दिव्य-दूत

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कलिंगा विश्वविद्यालय ने “जुडेक्स 2.0 मूट कोर्ट प्रतियोगिता और संकाय विकास” का ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किए

Administrator 31-07-2024 19:03:23


नया रायपुर 31/07/2024//  कलिंगा विश्वविद्यालय के विधि संकाय ने दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक आयोजन किया । जुडेक्स 2.0 : सुराना और सुराना राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून मूट कोर्ट प्रतियोगिता और 'उन्नत शिक्षण शिक्षाशास्त्र और अनुसंधान' पर एक व्यापक छह दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (एफडीपी)।जूडेक्स 2.0 के वर्चुअल राउंड की शुरुआत उत्तराखंड उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश और उत्तराखंड लोक सेवा न्यायाधिकरण के अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति उमेश चंद्र ध्यानी की गरिमामयी उपस्थिति के साथ हुई। न्यायमूर्ति ध्यानी के प्रेरक संबोधन में उभरते कानूनी पेशेवरों के करियर को आकार देने में मूट कोर्ट प्रतियोगिताओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया। यह आयोजन कलिंगा विश्वविद्यालय और सुराना एंड सुराना के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास है।

विधि संकाय के अधिष्ठाता प्रोफेसर डॉ. अजीमखान बी. पठान ने उत्साहपूर्ण स्वागत भाषण दिया, जिसके बाद कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. आर. श्रीधर ने मुख्य भाषण दिया, जिसमें उन्होंने छात्रों में कानूनी कौशल और वकालत कौशल बढ़ाने में ऐसी प्रतियोगिताओं के महत्व को रेखांकित किया। श्री प्रीतम सुराना, पार्टनर- विवाद समाधान एवं प्रमुख - शैक्षणिक पहल, सुराना एंड सुराना इंटरनेशनल अटॉर्नीज ने भी अपने विचार साझा किए तथा प्रतिभागियों एवं संकाय सदस्यों को प्रेरित किया। पूरे भारत से 20 से अधिक टीमों ने भाग लिया, जो मानवाधिकार मुद्दों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सेमीफाइनल और फाइनल 17 अगस्त, 2024 को नया रायपुर में कलिंगा विश्वविद्यालय परिसर में होने वाले हैं।

इसके साथ ही, कलिंगा विश्वविद्यालय ने 'उन्नत शिक्षण शिक्षाशास्त्र और अनुसंधान' पर छह दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का भी आयोजन किया। कार्यक्रम की शुरुआत कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. श्रीधर और विधि संकाय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. अजीम खान पठान द्वारा दीप प्रज्ज्वलन समारोह से हुई। गोवा स्थित इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च के कुलपति प्रो. डॉ. आर. वेंकट राव ने मुख्य भाषण दिया, जिसमें उन्होंने उच्च और निम्न शिक्षा के बीच भेदभाव किए बिना सीखने की निरंतर प्रकृति और शिक्षण प्रक्रियाओं के उन्नयन पर जोर दिया।

ज्ञानवर्धक सत्रों की शुरुआत डॉ. प्रो. विजय कुमार सिंह, अधिष्ठाता, स्कूल ऑफ लॉ, एसआरएम सोनीपत, हरियाणा द्वारा ‘पाठ्यक्रम डिजाइन और पाठ्यक्रम वितरण पर ब्लूम टैक्सोनॉमी के कार्यान्वयन’ पर चर्चा के साथ हुई। डॉ. मनीष यादव, एसोसिएट प्रोफेसर, नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, भोपाल ने केस लॉ पद्धति की प्रभावशीलता पर एक सत्र का नेतृत्व किया।

धर्मशास्त्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जबलपुर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मानवेन्द्र तिवारी ने ‘परिणाम आधारित शिक्षण और अधिगम’ पर प्रकाश डाला, जिसके बाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, असम के प्रोफेसर डॉ. देबाशीष पोद्दार ने कानूनी सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, केरल के विधि संकाय के सहायक प्रोफेसर डॉ. अनीश पिल्लई ने ‘क्लिनिकल कानूनी शिक्षा के महत्व’ पर बात की। आईआईएलएम के प्रो. डॉ. एम. अफजल वानी ने शोध की जटिलताओं पर चर्चा की। भारतीय विधि संस्थान के निदेशक प्रो. डॉ. वी. के. आहूजा ने शिक्षण चुनौतियों और चैटजीपीटी जैसे एआई अनुप्रयोगों पर चर्चा की। डॉ. गगनदीप कौर, एसोसिएट प्रोफेसर, यूपीईएस देहरादून ने उन्नत शोध डिजाइन पर विस्तार से चर्चा की। प्रो. डॉ. तबरीज़ अहमद, संस्थापक अधिष्ठाता, मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद ने पारंपरिक और आधुनिक शिक्षण विधियों की तुलना की। धर्मशाला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. मनोज कुमार सिन्हा ने विधि में अंतःविषयी दृष्टिकोण पर जोर दिया। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों की समझ का आकलन करने के लिए बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी के साथ हुआ।

सप्ताह भर चलने वाले इस कार्यक्रम का समापन एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तरी के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों के सीखने के परिणामों का मूल्यांकन किया गया।जूडेक्स 2.0 और एफडीपी की संयुक्त सफलता, कानूनी शिक्षा और व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कलिंगा विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

 

 

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