लेकिन
जिस माल की एक्साइज पेमेंट हो गया है उसका सरकार क्या करें सरकार यह सोच रही है की
वेलकम डिस्टलरी पर हैवी फाइन लगाकर एक्साइज की भरपाई की जाए और इन बोतलों में भरी हुई
शराब को फिर से तोड़कर नई शराब बोतलों में
पैकिंग की जाए अब यह एक्साइज का तकनीकी मामला है सरकार इस पर क्या करती है
महाराष्ट्र एक्साइज विभाग को भी इस पर कड़ी आपत्ति
जताते हुए छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग से पूछताछ करनी चाहिए की इस तरह की की गलतियां करने
से महाराष्ट्र के एक्साइज विभाग को भी भारी
दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है यह एक मानवीय भूल नहीं है यह जानबूझकर अत्यधिक लाभ
कमाने के चक्कर में किया गया घिनौना खेल है जिसमें कंपनी के मालिक के साथ छत्तीसगढ़
एक्साइज विभाग के अधिकारियों की भी संलिप्तता दिखाई दे रही है




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