रायपुर /// 2000 करोड़ से अधिक के शराब घोटाले में लगातार परतें खोलती जा रही हैं अनवर ढेवर से शुरुआत हुई अब आबकारी मंत्री भी लपेटे में आ गए हैं ये तो होना ही था ,अभी भी इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड परदे के पीछे है , इस घोटाले की स्क्रिप्ट तो चुनाव होने के 6 महीने पहले से लिखी जा रही थी. भाजपा सरकार में आबकारी का धंधा ना कर पाने वाली एक बड़ी शराब लाबी ने चुनाव में कांग्रेस को फाइनेंस कर जुआ खेला था शराब लाबी जान रही थी की भाजपा सरकार की इनकंबेंसी फेक्टर पर धन का तड़का लगा दिया जाए तो कांग्रेस की विजय सुनिश्चित है, यही से शराब लाबी ने स्क्रिप्ट लिखना शुरू की |
.jpg)
कांग्रेस 15 साल से हाशिये पर थी फाइनेंस के मामले में कमजोर थी छत्तीसगढ़ की एक मात्र शराब लाबी ने फाइनेंस के दरवाजे कांग्रेस के लिए खोल दिए और उसके सकारात्मक परिणाम भी आ गए कांग्रेस चुनाव जीत गई काफी मशक्कत के बाद भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बन गए जैसा कि होता है 12 मंत्रियों की लिस्ट भी फाइनल हो गई उन्होंने भी शपथ ग्रहण ले ली
अब स्क्रिप्ट का दूसरा पाठ शुरू होता है किसी को कौन सा मंत्रालय दिया जाए मंत्रालय बांटने का समय था शाम के 5:00 बजे पत्रकार कान लगाए हुए बैठे हुए थे वंही,छत्तीसगढ़ की बड़ीफाइनेंसर लॉबी शराब लाबी भी बेसब्री से आबकारी मंत्री की घोषणा कर इंतजार रही थी की अचानक मोबाइल की घंटी बजी और यह सूचना मिल गई की कवासी लखमा को आबकारी मंत्री बना दिया है जैसा कि लॉबी चाह रही थी वैसा ही हुआ
कावासी लखमा सुकमा से विधायक हैं सभी जानते हैं कि यह हस्ताक्षर भी ठीक से नहीं कर सकते लेकिन कवासी लखमा ना समझ नहीं थे वह चीजों को समझते थे और उन्हें इस पूरे घोटाले की अच्छी तरह से जानकारी भी थी लॉबी ने उनके लिए शराब के कंटेनरों को खोल दिया था लाबी अच्छे से जानती थी की लकमा शराब प्रेमी है उनके कई वीडियो और फोटो वायरल भी होते रहते हैं शराब लॉबी ने उन्हें मदहोश कर रखा था ऐसा कि उन्होंने खुद का बोला है अधिकारी लगातार हस्ताक्षर करते रहते थे, अधिकारी उन्हें फिक्स एक मुस्त क़िस्त हर महीने भुगतान कर देते थे, आबकारी मंत्रालय शराब लाबी चल रहा था जिसे पिछले 15 सालों से भाजपा ने आबकारी के मामले में घास नहीं डाली गई थी काफी दिनों से धंधा ना होने के चक्कर में शराब लावी ने चारों तरफ से भ्रष्टाचार करना शुरू किया और चुनाव में लगाया धन बसूल किया ही था की अनवर ढेवर की इंट्री इस गोरख धंधे में हो गई थी | शराब लॉबी जो को पूरी तरह से मंत्रालय चल रही थी को उसे बड़ा धक्का लगा अब शराब का कारोबार अनवर के द्वारा सरकार के पास आ गया था लॉबी पीछे हो गई थी
शराब घोटले की तीसरी स्क्रिप्ट में अचानक अनवर ढेवर की एंट्री हो गई , 8 या 9 महीने बाद उन्होंने भूपेश बघेल को पुरानी लॉबी से ज्यादा लालच देकर शराब का व्यापार अपने हाथों में ले लिया जैसे ही अनवर ढेवर की एंट्री शराब के इस खेल में हुई तो शराब लाबी को बहार का रास्ता देखने वाले अधिकारी अरुण त्रिपाठी की घुसपैठ बढ़ गई अरुण त्रिपाठी भाजपा सरकार में भी आबकारी विभाग से संबंधित अधिकारी था उसे भाजपा के पूर्व सिंडिकेट अघोषित मंत्री समुद्र सिंह की कार्यप्रणाली का ज्ञान अच्छी तरह था,उसने उस कार्य प्रणाली को घटिया ढंग से इंप्लीमेंट कर प्रतिवर्ष 2000 करोड़ से अधिक की वेध अवैध कमाई की गई वेध का मतलब था की दुकानों से ही नंबर दो कि शराब बेचने का जो काम भाजपा सरकार में होता तो उसने बखूबी त्रिपाठी ने चलाया और अधिक लालच के चक्कर में सरकरी खजाने में भी डाका डाला दिया सरकारी पैसा खजाने में जमा नहीं कियेगए छत्तेसगढ में शराब लूट की कमाई चारों तरफ चल रही थी सरकार को पता था पूरा अमला निजी तौर पर सरकारी दुकनो से शराब बेच रहा था ,और पैसे अपने घर ले जा रहा था यही है शराब घोटाले की असली कहानी इस लूट को पूरा छत्तीसगढ़ अच्छे से जान रहा था और कवासी लकमा बोलते हैं कि उन्हें पता नहीं




Copyright @ 2020 All Right Reserved | Powred by Divyadoot
Comments