रायपुर /// छत्तीसगढ़ के होशियार स्टील उद्योगपतियों ने बिजली की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर उद्योगों को बंद कर दिया ,हे वस्तु स्थिति यह हैकी स्टील उद्योग पिछले वर्ष नवंबर 2023 से मांग की कम होने के कारण मंदी के दौर से गुजर रहा है आगे भी लोहे की मांग को देखते हुए जो बड़े उद्योगपति हैं वह तो जैसे-जैसे सरवाइव कर्ज की स्थिति में है लेकिन मझौले और छोटे स्टील उद्योग इस मंदी के दौर को झेल नहीं पा रहे थे काफी दिनों से छोटी-छोटी मीटिंगें हो रही थी सभी उद्योगपति मिलकर इससे निजात पाने का सोच ही रहे थे की बिजली को लेकर उनको एक बड़ा बहाना मिल गया और उन्होंने बिजली की कीमतों का ठीकरा सरकार पर फोड़कर मजदूर यूनियनों से अपना पीछा छुड़ा लिया सरकार सस्ती बिजली देगी तो उद्योग शुरू होंगे यह सोची समझी रणनीति के तहत लिया गया फैसला है इस फैसले का सीधा-सीधा संदेश यही है की सरकार यदि सस्ती बिजली देती है तो मंदी के दौर में जो घाटा हो रहा है वह काफी हद तक काम हो जाएगा फिर आगे जब फिर से लोहे की मंडी में बूम आएगी तो देखा जाएगा ।
इस पूरे खेल में जो पुरानी सरकार थी उससे मिलकर उद्योगपतियों को लोड फैक्टर के नाम पर भारी छूट दी गई और छूट का फायदा सरकार बैठे कारणधारों में भी लिया मिली जुली कुश्ती चल रही थी की सरकार बदल गई और दुर्भाग्य से पूरे भारत में स्टील और सीमेंट मे मंदी का दौर शुरू हो गया उद्योगपतियों ने सोचा था की सरकार को मजदूरो की आड़ में धमकाया जाएगा और सरकार घुटने टेक देगी लेकिन अभी तक दो बैठक हो चुकी है और सरकार झुकने तैयार नहीं है इस विषम्परस्थितियों में उद्योगपतियों के पास अब एक ही विकल्प रह गया है कि वह अपना उद्योग शुरू करें या फिर उसे परमानेंट बंद कर ।

पिछली सरकार में जब बिजली के लेकर लोड फैक्टर तक के तमाम तरीके के फायदा लेकर उद्योगपति 80 हजार रुपए टन का लोहा बेच रहे थे तब भी इन्होंने आम उपभोक्ताओं को कोई राहत नहीं दी थी तो आज जब लोहे की कीमत 40 से 45 टन हे टन हो गई है तो पुराना ₹ 80000 टन बेचने वाला इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहा हे ।
उच्चदाब स्टील उद्योगों को मिल रही है 713 करोड़ रूपये की बड़ी छूटविभिन्न विकसित राज्यों की तुलना में भी छत्तीसगढ़ में सस्ती बिजली विगत 8 वर्षों में मात्र 35 पैसा प्रति यूनिट ही बढ़ा ऊर्जा प्रभार विगत 8 वर्षों में बढ़ी मंहगाई की तुलना में नाममात्र की वृद्धिछत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा प्रत्येक वर्ग के विद्युत उपभोवताओं के लिए जो पुनरीक्षित विद्युत दरें घोषित की गई हैं उनमें खपत के आधार पर ऊर्जा प्रभार में की गई वृद्धि के बावजूद टैरिफ में लोड फैक्टर पर मिलने वाली छूट के द्वारा 713 करोड़ रूपये की छूट उच्चदाब स्टील उद्योगों को दी जा रही है। यह छूट अन्य किसी भी वर्ग के उपभोक्ता को नहीं मिलती है। नियामक आयोग द्वारा लोड फैक्टर पर मिलने वाली अधिकतम छूट (पॉवर फैक्टर इन्सेन्टिव) को 25 प्रतिशत से घटा कर 10 प्रतिशत किया गया है। उल्लेखनीय है कि लोड फैक्टर पर मिलने वाली छूट को अज्ञात कारणों से, आश्चर्यजनक रूप से बढ़ाया गया था। इस परिस्थिति में भी छत्तीसगढ़ में उच्चदाब स्टील उद्योगों को विकसित सामाजिक-आर्थिक भौगोलिक अधोसंरचना वाले ताप विद्युत उत्पादक अन्य राज्यों की तुलना में काफी रियायती दरों पर ही विद्युत आपूर्ति की जा रही है। नियामक आयोग ने इस छूट को 25 प्रतिशत से घटा कर 10 प्रतिशत कर दिया है जो वर्ष 2021-22 के पूर्व 8 प्रतिशत थी इस तरह वर्तमान छूट भी 2 प्रतिशत अधिक ही रखी गई है।
छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के अधिकृत सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा 01 जून 2024 को वर्ष 2024-25 के लिए विद्युत आपूर्ति की नये दरों की घोषणा की गई है। जिसमें उच्चदाब स्टील उद्योगों के प्रति यूनिट ऊर्जा प्रभार में मात्र 25 पैसे (4.10 प्रतिशत) की वृद्धि कर 1 जून 2024 से प्रति यूनिट ऊर्जा प्रभार 6.35 रूपये निर्धारित किया गया है एवं लोड फैवटर पर मिलने वाली अधिकतम छूट को 25 प्रतिशत से घटा कर 10 प्रतिशत किया गया है, जो 4 वर्ष पूर्व अचानक, आश्चर्यजनक तथा अज्ञात कारणों से 8 प्रतिशत से बढ़ा कर 25 प्रतिशत कर दी गई थी। विद्युत नियामक आयोग द्वारा छूट की दर 10 प्रतिशत करने की कार्यवाही इसलिए की गई ताकि अन्य श्रेणी के तथा सामाजिक-आर्थिक रूप से प्राथमिकता वाले विद्युत उपभोवताओं पर कम भार पड़े। पूर्व में वर्ष 2021-22 में टैरिफ आदेश जारी करते समय लोड फैक्टर छूट, अधिकतम 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया था, जबकि पॉवर कंपनी द्वारा इस प्रकार का कोई भी प्रस्ताव नियामक आयोग को नहीं भेजा गया था।
आयोग द्वारा विगत वर्षों की वास्तविक खपत को आधार मानते हुए, उच्चदाब स्टील उद्योगों की इस वर्ष की अनुमानित खपत 11,237 मिलियन यूनिट का आकलन किया है। इस खपत के आधार पर ऊर्जा प्रभार में की गई वृद्धि के बावजूद भी टैरिफ में लोड फैक्टर पर मिलने वाले छूट के द्वारा रू. 713 करोड़ की छूट टैरिफ के माध्यम से स्टील उद्योगों को प्राप्त हो रही है। इसके अतिरिक्त उच्चतम दाब की अवधि, जो कि प्रतिदिन पहले 6 घंटे थी, उसको भी टैरिफ में 8 घंटे कर दिया गया है, जिसमें स्टील उद्योगों को 80 प्रतिशत ही बिलिंग होगी।
स्टील उद्योगों के टैरिफ का विगत वर्ष 2017-18 से तुलना करते है तो मांग प्रभार में किसी भी प्रकार की वृद्धि नहीं की गई है। ऊर्जा प्रभार के दर में भी 6 रूपये प्रति यूनिट से बढ़कर 6.35 रूपये प्रति यूनिट की गई है, जो कि मात्र 35 पैसे प्रति यूनिट (5.83 प्रतिशत) की वृद्धि विगत सात वर्षों में हुई है। उदाहरण के लिए, छत्तीसगढ़ में जब यह राशि मात्र 6.35 रूपये है तब महाराष्ट्र में 8.36 रूपये, तेलंगाना में 8.10 रूपये तथा मध्यप्रदेश में 7.15 रूपये है।
छत्तीसगढ़ में विगत वर्षों में एचवी-4 स्टील उद्योग के ऊर्जा प्रभार में हुई वृद्धि इस प्रकार है जो कि इन वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में बढी मंहगाई दर की तुलना में बहुत कम है:-
वर्ष ऊर्जा प्रभार (रू. प्रति यूनिट)
2017-18 6.00
2018-19 5.85
2019-20 5.85
2020-21 5.85
2021-22 5.95
2022-23 6.10
2023-24 6.10
2024-25 6.35




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