नरेन्द्र कुमार वर्मा
नई दिल्ली 31/07.2024 // बीते दिनों राष्ट्रीय राजधानी के राजेंद्र नगर में एक कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में पानी भर जाने के कारण 3 छात्रों की मौत हो गई थी जिनमें 2 लड़कियाँ शामिल थीं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अब इस मामले पर सुनवाई करते हुए प्रदेश की अरविंद केजरीवाल सरकार की फ्री की राजनीति पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि लगता है सरकार ने अपना दिमाग खो दिया है। इस मामले की जाँच कर रहे पुलिस अधिकारी आखिर क्या कर रहे हैं। केवल एक अधिकारी को जेल भेजा गया। आखिरकार अंत में किसी को तो जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी। नगर निगम को लताड़ लगाते हुए अदालत ने कहा कि इसे ठीक करना होगा। वरिष्ठ अधिकारी जिम्मेदारी लें और अपने मगर वह चैंबरों से बाहर निकलने के लिए तैयार ही नहीं हैं। अदालत ने कहा कि हम पूरे परिदृश्य को देखना चाहते हैं। इसीलिए इस मामले की जाँच लोकपाल से कराने पर विचार किया जाएगा।”
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल फ्री में बिजली-पानी देने का वादा कर चुनाव जीतते रहे हैं। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और जस्टिस तुषार राव गेडेला ने कहा कि फ्री की संस्कृति के कारण सरकार के पास इंफ्रास्ट्रक्चर को उन्नत बनाने के लिए पैसे ही नहीं हैं।
अदालत ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक तरफ जहाँ दिल्ली में जनसंख्या तेज़ी से बढ़ती जा रही है। वहीं दूसरी तरफ यहाँ का ड्रेनेज सिस्टम बर्बाद हुआ पड़ा है। न्यायधीशों ने कहा कि आप कई मंजिला इमारतों के निर्माण की अनुमति दे रहे हैं।मगर अपाके पास ठीकठाक ड्रेनेज सिस्टम भी नहीं है। अदालत ने कहा कि दिल्ली की नागरिक संस्थाएँ कंगाल हो चुकी हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार से पूछा कि अगर आपके पास कर्मचारियों को वेतन तक देने के लिए पैसे नहीं हैं तो आप इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास कैसे करेंगे।
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उच्च न्यायालय ने कहा कि कि आप दिल्ली का विकास चाहते हैं मगर आप कोई धन संग्रह नहीं कर रहे। इसीलिए आप पैसे खर्च भी नहीं कर रहे। दिल्ली हाईकोर्ट ने विकास परियोजनाओं पर काम करने के लिए कहा था। लेकिन सरकार ने कहा कि 5 करोड़ रुपए से अधिक बजट वाली हर परियोजना के लिए स्टैंडिंग कमिटी की अनुमति चाहिए।




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