अविनाश कुमार कबीरदासजी का प्रसिद्ध दोहा है।कबीरदास कहते हैं कि संतजन (साधु) की जाति मत पूछो, यदि पूछना ही है तो उनके ज्ञान के बारे में पूछ लो। तलवार को खरीदते समय सिर्फ तलवार का ही मोल-भाव करो, उस समय . तलवार रखने के कोष को पड़ा रहने दो। उसका मूल्य नहीं किया जाता।
कबीर दास जी का यह दोहा इस समय बिल्कुल सटीक बैठ रहा है, जहां पर आज के संतजन की संख्या 793 है , वे सभी प्रजातंत्र के मंदिर में बैठे हुए हैं प्रजातंत्र के मंदिर में बैठे हुए लगातार वो जाति पर चर्चा कर रहे हें ,इस चर्चा में छुपे हुए हैं उनके अपने-अपने राजनीति लाभ ।
देश को आजाद हुए करीब 70 साल के आसपास हो गया है, जिसमें करीब 40 वर्ष के आसपास कांग्रेस सरकार का राज रहा है शुरु से कांग्रेस चतुर नेताओं की पार्टी रही है , पहले तो उसने देश के दो टुकड़े किए जिन्ना जेसे काँटा को अलग किया देश का विभाजन कर दिल्ली की गद्दी पर बैठ तो गए पर गद्दी में बैठने के बाद हो रहे विद्रोह को दबाने के लिए कांग्रेस ने तरह-तरह के स्लोगन के प्रलोभन देते हुए 35 वर्ष से अधिक वर्षों तक राज किया पहले तो उन्होंने आरक्षण देकर चुनावी मे जीत हासिल की अंबेडकर के अनुसार आरक्षण को 10 वर्ष के लिए लागू किया जाना था लेकिन कांग्रेस को लगा आरक्षण से उनको एक बड़ा वोट बैंक जो बिखरा हुआ था कांग्रेस के पाले मे संगठित हो रहा है संख्या बल के आधार पर आरक्षण को 10 वर्ष के लिए और बड़ा दिया एससी, एसटी वर्ग के लोगों ने तालियां बजईं और कांग्रेस को झोला भर भर कर वोट दिया कांग्रेस को सत्ता सुख भोगतेहुए हुए 20 बरस हो गये थे |

सत्ता के मद में चूर कांग्रेस का यह वोट बैंक भी धीरे-धीरे खिसकने लगा कांग्रेस की जाति तुष्टिकरण के चलते यहां भी उन्हीं लोगों को इस आरक्षण का लाभ लगातार मिलता रहा जो कांग्रेस के पिट्ठू थे जो क्रीमी लेयर के आरक्षण अधिकार के नीचे बैठे मोज मार रहे थे जिन्हें अब उनके बाद आरक्षण मिलना था उनका हक़ छिन्न कर माजा मार रहे थे इस आरक्षण के घाल मेल की जानकारी जेसे ही आरक्षण के लाभार्थियों को पता चाली जब उनको लगा की उन्हें आरक्षण नहीं मिल पा रहा है तो उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़ना शुरू कर दिया होशियार कांग्रेस ने मुसलमान पर डोरे डाले तरह-तरह के संविधान में संशोधन करते हैं मुस्लिम जाति को प्रबल बनाया यह भीजुम्ला 10 साल के ऊपर नहीं चला मुस्लिम तुष्टीकरण के चक्कर में हिंदू संगठित हो गए और वह कांग्रेस से दूर हो गये यही से कांग्रेस की दुर्गति शुरू हो गई थी ।
अब फिर से कांग्रेस ने पूरे देश में जाति जनगणना करवा कर एक बार फिर इस लॉलीपॉप के सहारे सत्ता में आना चाह रही है. जो दल आज सत्ता में नहीं है वह जातिगत जनगणना से जुड़े तो हैं लेकिन उन्हें मालूम है कि वह जिस जाति का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं उनकी संख्या पूरे देश में बहुत कम है कहीं जाती जनगणना के चक्कर में दूसरी जातियों ने साथ छोड़ दिया तो कहीं के नहीं रहेंगे जेसे पिछड़े वर्ग ने अब कांग्रेस का साथ छोड़ दिया हे कांग्रेस ने ही अपने बीच कार्यकाल में पिछड़ा वर्ग आयोग की घोषणा करते एक और जातिगत संगठन तैयार किया था पर पिछड़े वर्ग में पढ़े-लिखे लोग क्रीमी लेयर के लोग हैं उन्होंने कांग्रेस को काफी हद तक साथ नहीं दिया कांग्रेस का यह लालीपाप पिछड़ों ने नाही चूसा |
लम्बे समय से सत्ता से दूर कांग्रेस ने एक नया पत्ता चला है जिसे जातिगत जनगणना के नाम से लगातार बहस जारी है कांग्रेस अब प्रत्येक जाति को दूसरी जाति के सामने खड़ा करने की सोची समझी चाल चल रही है इतिहास गवाह है की जब देश आजाद हो रहा था तब भी इस बात की चर्चा भी उतनी ही जोर पर थी की यह देश बहुत दिनों तक प्रजा तांत्रिक प्रणाली से स्वतंत्र नहीं रहेगा यहां के नेता यहां की भोली भाली जनता को आपस में लड़ा कर प्रजतंत्र की गद्दी हसिल कर सुरक्षित नहीं रखेंगे ऐसा ही कुछ अंग्रेज भी किया करते थे उसी परंपरा के चलते कांग्रेस के शहजादे अब इस बहस को लेकर मुखर है कि वह सत्ता में आए तो जाति जनगणना करवा कर एक बार फिर एक जाति को दूसरी जाति के सामने खड़ा कर देंगे और जातियां आपस में लड़ती रहेंगे और हम गद्दी पर बैठ जाएंगे




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