दिव्य-दूत

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मानव तस्करी का मुद्दा डिजिटल युग में गुमनामी और जटिल नेटवर्क के कारण बढ़ गया है >> न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम अध्यक्ष एनएचआरसी

AVINASH CHOUBEY 09-02-2025 19:22:43


रायपुर, 7 फरवरी 2025 /// हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और में डिजिटल युग में मानव तस्करी का मुकाबला' विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया ।कार्यक्रम में उद्घाटन भाषण देते हुए मुख्य अतिथि एनएचआरसी के अध्यक्ष माननीय श्री न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम ने मानव तस्करी के अपराध से निपटने के लिए प्रभावी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कदम उठाने की आवश्यकता का आग्रह किया। उन्होंने उपलब्ध आंकड़ों से मानव तस्करी में भारी वृद्धि को रेखांकित किया जिसके लिए जटिल डिजिटल नेटवर्क की सहायता से किए जाने वाले इस संगठित अपराध को रोकने के लिए डिजिटल नेविगेशन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में जागरूकता की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने युवा पीढ़ी से विशेष रूप से सोशल मीडिया के साथ नेट का उपयोग करते समय उचित सुरक्षित व्यवहार अपनाने का आग्रह किया।

सुश्री आर. शंगीता, सचिव एवं आयुक्त, उत्पाद शुल्क, वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग, छत्तीसगढ़ शासन सम्मानित अतिथि के रूप में संबोधन देते हुए उन्होंने मानव तस्करी के खतरे से निपटने के अपने क्षेत्र के अनुभव और इससे निपटने के लिए सीजी सरकार द्वारा किए गए उपायों के बारे में बताया। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि अधिकांश मामलों में प्रक्रियात्मक कठोरता की कमी के कारण सजा नहीं हो पाती है और विधि के छात्रों से जागरूकता पैदा करने, पीड़ितों की मदद करने और सरकार के प्रयासों में शामिल होने में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।

इससे पहले आरंभिक टिपण्णी देते हुए, प्रोफेसर डॉ. विवेकानन्दन, एचएनएलयू के कुलपति ने अपने सम्बोधन में औपनिवेशिक काल के दौरान गिरमिटिया मज़दूरी, अफ्रीकी महाद्वीप से गुलामी और आधुनिक समय में गरीबी, आंतरिक संघर्ष, युद्ध और किशोरों की भोलापन के मुद्दों को भुनाने के रूप में मानव तस्करी के इतिहास का पता लगाया। उन्होंने टिप्पणी की कि इस तरह के अपराध की डिजिटल सहायता पर उचित ध्यान नहीं दिया गया है और डिजिटल जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए एक प्रभावी कानूनी ढांचे की आवश्यकता है। 

उद्घाटन सत्र डॉ दीपक श्रीवास्तव, प्रभारी रजिस्ट्रार तथा एचएनएलयू के संकाय सदस्य, द्वारा गणमान्य व्यक्तियों और सभा का स्वागत करते हुए प्रारम्भ हुआ, और कार्यक्रम के सचिव डॉ. देबमिता मंडल ने सम्मेलन की संरचना और डिजिटल परिप्रेक्ष्य से मानव तस्करी से निपटने के लिए इसके महत्व पर जानकारी दी। एचएनएलयू की संकाय सदस्य सुश्री गरिमा पंवार ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम में गणमान्य अतिथियों द्वारा विश्वविद्यालय की एचएनएलयू गजट - न्यूज़लेटर का विमोचन भी किया गया।

सम्मेलन के पहले पैनल चर्चा का विषय "मानव तस्करी और प्रवासी तस्करी को में इंटरनेट की भूमिका - एक कानूनी और नियामक परिप्रेक्ष्य" था। मानव तस्करी और प्रवासी तस्करी की इंटरनेट सुविधा, जो प्रवर्तन प्रयासों को जटिल बनाती है। पैनल में मिस भामती बालासुब्रमण्यम, सेवानिवृत्त आईएएस और पूर्व सदस्य, केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने पूर्वोत्तर भारत की तस्करी संबंधी चिंताओं पर प्रकाश डालते हुए इस बात पर जोर दिया कि तस्करी शारीरिक गतिविधि के बिना भी हो सकती है। डॉ. संजीव शुक्ला बिलासपुर रेंज, छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिरीक्षक ने पुन: तस्करी के चक्र को तोड़ने के लिए पुनर्वास कार्यक्रमों के महत्व पर जोर दिया। डॉ केवीके संथी एनएएलएसएआर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के कानून के प्रोफेसर ने मजबूत साइबर-गश्त और न्यायिक सुधारों की आवश्यकता पर चर्चा की।श्री कीर्तन राठौड़ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, रायपुर, छत्तीसगढ़ ने केस अध्ययन साझा किया और त्वरित सुनवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। मिस प्रतिभा तिवारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, महासमुंद, छत्तीसगढ़ ने फर्जी नौकरी की पेशकश और क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन सहित तस्करी में प्रौद्योगिकी की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया।

