अविनाश 99269:
स्थानीय संपादक
नया रायपुर 26/09/2024 /// जंगल सफारी रायपुर में रह 36 में से 35 काले हिरणों की मौत के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है ,इतनी अधिक संख्या में हिरनो की मौत के बाद अब जू प्रबंधन और जिम्मेदारी अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है तो दूसरी ओर काले हिरणों की मौत को लेकर अब चर्चाओं का दौर भी शुरू हो चुका है वही इस मामले को लेकर अब आरोप प्रत्यारोप की राजनीति भी शुरू हो गई ,कांग्रेस ने इस मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कारवाई की मांग की है तो भाजपा का कहना है कि निश्चित रूप से जांच के बाद जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा |

35 काले हिरणों की मौत के खबर छिपाने के लिए जू प्रबंधन ने आनन-फानन में सीडेजए से अनुमति लेकर बिलासपुर कानन-पेंडारी से 40 काले हिरण मंगा लिया, ताकि मामले को छिपाया जा सके, , लेकिन कानन पेंडारी से लाए गए तीन में से दो माउस हिरणों की मौत कीखबर सामने आई गई है , जिनका सफारी प्रबंधन ने गुपचुप तरीके से पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार कर दिया है,अब यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि सफारी में संक्रमण फैला हो सकता है,वही जंगल सफारी में आठ महीने के भीतर काले हिरणों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत तो सफारी में अगस्त में ही 23 काले हिरणों की मौत होने की जानकारी मिली,
वही काले हिरणों की मौत मामले को लेकर अब राजनीति भी शुरू हो गई है, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा है कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि अधिकारियों ने हिरनो के रखरखाव उनके स्वास्थ्य और रहन-सहन खान-पान को लेकर ध्यान नहीं दिया गया,,,,, जिसके कारण इतनी संख्या में मौत हुई है

जंगल सफारी में रह रहे 36 में से 16 नहीं, बल्कि 35 काले हिरणों की मौत की खबर आ रही है। इतने हिरणों की मौत के बाद ही सफारी प्रबंधन आनन-फानन में सीडेजए से अनुमति लेकर बिलासपुर कानन-पेंडारी से 40 काले हिरण लेकर आया है ताकि मामले को छिपाया जा सके। इसके साथ ही कानन पेंडारी से लाए गए तीन में से दो माउस हिरणों की मौत की भी बात खुल रही है, जिनका सफारी प्रबंधन ने गुपचुप तरीके से पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार कर दिया है। आशंका है कि सफारी में संक्रमण फैला हो सकता है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक थोक में काले हिरणों की मौत होने की वजह उपचार में लापरवाही है। कुछ काले हिरणों के बीमार होने की पुष्टि पहले ही हो चुकी थी, बावजूद इसके वन्यजीव चिकित्सक ने मामले की जानकारी सफारी प्रबंधन को नहीं दी। इसके कारण संक्रमण अन्य काले हिरणों में तेजी से फैलता गया और उनकी सिलसिलेवार मौत होती गई।
गौरतलब है कि जंगल सफारी में कानन-पेंडारी जू से जब 40 काले हिरण लाए गए, उसी समय कानन-पेंडारी जू से तीन माउस हिरण सफारी में लाए गए। कानन-पेंडारी जू से लाए गए तीन माउस हिरण में से दो की मौत एक माह के भीतर हो गई। सूत्रों के मुताबिक दो माउस हिरण की मौत 30 अगस्त से एक सितंबर के बीच हुई है।अफसर का कहना है कार्रवाई करेंगे
काले हिरणों की मौत की खबर प्रकाशित होने के बाद सफारी के डायरेक्टर धम्मशील गणवीर का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी। इसके बाद अफसर ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही। अफसर वन्यजीव चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई करने पत्र लिखने के बात कह रहे हैं।
वन्यजीवों की मौत पर जांच की मांग जंगल सफारी में 35 काले हिरणों की मौत को लेकर वन्यजीव प्रेमी सवाल उठा रहे हैं। वन्यजीव प्रेमी ने सीजेडए की निगरानी में काले हिरणों के साथ माउस हिरण की मौत किन परिस्थितियों में और कैसे हुई, इसकी जांच करने की मांग की है। साथ ही जांच में ऐसे एनजीओ जिनका वन विभाग से किसी भी तरह का संबंध नहीं है, उसे जांच में शामिल करने की मांग की है।
मौत के बाद देखने के लिए पहुंचे सूत्रों के मुताबिक कानन-पेंडारी से लाए गए दो माउस हिरण के बीमार होने की जानकारी मिलने पर वन्यजीव चिकित्सक बीमार हिरण को देखने के लिए नहीं पहुंचे। माउस हिरण की मौत की जानकारी मिलने पर डॉक्टर हिरण को देखने के लिए पहुंचे। माउस हिरणों की मौत किन कारणों से हुई है, फिलहाल इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है।
मौत के बाद देखने के लिए पहुंचे सूत्रों के मुताबिक कानन-पेंडारी से लाए गए दो माउस हिरण के बीमार होने की जानकारी मिलने पर वन्यजीव चिकित्सक बीमार हिरण को देखने के लिए नहीं पहुंचे। माउस हिरण की मौत की जानकारी मिलने पर डॉक्टर हिरण को देखने के लिए पहुंचे। माउस हिरणों की मौत किन कारणों से हुई है, फिलहाल इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है।




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