स्वतंत्रता दिवस के इस महान पर्व पर 130 करोड़ वासियों को दिव्य दूत परिवार की ओर से अनेक अनेक शुभकामनाएं
आज 15 अगस्त 1947 से लेकर 15 अगस्त 2019
तक का सफर स्वतंत्रत
भारत ने तय कर लिया है इस सफर में बहुत से उतार-चढ़ाव इस देश ने देखें है
फिर भी देश का हर नागरिक स्वतंत्रता के लिए समर्पित ही रहा है समय-समय पर इतिहासकारों ने इस
स्वतंत्रता की व्याख्या की खामियों को उजागर किया सरकारों पर उंगलियां उठाई लेकिन
देश आगे चलता ही रहा आगे चलना मानव का स्वभाव है सफलता असफलता चिंता किए बिना आगे बढ़ने वाले मानव को
उसकी मंजिल जरूर मिल जाती है और आज हम उस मंजिल के काफी नजदीक हैं जिसकी आवश्यकता
और जनता की आकांक्षा दोनों को अब साफ दिखाई दे रही है
स्वतंत्र भारत की यह तारीख 130 करोड़ की जनता के मन मस्तिष्क में
स्थिर है इस पर कोई संदेह नहीं है की जो भी सरकारें इस देश के प्रजातंत्र को स्थिर कर कार्य
करती रही है वह सब सराहनीय है लेकिन समय बदला राजनीतिक पार्टियां और राजनेता जब यह समझने लगे की
वोट बैंक के जरिए सत्ता को हासिल कर सकते हैं तो उन्होंने कुछ ऐसे निर्णय कर डालें
जो आज प्रगति की दिशा में भेदभाव पैदा कर रहे हैं भारत में जन्मा मानुष भारत की
नागरिकता का अधिकारी है हमारे संविधान के अनुसार उसे वे सभी अधिकार प्राप्त हैं जो एक नागरिक को मिलना चाहिए लेकिन
वोट बैंक की राजनीति ने
राजनीतिज्ञों पर इतना प्रभाव डाला कि उन्होंने इस अखंड भारत को जातियों के समूह में खंड खंड का
डाला पूरा भारत समाज आज उनकी सोच को निंदनीय दृष्टि से देख रहा है ताज्जुब इस
बात का कि वह भ्रष्टाचार से कमाए गए अकूत धन के घमंड में अभी भी इतने तने हुए
हैं की जैसे वह इस प्रजातांत्रिक देश में राज करने के लिए ही पैदा हुए भारत बदल
गया है अब 40% जवान भारत
का नागरिक इन नेताओं के खोखले वादों में नहीं फंसने वाला उसने दिखा दिया है की जो
हमारी आकांक्षाओं पर खरा नहीं उतरेगा वह घर बैठ जाएगा और उसने देश की कई बड़ी
राजनीतिक पार्टियों को और उनके नेताओं को जिनकी तूती बोलती थी कर बैठा दिया है |
स्वतंत्रता के तत्कालीन
2 साल बहुत
ही कठिन और कटुता पूर्ण स्थिति से
गुजरे थे धर्म के नाम पर बांटे गए अखंड
भारत के दो टुकड़े एक पाकिस्तान दूसरा हिंदुस्तान हो गया था इस बंटवारे से ना तो
पाकिस्तानी खुश थे और ना ही हिंदुस्तानी कुछ स्वार्थी नेताओं ने धर्म को संप्रदाय
का रूप देकर लाखों लोगों का कत्लेआम करवा दिया यह शर्मनाक बटवारा पूरे विश्व की नजरों में शर्म से झुकने वाला ही था पूरे विश्व में और भी देश आजाद हुए पर
वहां मानव की हत्या के मामले नहीं थे भारत की आजादी और पाकिस्तान की आजादी के लिए यह कत्लेआम बदनाम दाग धब्बा है ऐसा
नहीं होना चाहिए था लेकिन हुआ इतिहास गवाह है उस वक्त के कर्ता-धर्ता को सृष्टि कभी माफ नहीं करेगी उस मंजर की भयानक तस्वीरें आज मैं देख रहा था सोच भी रहा था की यह बंटवारा आपसी सद्भाव से भी तो हो सकता था
लेकिन ऐसा नहीं हुआ मेरा मानना है कि इससे शर्मनाक बंटवारा स्वतंत्रता शायद
ही विश्व के किसी देश को इस तरह
की त्रासदी से गुजरना पड़ा
हो |
आज लाल किले से 73 वा स्वतंत्रता दिवस मनाते हुए
वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो भाषण दिया वह धारा 370 और 35 A के इर्द-गिर्द ही था धारा 370 हटाने के बाद मोदी आश्वासन दे रहे
थे की अब एक नेशन एक संविधान का वह सपना जो
130 करोड़
देशवासियों का था पूरा हो गया उन्होंने लाल किले से इशारों इशारों में कहा की वोट बैंक के लिए कुछ परिवारों ने
पूरे देश के साथ जो किया वह हम नहीं होने देंगे देश को ऊंचाइयों तक तेज गति से ले जाने
का काम हमारी सरकार करेगी अब पूरा भारत एक भारत एक संविधान के नियमों के तहत चलेगा




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