 पैनल की प्रमुख सिफ़ारिशें- प्रशिक्षित कर्मियों के साथ साइबर अपराध और मानव तस्करी विरोधी इकाइयों को मजबूत करना। तस्करों पर नज़र रखने और पीड़ितों की पहचान करने के लिए एआई और साइबर निगरानी का विस्तार करना। तस्करी से संबंधित गतिविधियों की निगरानी और रिपोर्टिंग के लिए आईएसपी सहयोग को अनिवार्य बनाना तथा पुनः तस्करी को रोकने के लिए पीड़ित पुनर्वास कार्यक्रमों को बढ़ाना आदि रहीं।

दूसरे पैनल चर्चा सत्र का शीर्षक था "मानव तस्करी के खिलाफ निवारक रणनीतियाँ: प्रौद्योगिकी की भूमिका, कानून प्रवर्तन एजेंसियां, पीड़ित सहायता और सामुदायिक जुड़ाव," मानव तस्करी से निपटने के लिए निवारक रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें तकनीकी हस्तक्षेप, कानून प्रवर्तन समन्वय, पीड़ित पुनर्वास और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया गया। विशेषज्ञ पैनलिस्ट डॉ. मनीष मिश्रा छत्तीसगढ़ मानवाधिकार आयोग के संयुक्त निदेशक ने मानव तस्करी की प्राचीन उत्पत्ति और मजबूत कानूनों और पीड़ित-केंद्रित नीतियों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर बाल कल्याण समिति (रायपुर) के सदस्य ने तस्करी के शिकार बच्चों की सुरक्षा के लिए पुनर्वास कार्यक्रमों और कानूनी ढांचे के महत्व पर चर्चा की। मिस पल्लबी घोष इम्पैक्ट एंड डायलॉग फाउंडेशन (कोलकाता) के संस्थापक और निदेशक ने मानव तस्करों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के दुरुपयोग के बारे में चेतावनी देते हुए तस्करी को रोकने के लिए सामुदायिक सतर्कता और शिक्षा पर जोर दिया। श्री रीतेश कुमार बाल संरक्षण विशेषज्ञ, यूनिसेफ (रायपुर) ने बच्चों की तस्करी से लड़ने और उनकी सुरक्षा में अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की भूमिका पर जोर दिया।एवं प्रो डॉ. विष्णु कोनुरायर एचएनएलयू में विधि  के प्रोफेसर ने कानूनी चुनौतियों का विश्लेषण किया और विशेष अदालतों, तेज सुनवाई और सख्त दंड के साथ भारत के कानूनी ढांचे को मजबूत करने की सिफारिश की।

इस पैनल चर्चा की मुख्य सिफ़ारिशें में तस्करी गतिविधियों पर नज़र रखने और कानून प्रवर्तन में सहायता के लिए एआई, जियो-टैगिंग और साइबर टूल जैसी तकनीक का लाभ उठाना, सुरक्षित घरों, मनोवैज्ञानिक देखभाल और वित्तीय सहायता कार्यक्रमों के साथ पीड़ित सहायता को मजबूत करना, तस्करी नेटवर्क पर खुफिया जानकारी साझा करने और सीमा पार कार्रवाई के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना, समर्पित तस्करी विरोधी इकाइयों और तेज़ अभियोजन तंत्र के साथ सख्त कानून प्रवर्तन लागू करना, तथा तस्करों द्वारा भर्ती को रोकने के लिए कमजोर समुदायों में जागरूकता बढ़ाना आदि सम्मिलित रहीं।

सम्मेलन का समापन सत्र श्री जोगिन्दर सिंह, रजिस्ट्रार , विधि, NHRC के मुख्या आतिथ्य में संपन्न हुआ। जिन्होंने  अपने सम्बोधन में डिजिटल युग में मानव तस्करी के गंभीर मुद्दे पर प्रकाश डाला और अपराधों से निपटने के लिए पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण का आग्रह किया।  

कार्यक्रम में एचएनएलयू और रायपुर के श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय के बीच शैक्षणिक सहयोग पर डॉ. दीपक श्रीवास्तव, रजिस्ट्रार (प्रभारी) और डॉ. सौरभ कुमार शर्मा, रजिस्ट्रार, श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर भी हुए। प्रो. (डॉ.) योगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, डीन पीजी स्टडीज, एचएनएलयू, द्वारा समापन समारोह में उपस्थित लोगों का स्वागत किया गया, तथा  डॉ. प्रियंका धर, सम्मेलन सह सचिव, द्वारा सम्मेलन रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया । डॉ. किरण कोरी, सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स की प्रमुख द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।

 

 

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