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दिव्या दूत परिवार की ओर से 76 वें गणतंत्र दिवस पर पूरे देश को ढेर सारी शुभकामनाएं और बधाइयां तमाम राजनेताओं से संविधान में जो लिखा है उसी वेसे ही पढ़ें अलग-अलग चश्मे से ना देखें
76 वें गणतंत्र दिवस पर अपने-अपने संविधान पर चर्चा करना जरूरी है , 2023 और 2024 में देश की प्रमुख पार्टी कांग्रेस ने संविधान को लेकर कश्मीर से कन्याकुमारी तक संविधान की अलग-अलग व्याख्या की सत्तारूर पार्टी भाजपा पर खुले शब्दों में यह इल्जाम लगाया गया कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के संविधान को बदलने के लिए भाजपा 400 पार का नारा दे रही है, इसका मुख्य मकसद संविधान को बदलना है और हमारा मुख्य उद्देश्य संविधान को बचाना है संविधान बदलने और बचाने के बीच में ही करीब करीब 2023 2024 के तमाम तरह के चुनाव लड़े गए सत्ता दल संविधान न बदलने की कसम खाता रहा दूसरी पार्टी संविधान बदलने की दलील देता रही इन दोनों दलिओं के बीच में जिस तरीके से संविधान को लेकर सभी पार्टियों में अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग तरह की गणना की सभी ने संविधान की कसम खाई और संविधान की धज्जियां भी पूरी तरीके से उड़ाई
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कांग्रेस पार्टी और उनके गठबंधन ने संविधान के छोटे मॉडल को लेकर हर राजनीतिक मंच में उसे लहराया एक हाथ में उसे पकडे रहे अपने स्वार्थ बस गलत बयानी करते रहे पहली बार सांसद चुनकर आई प्रियंका बॉर्डर ने भी संविधान की प्रति संसद में लहराई जबकि वास्तविकता यह है कि जिन पार्टियों ने भी इस गुटका रूपी संविधान को हाथ में लेकर लहराया मुझे नहीं लगता कि उन्होंने संविधान को ठीक तरीके से पढ़ा भी है वह तो सिर्फ चुनावी फायदा लेने के लिए और जनता में अविश्वास फैलाने के लिए संविधान रूपी गुटके का उपयोग करते रहे की यह 400 सीटर की मांग रहे हैं कि इनको संविधान बदलना है इसलिए 400 सांसद ना दी जाएँ और बेचारी सत्ता सीन पार्टी यही आश्वासन देते रहे कि हमारा ऐसा कोई इरादा नहीं है ,
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आज इस संविधान की 76 वी में वर्षगांठ है पूरा देश इस वर्ष गांठ को धूमधाम से मना रहा है, सभी ने तिरंगे को सलामी दी है ,कसमें खाई है कि इसकी आन बान शान को मिटाने नहीं देंगे को दृढ़ता से दोहराया हेअच्छी बात है, लेकिन जिस तरीके से इस बार चुनाव में संविधान का उपयोग किया गया मतदाताओं को गुमराह किया गया विशेष कर एक समुदाय के मतदाताओं को भरपूर डराया गया कि इस बार 400 पार हुए तो संविधान बदल दिया जाएगा और तुम्हारी अस्मिता खतरे में पड़ जाएगी डरपोक लोगों ने इन धूर्त नेताओं की बातें मानी और अपना मत गुमराह की गली में डाल दिया इसका कुछ तो फायदा विपक्षी दलों को हुआ लेकिन इस धूर्त और गुमराह करने वाले गंदे प्रयोग ने जिस तरीके से संविधान का राजनीतिक उपयोग कर उसका फायदा लेने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी यह बहुत ही गंदी राजनीति है
आज हमारे संविधान को सफलतापूर्वक संगठित देश चलाने के लिए पूरा विश्व गर्व करता है हमारे संविधान की दुहाई दी जाती हैं अनेकता में एकता का इससे अच्छा उदाहरण नहीं है लेकिन जिस तरीके से इस पवित्र ग्रंथ का उपयोग राजनीतिक फायदे के लिए किया गया वह दुर्भाग्यपूर्ण है राजनीतिक पार्टियों इस स्तर तक गिर जाएगी भरोसा नहीं होता हर देश में हर तरह के लोग रहते हैं लेकिन देश की अखंडता के लिए इस तरीके के प्रयोग करना ठीक नहीं आप अपना विजन रखकर जनता से मतदान करने की अपील के साथ अपने पक्ष में मतदान करना एक अच्छी परंपरा डालें लेकिन इस तरीके से राष्ट्रीय धरोहरों का उपयोग कर वोट मांगना सत्ता में आने के लिए तरह-तरह के हाथकंडे अपनाना ठीक नहीं है यह स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है




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