***** महंगे आयरन ओर ब्लॉक खरीदने से भविष्य में लोहे के दाम आम उपभोक्ता की जेब पर डाका डालने वाले हैं इस पूरे खेल में Arcelor Mittal की पेंतरे बजी और सरकार की कमियों का नुकसान आम जनता की जेब पर पड़ने वाला है सरकार इन उद्योगपतियों को फलने फूलने के लिए आम उपभोक्ताओं का गला दबाने तैयार है *****
Arcelor Mittal won the block 1 A on 151% premium
Arcelor Mittal at 157 % Block 1B of Bailadila range also gone to
Block 1C won by Rungta sons at 152%

रायपुर/// छत्तीसगढ़ के बहुमूल्य आयरन ओर माइंस बैलाडीला डिपॉजिट 0 1A आयरन ओर ब्लॉक 01Bऔर 01C नीलामी हो चुकी है, छत्तीसगढ़ सरकार ने बैलाडीला के तीन और हाहालद्दी की एक आयरन ओर माइनस के लिए बोलियां आमंत्रित की गई थी हाहालद्दी कांकेर जिले में आती है बैलाडीला दंतेवाड़ा जिले में आता है चारों ब्लॉक में आयरन और की अच्छी खासी मात्रा है उपलब्ध है जिसका Fe 64 % से अधिक है का मतलब है यह भारत का सबसे अच्छा आयरन ओर है बैलाडीला के इन ब्लॉकों को पहले टाटा स्टील को आवंटित था लेकिन टाटा स्टील ने समय पर इस ब्लॉकों की खनन की तैयारी नहीं करने पर सरकार ने इसे रद्द कर दिया था, बैलाडीला के इस ब्लॉक का PILपहले सी हुआ है उसी को आधार मानते हुए इस पूरे एक ब्लॉक को तीन भागों में बाँट कर सरकार ने बोलियां आमंत्रित की थी 13 बोली दाताओं ने इसमें बोली लगाने के लिए क्वालीफाई हुए हैं उन सभी बोली

कर्ताओं ने इसमें बाढ़ चढ़ का हिस्सेदारी ली अपने-अपने हिसाब से बोली लगाई |
सरकार ने स्टार्ट बेड 100% प्रतिशत से शुरू की थी जिसे Arcelor Mittal won the block on 151% premium पर अधिकतम बोली लगाकर हासिल कर लिया है इसी तरह 1B को Block 1B of Bailadila range also gone to Arcelor Mittal at 157 %
और Block 1C won by Rungta sons at 152% अधिकतम बोली लगाकर ब्लॉक पर कब्जा कर लिया है

देश की नामी कंपनियों ने जो पहले से ही स्टील में महारत हासिल करती हैं ने भी भाग लिया था एनएमडीसी के पास इसी बैलाडीला में 7 ब्लॉक पर आधिपत्य है जिम वह खनन कार्य करके पूरे देश के लोहा उद्योग व्यापारियों से ईयरली कांटेक्ट करके बिना किसी रोक-टोक के आयरन और सप्लाई कर रहा है वर्तमान में एनएमडीसी के आयरन ओर रेट आज 3300 प्रति टन है आज की डेट में जिन ब्लॉकों Arcelor Mittal और Rungta sons हासिल किया है उनको उनको यह आयरन और 6800 प्रति टन के हिसाब से पड़ेगा जब यह बोलियां सार्वजनिक हुई तो पूरे देश की बड़ी कंपनियां इस तरीके के बोली को देखकर आश्चर्य में पड़ गई तरह-तरह की प्रतिक्रिया और बोली में खामियों को लेकर सामने आ रही है
भाग लेने वाली अधिकतर कंपनियों ने कहा है की सरकार को अपनी START BID जो उन्होंने पहले से ही 100 % प्रतिशत से अत्यधिक में शुरू की है उसको देखते हुए बाकी बाकी बोली दाताओं ने अपने-अपने गणित के अनुसार आयरन ओर के मूल में बेतहाशा वृद्धि कर दी और150 प्रतिशत से भी अधिकतम बोली पर आयरन ओर के ब्लॉक हासिल कर लिए इस घटना से भारत के लोहा उद्योग में लोहे के मूल्य को लेकर चर्चाएं होने लगी हैं लोहा उद्योग से जुड़े हुए व्यापारी और उद्योगपति का कहना है कि इन कंपनियों ने जिस तरीके से लोहे के प्रमुख कच्चे माल आयरन ओर की कीमत 150 प्रतिशत से अधिक बढ़ा दी है इसका असर सीधे मार्केट में पढ़ने वाला है उद्योगपतियों का तो कुछ नहीं जाएगा यह सारा भार उन आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जिन्हें लोहे से जुड़े हुए सामान बनाने और मकान बनाने के लिए खरीदना पड़ता है भारत में यह पहली बार होगा की इन कंपनियों ने अपने स्वार्थ के लिए किसी भी तरीके से ब्लॉक को हासिल करने के लिए जो इतनी ऊंची दरों में यह आयरन ओर ब्लॉक हासिल किए हैं यह पूरे भारत के लोहा उद्योग में लोहे के मार्केट को गड़बड़ाने वाले हैं या तो ब्लॉक हासिल करने वाले बोली दाता इस मूल्य पर आयरन ओर का खननं कर अपनी फैक्ट्री तक ले जाएंगे या फिर यह इन ब्लॉकों को सरेंडर करने की प्रक्रिया में तरह-तरह के बहाने बनाकर भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन को रेवेन्यू की अत्यधिक हानि पहुंचाने वाले हैं
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Arcelor Mittal ने छत्तीसगढ़ में सबसे पहले एस आर इंडिया लिमिटेड की पाइपलाइन प्रोसेस कंपनी को टेकओवर किया फिर वह लगातार कोशिश करते रहे कि नगरनर स्टील प्लांट को अपने अधिपत्य में लिया जाए आम जनता का विरोध होने के कारण और बैलाडीला में पाइप लाइन से आयरन ओर पहुंचने में जब उन्हें व्यावहारिक दिक्कत आई तो उन्होंने अपना हाथ खींच लिया और लोहे का बड़ा इन्वेस्टमेंट इन्होंने नवीन पटनायक के जमाने में उड़ीसा में किया अब इन्होंने पुनः छत्तीसगढ़ में अपनी गतिविधियां बढ़ाने के लिए हर हल में ब्लॉक चाहिए और इन महंगे ब्लॉकों को हासिल कर लिया इस तरह की हरकत कर पूरे लोहा उद्योगपतियों को चिंता में डाल दिया है मित्तल का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड है कि यह का धंधा नहीं करते बल्की वह स्टील के धंधे में जुआ का खेल खेलते हैं ये पूरे लोहा उद्योग के लिए इसी तरह के सिर दर्द खड़ा करते हैं जिस तरीके से उन्होंने अभी इन आयरन ओर ब्लॉकों को इतनी ऊंची कीमत पर हासिल किया है का मतलब है कि भविष्य में लोहे के दाम ₹1,00,000 टन से भी ऊपर जाने के चांस बन रहे है ।
भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार को इस तरीके के उद्योगपतियों को अपने राज्य और देश में इस तरह की खुली छूट नहीं देना चाहिए ताकि यह हमारे खूबसूरत लोहा उद्योग बाजार को छिन भिन्न कर अपना आधिपत्य जमा सकें इन्होंने विदेश में भी इसी तरीके के काम किया था जब वहां के स्थानीय उद्योगपतियों को उनकी धूर्तता चला का पता चला तो उन्होंने इनको संयुक्त रूप से इन्हें दिक्कत देना शुरू कर दिए इसलिए मित्तल अपना सारा विदेशी व्यापार समेट कर भारत में अपना अधिपति जमाने के लिए पिछले 8-9 सालों से भरपूर कोशिश कर रहे हैं भारत में अपना पैर जमाने के लिए इनका यही तरीका है व्यापार में इतनी अधिक मूल्य वृद्धि कर दो कि छोटे छोटे उद्योग की कमर टूट जाए इसमें सबसे बड़ा खेल मित्तल जी को पता है कि इसमें मिताल जी का क्या जाता है यह लोहे की कालाबाजारी कहलाती है और इसमें मित्तल 8 साल से भारत में अपना खेल जमाने के लिए लगे हुए हैं दुर्भाग्य कि इन्हें छत्तीसगढ़ में यह खेल खेलने का मौका शासन ने दे दिया है




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